अर्थिंग क्या है?

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आइये जानते है अर्थिंग क्या है और क्यों जरूरी है। हम सभी नए घर में वायरिंग करवाते समय बहुत सी बातों को महत्त्व देते हैं ताकि वायर फिटिंग अच्छे तरीके से हो जाये और दिखने में भी ख़राब ना दिखाई दे। लेकिन इतना सब करने के बावजूद कभी-कभी हमें किसी उपकरण में खराबी आने पर झटका सा महसूस होता है। जो कई बार इतना तेज होता है कि अस्पताल तक जाना पड़ जाता है।

ऐसी हाई वोल्टेज से उपकरण भी ख़राब हो जाते हैं और हजारों रुपयों का नुकसान पलभर में हो जाता है। ऐसे में ये सोचना जरुरी है कि सुरक्षा के सारे पुख्ता इंतजाम करने के बाद भी झटका लगने की क्या वजह रही होगी। तो चलिए, आज इसी बारे में बात करते हैं।

आपने अर्थिंग के बारे में सुना जरूर होगा, भले ही इसके बारे में ज्यादा जानकारी आपके पास ना हो। किसी उपकरण से झटका लगने का कारण इससे जुड़ा होता है।

इसकी जानकारी ज्यादा लोगों को नहीं होती है इसलिए घरों में वायरिंग करवाते समय इस बात की ओर ध्यान नहीं दिया जाता और स्थिति खतरनाक बन जाती है।

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अर्थिंग क्या है?

अर्थिंग या भू तार घर की वायरिंग में इस्तेमाल होने वाली ऐसी युक्ति होती है जिससे किसी उपकरण के ख़राब होने की स्थिति में भी झटका नहीं लगता है। क्योंकि अर्थ का तार होने पर हाई वोल्टेज आने की स्थिति में करंट जमीन में चला जाता है। इसलिए स्विच बोर्ड में कनेक्शन करते समय भू तार या ग्राउंडिंग का तार भी लगाया जाना चाहिए।

अर्थिंग कई प्रकार की होती है जैसे पाइप अर्थिंग, रॉड अर्थिंग और प्लेट अर्थिंग।

आपने गौर किया होगा कि किसी उपकरण के कनेक्शन वायर के प्लग में सिर्फ 2 पिन ही होती है जबकि किसी उपकरण के प्लग में 3 पिन भी लगी होती है। ऐसे 3 प्लग वाले उपकरण के प्लग के 2 कनेक्शन पिन इनपुट सप्लाई के लिए होते हैं जबकि तीसरा पिन भू तार कनेक्शन के लिए होता है।

इसी तरह आयरन के पावर प्लग में भी 3 पिन होते हैं जिनमें ऊपर वाला पिन भू तार कनेक्शन के लिए होता है। अर्थिंग वाला पिन किसी भी उपकरण के कैबिनेट से कनेक्शन किया हुआ होता है।

उम्मीद है जागरूक पर अर्थिंग क्या है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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