अस्थि मज्जा क्‍या होता है?

बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बारे में तो आपने जरूर सुना होगा और बोन मैरो यानी अस्थि मज्जा के बारे में आप जानना भी चाहते होंगे। तो चलिए, आज आपको बताते हैं अस्थि मज्जा क्‍या होता है –

  • अस्थिमज्जा जिसे अस्थिमेरु भी कहा जाता है, शरीर की अस्थियों के बीच मौजूद ऐसा मुलायम और स्पंजी भाग होता है जिसमें रक्त का निर्माण होता है।
  • अस्थि मज्जा में अपरिपक्व कोशिकाएं पायी जाती हैं जिन्हें स्टेम सेल्स कहते हैं।
  • ये स्टेम सेल्स ब्लड सेल्स का उत्पादन करती हैं।
  • ये ब्लड सेल्स लाल रक्त कोशिकाओं, श्वेत रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स के रूप में विकसित होती हैं।

अस्थि मज्जा में दो तरह की स्टेम सेल्स होती हैं-

  • हीमोपोएटिक – ये ब्लड सेल्स का निर्माण करती हैं।
  • स्ट्रोमल – ये फैट, कार्टिलेज और बोन बनाती हैं।

अस्थि मज्जा हर दिन 200 बिलियन से भी ज्यादा नयी ब्लड सेल्स का निर्माण करती है। अस्थि मज्जा स्टेम सेल्स का उत्पादन लगातार करती रहती है और शरीर की आवश्यकता के अनुसार ही अलग-अलग प्रकार की सेल्स को विकसित करती है। रेड ब्लड सेल्स शरीर में ऑक्सीजन के प्रवाह के लिए जरुरी है, व्हाइट ब्लड सेल्स संक्रमण से शरीर की सुरक्षा करती है और प्लेटलेट्स चोट लगने पर होने वाले रक्तस्राव को रोकने के लिए रक्त का थक्का बनाती हैं।

अस्थि मज्जा दो प्रकार की होती है-

  • लाल अस्थि मज्जा – लाल अस्थि मज्जा में रेड ब्लड सेल्स और उनमें पाए जाने वाले हीमोग्लोबिन का निर्माण होता है। इसमें रेड ब्लड सेल्स की ज्यादा मात्रा होने के कारण इसका रंग लाल होता है।
  • पीली अस्थि मज्जा – पीली अस्थि मज्जा में वसा और रक्त वाहिकाओं के अलावा रैटिकुलर टिश्यू ज्यादा मात्रा में रहते हैं इसलिए इसका रंग पीला होता है।

अप्लास्टिक एनीमिया, ल्यूकीमिया, लिम्फोमा, मल्टीपल मायलोमा, कीमोथैरेपी, कंजेनिटल न्यूट्रोपेनिया, सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया जैसे रोगों में अस्थि मज्जा के संक्रमित होने और कमजोर हो जाने पर अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण यानी बोन मैरो ट्रांसप्लांट भी करना पड़ता है।

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