असहिष्णुता क्या है?

मार्च 18, 2018

व्यक्ति के सद्गुणों में एक विशेष गुण होता है सहिष्णु होने का गुण, जो उसे घर-परिवार, समाज और देश से जोड़े रखता है। सहिष्णुता का अर्थ होता है सहन करना और वर्तमान में इस गुण की बहुत कमी महसूस की जा रही है क्योंकि आजकल कोई भी व्यक्ति सहन करने को तैयार नहीं है। सभी को विरोध करना पसंद आने लगा है, समायोजन की जगह बगावत की राह चुनना आज एक आम बात हो गयी है। फिर चाहे मसला छोटा हो या बड़ा, परिवार तक सीमित हो या देश से जुड़ा हो। जितनी जरुरत स्वभाव में सहिष्णुता को बढ़ाने की है, उससे कही ज़्यादा असहिष्णु माहौल बढ़ता जा रहा है, जो हर तरह के संबंधों के लिए घातक साबित हो रहा है, साथ ही देश की शांति भंग करने की ओर भी तेज़ी से बढ़ रहा है। ऐसे में ये जान लेना जरुरी है कि आखिर असहिष्णुता होती क्या है, ताकि हम इससे उबरने का रास्ता ढूंढ सकें। तो चलिए, आज इसी बारे में बात करते हैं-

एक ओर सहिष्णुता विविधता में एकता को बढ़ावा देती है वहीँ दूसरी ओर असहिष्णुता एकता में अलगाव पैदा करती है और इस अलगाव का कारण कुछ भी हो सकता है, जैसे किसी की राय या विचार से सहमत नहीं होने की स्थिति, किसी समूह के विश्वासों और मान्यताओं को अस्वीकार करने की स्थिति या किसी धर्म-जाति के विचारों से अलग विचार रखने की स्थिति।

धार्मिक विचारों को लेकर आये दिन उग्र रवैया देखने को मिलता है जिसे असहिष्णुता कहा जा सकता है और अपने-अपने धर्म को सही और सशक्त साबित करने के प्रयास कब हिंसक रूप ले लेते हैं, इसका अंदाज़ा किसी को नहीं हो पाता। इसी असहिष्णुता के चलते पड़ोसियों में प्रेमभाव की जगह लड़ाई-झगड़े हुआ करते हैं और जब दो पड़ोसी देशों के बीच सहिष्णुता में कमी आती है तो युद्ध की स्थिति भी बन जाती है।

केवल धर्म और जाति से सम्बन्ध रखने वाले मसले ही असहिष्णु रूप नहीं लेते बल्कि किसी भी मुद्दे पर एक राय नहीं होने और दूसरे के विचारों को सम्मान के साथ नहीं सुनने की स्थिति भी असहिष्णुता को पैदा कर देती हैं और असहिष्णुता से कभी भी किसी समस्या का हल नहीं निकलता, ना ही माहौल शांतिपूर्ण बनता है।

इतिहास गवाह है कि हर युद्ध, लड़ाई और वैचारिक मतभेद के पीछे इसी असहिष्णुता का ही हाथ था और हर बार असहिष्णुता से असहिष्णुता ने ही जन्म लिया है। वर्तमान में ये स्थिति बढ़ती जा रही है।

ऐसे में हमें ये सोचने की जरुरत है कि हमें अपने और अपनों के लिए किस तरह का माहौल चाहिए क्योंकि अगर हम खुशनुमा और शांत माहौल में रहना चाहते हैं तो ये हमारा चुनाव होगा कि हम सहिष्णुता की ओर बढ़े, ना कि दूसरे के विचारों को अस्वीकार करने के असहिष्णु रूप को अपनाये और ये तो आप जानते ही हैं कि एक कदम आप सही राह पर बढ़ा देंगे तो आपका साथ देने के लिए बहुत से कदम भी उठ जाएंगे। अब आप चुनिए, आप क्या चाहते हैं सहिष्णुता या असहिष्णुता? क्योंकि आप और हम मिलकर ही तो परिवार, पड़ोस, समाज और देश बनाते हैं।

आपको यह लेख कैसा लगा? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है, हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे।

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