ऑस्टियोपोरोसिस क्या है?

फरवरी 28, 2016

हड्डियों की समस्या वर्तमान समय की एक आम समस्या है, जिससे अधिकांश लोग किसी ना किसी रूप से पीड़ित है। हड्डियों से जुड़ी हर छोटी से छोटी तकलीफ़ भी एक बड़े रोग का लक्षण हो सकती है। इन समस्याओं को गंभीरता से ले, ताकि कहीं देर ना हो जायें…… शायद आपको यह लगता होगा, कि दिन में एक गिलास दूध पी लेने से हड्डियों में एक दिन के कैल्शियम की पूर्ति हो जाती है? असल में ऐसा नही है। कैल्शियम हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाये रखने के साथ-साथ ब्लड क्लॉटिंग और मांसपेशियों के विकाश में भी सहायक है। इसलिए हमारे शरीर को कैल्शियम अधिक मात्रा में चाहिए। यदि किसी को दिल की बीमारी या पथरी है तो उसे कैल्शियम की अत्‍यधिक मात्रा से बचना चाहिए। ऐसी स्थिति में अपने डॉक्टर के संपर्क से कैल्शियम की मात्रा तय करे। हड्डियों की समस्याओं में से एक आम समस्या है ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis)।

ऑस्टियोपोरोसिस एक तरह का छुपा हुआ रोग है क्योंकि इसकी वजह से कमजोर होती हड्डियों के बारे में तब पता चलता है, जब साधारण चोट लगने से कोई हड्डी टूट ही ना जायें। आज के दौर में यह बहुत ही गंभीर समस्या है। हड्डी टूटने की अवस्था तब उत्पन होती है, जब हड्डियां भुरभुरी और कमजोर हो जाती है। इसके बावजूद शुरुआती अवस्थाओं में कुछ संकेत जरूर मिलते है, जिन्हें नज़रअंदाज ना करे, उन्हें पहचाने और समय रहते इसकी रोकथाम के उपाय अपनायें। आइये इस लेख द्वारा यह जानने की कोशिश करते है कि ऑस्टियोपोरोसिस क्या है, इसके कारण व संकेत क्या है और इसके रोकथाम के उपाय क्या है।

ऑस्टियोपोरोसिस क्या है?

वर्तमान जीवनशैली को देखते हुए यह समस्या बहुत कम उम्र के लोगों में भी होने लगी है। ज्यादातर यह समस्या 45 से 50 या अधिक उम्र के लोगों में होती है। हमारे शरीर में हर दस साल में पुरानी अस्थि कोशिकाएं नष्ट होती है और उनका स्थान नई कोशिकाएं ले लेती है, जिससे शरीर का पूरा ढांचा फिर से नवीन हो जाता है। लेकिन ऑस्टियोपोरोसिस कि समस्या हो जाने पर हड्डियों का क्षरण अधिक और नवनिर्माण कम हो जाता है। ये रोग महिलाओं में अधिक होता है क्योंकि मेनोपॉज के बाद उनके शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्मोन का स्त्राव असंतुलित हो जाता है जो हड्डियों को क्षति पहुँचाता है। इसलिए महिलाओं में होने वाली यह एक सामान्‍य बीमारी है। मेनोपॉज के बाद अधिकांश महिलाओं में कमजोरी और कमर दर्द की शिकायत बनी रहती है। जिस कारण ऐसी स्थिति में कई बार हड्डियों में फ्रैक्‍चर होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

ऑस्टियोपोरोसिस के कारण क्या है?

डिलीवरी और मेनोपॉज के बाद महिलाओं में कैल्शियम की कमी अधिक हो जाती है जिस कारण बढ़ती उम्र की महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस एक आम समस्या है। इसके अलावा अनियमित जीवनशैली, भोजन में पौष्टिकता के साथ विटामिन डी व कैल्शियम की कमी, थायरॉइड व मधुमेह जैसे रोग आदि के कारण से भी ऑस्टियोपोरोसिस समय से पहले दस्तक देने लग जाता है। कैल्शियम और फॉस्फोरस हमारी हड्डियों में जमा होता है। दिल, मांसपेशियों और तंत्रिकाओं को कैल्शियम की जरूरत पड़ती है, जो इन्हें रक्त द्वारा प्राप्त होता है। अतः भोजन में कैल्शियम की कमी से खून में भी कैल्शियम कम हो जाता है। तो इस स्थिति में अंगों के लिए जरूरी कैल्शियम हड्डियों से लिया जाता है और वे दिन प्रतिदिन कमजोर होती रहती है।

ऑस्टियोपोरोसिस के संकेत क्या है?

इस समस्या में प्रायकर हड्डियों में दर्द या अकड़न कि शिकायत बनी रहती है। धीरे-धीरे शरीर झुकने लगता है। ऐसी परेशानी से पीड़ित लोग बैठते वक्त भी अक्सर झुक कर बैठते है। थकान और कमजोरी अक्सर बनी रहती है। यदि ऐसे कोई भी संकेत या लक्षण नजर आयें, तो तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करें। इस बीमारी की पुष्टि के लिए BMD की जांच की जाती है। रोग की पुष्टि होने पर अतिशीघ्र उपचार शुरू कर दे, जिससे समय रहते हड्डियों को फिर से मजबूती दी जा सके।

ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम जरूरी है-

  1. शुरुआती अवस्था में पता चलते ही कैल्शियम और विटामिन डी जैसे जरूरी स्‍पलिमेंट्‍स लेने की सलाह दी जाती है। साथ ही शारीरिक रूप से भी सक्रिय रहना जरूरी है। ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें खाने-पीने से संबंधी कोई परहेज नही होता लेकिन संतुलित आहार अनिवार्य है।
  2. दूध या दूध से बनी चीजें जैसे कि – दही, छाछ या पनीर आदि का सेवन जरूर करें, यह कैल्शियम के अच्छे स्त्रोत है। रोगी को प्रतिदिन 800 से 1200 मि० ग्रा० कैल्शियम जरूर लेना चाहिए।
  3. सभी तरह के सूखे मेवे, ताज़ा हरी सब्जियाँ, अंडे, चने, राजमा, रागी के आटे की रोटी इत्यादि आहार में शामिल करें।
  4. कैल्शियम का अवशोषण करने के लिए शरीर को विटामिन डी की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए सुबह की हल्की-हल्की धूप कम से कम 20 मिनट के लिए अवश्य लें। क्योंकि आज भी विटामिन डी का सबसे अच्छा स्त्रोत धूप ही है। तेज धूप में ज़बरदस्ती ना बैठे, इसके अतिरिक्त मशरूम, दूध और अंडे के पीले हिस्से में भी विटामिन डी थोड़ी मात्रा में मौजूद होता है।
  5. व्यायाम को जीवनशैली का अहम हिस्सा बनाएं। कुछ ऐसे व्यायाम करे जिससे आपकी मांसपेशियाँ और हड्डियाँ मजबूत हो। अपनी दिनचर्या में 30 मिनट व्यायाम का रखे। अगर आप पहले से ही दिल के रोग या मधुमेह से ग्रस्त है, तो शारीरिक स्थिति के अनुसार सैर या हल्की वर्जिश को ही प्राथमिकता दें। यह सब कुछ चिकित्सक की सलाह व देखरेख में करें।
  6. बादाम में कैल्शियम, विटामिन ई और ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है। बादाम में मौजूद फॉस्फोरस हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है। अखरोट में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, इसलिए यह मांसपेशियों और हड्डियों की तकलीफ से राहत दिलाता है। नियमित सुबह खाली पेट 3-4 अखरोट की गिरी खाने से हड्डियां मजबूत होती है। साथ ही हड्डियों से जुड़ी बिमारियों के होने का खतरा भी कम हो जाता है।

ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या में सिर्फ़ हड्डियाँ ही कमजोर नही होती बल्कि शरीर के कई अंग भी प्रभावित होते है जैसे दाँत, नाख़ून, मांसपेशियाँ आदि। आहार में पौष्टिकता और सतर्कता से हम इस विकार को बड़ी आसानी से दूर कर सकते है। यह कोई लाइलाज बीमारी नही है। वर्तमान समय में ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या सिर्फ़ महिलाओं में ही नही बल्कि पुरुषों में भी देखने को मिलती है। इसलिए सतर्कता और सावधानी सभी के लिए ज़रूरी है। क्योंकि असंतुलित भोजन से ऑस्टियोपोरोसिस जैसा रोग किसी को भी हो सकता है। समस्या सामने आते ही अपने डॉक्टर से उपचार तुरंत लें, जिससे कुछ समय पश्चात आप फिर से एक स्वस्थ जीवन जी सकें।

हमारा उद्देश्य ऑस्टियोपोरोसिस के बारे में आपका सामान्य ज्ञान बढ़ाना था। ऑस्टियोपोरोसिस क्या है, ऑस्टियोपोरोसिस के संपूर्ण इलाज के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क ज़रूर करे।

“आपके शरीर में भी आ गई है कमजोरी? तो इन घरेलु उपायों से करें दूर”

अगर आप हिन्दी भाषा से प्रेम करते हैं और ये जानकारी आपको ज्ञानवर्धक लगी तो जरूर शेयर करें।
शेयर करें