आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है?

अप्रैल 18, 2018

AI यानि artificial intelligence से जुड़ी कई ख़बरें आपने भी जरूर सुनी होगी लेकिन क्या आप इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का मतलब समझ पाए हैं। असल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंप्यूटर साइंस एंड टेक्नोलॉजी से सम्बंधित टर्म है जिसकी शुरुआत 1950  के दशक में हुयी और इसका उद्देश्य ऐसी मशीन बनाना रहा है जो इंसानी व्यवहार की नकल कर सके। ऐसे में इस कृत्रिम बुद्धिमत्ता या कृत्रिम दिमाग के बारे में आपको भी जरूर जानना चाहिए ताकि आप टेक्नोलॉजी के एडवांसमेंट से अवगत हो सके। तो चलिए, आज जानते हैं इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में-

इंसानों में ये गुण प्राकृतिक रूप से पाया जाता है कि उनमें सोचने-समझने और सीखने की क्षमता होती है ठीक उसी तरह एक ऐसा सिस्टम विकसित करना जो आर्टिफिशियल तरीके से सोचने, समझने और सीखने की क्षमता रखता हो और व्यवहार करने और प्रतिक्रिया देने में मानव से भी बेहतर हो, उसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहते हैं।

कई बार हम रोबोट को AI  समझ लेते हैं जबकि रोबोट तो ऐसा सिस्टम है जिसमें AI डाला जाता है। असल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक ऐसी स्टडी है जिसमें ऐसा सॉफ्टवेयर डवलप किया जाता है जिससे एक कंप्यूटर इंसान की तरह और इंसान से भी बेहतर रेस्पॉन्स दे सके। इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में कई सब्जेक्ट्स शामिल होते हैं जिनमें गणित, समाजशास्त्र, दर्शन के अलावा भाषा का ज्ञान भी शामिल होता है।

आइये अब जानते हैं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रकार-

1. Weak AI – इसे आर्टिफिशियल नैरो इंटेलिजेंस भी कहा जाता है। ये किसी एक स्पेसिफिक डिवाइस में ही अच्छे से काम कर सकते हैं। जैसे –  अगर आपका कंप्यूटर चेस गेम खेलता है तो वो चेस गेम खेलने में ही एक्सपर्ट रहेगा और बाकी कोई भी काम नहीं कर सकेगा इसलिए उसे वीक एआई कहेंगे।

2. Strong AI – ये एक ऐसा सिस्टम है जिसमें इंसान और मशीन दोनों का दिमाग लगभग बराबर हो जाता है यानी जो काम इंसान आसानी से कर सकते हैं वही सब काम रोबोट और मशीन भी आराम से कर पाते हैं इसलिए इसे Strong AI  या आर्टिफिशियल वाइड इंटेलिजेंस भी कहते हैं।

इन दो प्रकारों के अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता में विलक्षणता भी शामिल हो सकती है, जिससे रोबोट और मशीन इंसान से कहीं बेहतर सोच-समझ और विचार रख सकेंगे यानी मशीन इंसान को पीछे छोड़ देगी।

एक्सपर्ट सिस्टम, गेम प्लेयिंग, स्पीच रिकग्निशन, नेचुरल लैंग्वेज, कंप्यूटर विज़न, न्यूरल नेटवर्क, रोबोटिक्स, फाइनेंस, कंप्यूटर साइंस, वेदर फोरकास्ट और एविएशन AI  के मुख्य एप्लीकेशन हैं।

AI ने इंसानों के काम को बहुत आसान बना दिया है। जो काम 100 इंसानी दिमाग मिलकर करते हैं उसे एक मशीन कुछ ही सेकंड्स में निपटा सकती है।

ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने हमारी ज़िन्दगी और काम करने के तरीके को काफी सरल बना दिया है लेकिन ये सुविधा भी हमारे लिए खतरा बन सकती है क्योंकि अभी तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युक्त मशीनें इंसानों द्वारा की गयी प्रोग्रामिंग से ही चल रही है लेकिन बहुत जल्द जब एक मशीन अपने निर्णय खुद लेने लगेगी तो ये हम इंसानों को मुश्किल में डाल देगी।

इसका अंदाज़ा आप उन फिल्मों से लगा सकते हैं जिनमें रोबोट्स ने निर्देशों को मानने की बजाए अपने मनमाफिक काम करना शुरू कर दिया था। ऐसे में ये जरुरी है कि तकनीक और मशीनों को इतना कुशल जरूर बनाया जाए ताकि हमारी मुश्किलें हल हो सकें लेकिन इन मशीनों और तकनीकों की लगाम इंसान के हाथ में ही होनी चाहिए तभी इसे तरक्की कहा जाएगा वरना ये तरक्की ख़तरे की घंटी भी बजा सकती है।

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