जानिए अवचेतन मन क्या है और हमारे जीवन में इसकी क्या महत्वता है

163

मन के चंचल स्वभाव से तो आप परिचित है और कुछ हद तक दिमाग की क्षमताओं के बारे में भी जानते हैं लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि हमारा दिमाग ही वो शक्तिशाली अंग है जिसे आप अपना मित्र भी बना सकते हैं और शत्रु भी। दिमाग की शक्ति अनंत है और दिमाग की इसी शक्ति के बल पर महान खोजें और आविष्कार हुए हैं और इसी दिमाग की पावर को समझ कर लोग महान बन पाए हैं।

अवचेतन मन हमारे मन का कोई भाग या प्रकार नहीं है बल्कि ये हमारे दिमाग के एक हिस्से के रूप में जाना जाता है। असल में, हमारा दिमाग दो हिस्सों में बँटा है – चेतन मन और अवचेतन मन। पानी में तैरते हुए हिमखंड को शायद आपने कभी वास्तविकता में या फिर फिल्मों में देखा हो, उस हिमखण्ड का मात्र 10 प्रतिशत भाग पानी की सतह से ऊपर दिखाई देता है और बाकी 90 प्रतिशत भाग सतह से नीचे रहता है। बिल्कुल उसी तरह हमारा चेतन मन भी हमारे दिमाग का केवल दस प्रतिशत ही होता है और दिमाग का नब्बे प्रतिशत भाग साधारणतया अवचेतन मन होता है।

हमारे जीवन से जुड़े सारे निर्णय चेतन मन ही लेता है जबकि अवचेतन मन सारी तैयारी और व्यवस्था करता है। चेतन मन ये तय करता है कि क्या करना है और अवचेतन मन ये तय करता है कि उसे ‘कैसे’ साकार रूप देना है। हमारे सारे अनुभव और सूचनाएं हमारे अवचेतन मन में जमा रहती हैं लेकिन जब भी हम उनका उपयोग करना चाहते हैं तो वो चेतन मन का हिस्सा बन जाती हैं। चेतन मन किसी बात को सुनना, उसका तार्किक निर्णय करना जैसे दैनिक कार्य करने में हमारी मदद करता है जबकि अवचेतन मन के पास कोई तर्कशक्ति नहीं होती, ये हमारी बातों को बिना किसी तर्क के ही मान लेता है। किसी बात को तर्क या सही-ग़लत की कसौटी पर कसने की बजाये अवचेतन मन तुरंत प्रतिक्रिया देता है।

हमारे चेतन मन द्वारा सोचा गया विचार, मस्तिष्क के संपर्क में आकर अवचेतन मन के संपर्क में आता है और उसके बाद ही वास्तविकता में बदलता है यानि अवचेतन मन ही इन विचारों को साकार करता है।

आपको जानकर हैरानी ज़रूर होगी कि हम अपने दैनिक कार्यों में अधिकतम 5% दिमाग का ही इस्तेमाल करते हैं और हमारा अवचेतन मन दिमाग का वो हिस्सा है जिसे एक साधारण इंसान कभी प्रयोग ही नहीं करता है। अवचेतन मन हमारी कही हुयी बात को बिना तर्क लगाए मानकर उसी दिशा में कार्य करने लगता है इसलिए जैसे विचार हम सोचते रहते हैं वैसे ही परिणाम हमें मिलने लगते हैं यानि अगर आप पॉजिटिव सोच बनाये रखते हैं तो ये अवचेतन मन आपको पॉजिटिव रिजल्ट ही देने लगेगा जबकि नेगेटिव विचारों के बदले में परिणाम भी विपरीत मिलने शुरू हो जाएंगे क्योंकि अवचेतन मन वही सच मानता है जो आप उसे बताते हैं।

अवचेतन मन किसी भी कार्य को करने में दो नियम अपनाता है। पहला, बार बार कही जाने वाली या दोहराये जाने वाली बातें अवचेतन मन का हिस्सा बन जाती है और दूसरा नियम, अवचेतन मन सच और कल्पना में अंतर नहीं करता। इन दोनों नियमों को समझकर आप अपने जीवन में अपने अनुसार बदलाव ला सकते हैं और बड़ी आसानी से अपना जीवन अपने अनुसार जी सकते हैं। इसके लिए आपको अपने मनचाहे विचार को पूरी दृढ़ता के साथ दोहराना होगा। कोई भी विचार अगर अस्पष्ट होगा तो वो अवचेतन मन को प्रभावित नहीं कर सकेगा। इसलिए अपने जीवन में आप जिन आदतों को बदलना चाहते हैं, जिस स्तर की सफलता चाहते है, पहले उसकी साफ़ छवि अपने दिमाग में बना लीजिये और इसे एक पेपर पर लिख लीजिये। लिखते समय इस बात का ख्याल रखे कि जो भी बेहतर बदलाव आप चाहते हैं उसे वर्तमान काल में ही लिखें, न की भविष्य काल में।

मान लीजिये कि आपको अच्छे विचार नहीं आते हैं लेकिन आप चाहते हैं कि आपको अच्छे विचार आएं तो आप पेपर पर इस तरह लिखें- ‘मुझे अच्छे विचार आते हैं।’ इसके अलावा आपको ये भी ध्यान रखना होगा कि अपने विचारों को आप नेगेटिव रूप में न लिखे। मान लीजिए, आप चाहते हैं कि आपका गुस्सा समाप्त हो जाए तो आप अगर यूं लिखेंगे कि अब मुझे गुस्सा नहीं आता, तो आप गुस्से को ही दोहरा रहे हैं। इसकी बजाये आपको लिखना होगा कि मेरा व्यवहार शांत है। अवचेतन मन को दी गयी जानकारी ही उसके लिए सच होती है जिसे वो तुरंत प्रतिक्रिया के रूप में आपके सामने लाना शुरू कर देता है। जितनी प्रबल आपकी सोच होती जायेगी उतने ही जल्दी आपको परिणाम भी मिलने शुरू हो जायेंगे। बस आपको हर क्षण इतना ध्यान रखने की ज़रूरत होगी कि आप पॉजिटिव विचार रखें और उन्हें लिखने और अपने दिमाग में दोहराने का तरीका सकारात्मक ही रखें। इसके अलावा आपको अवचेतन मन की शक्ति पर भी यकीन करना होगा क्योंकि बिना यकीन किये, हमारे विचारों में स्पष्टता नहीं आएगी जिसके कारण अवचेतन मन विचारों को अनदेखा कर देगा।

अब तो आप जान गए हैं कि आपके पास अवचेतन मन के रूप में कितनी बड़ी शक्ति मौजूद है जिसका सही इस्तेमाल करके आप अपने जीवन की कायापलट कर सकते हैं क्योंकि चेतन मन की क्षमतायें सीमित होती है जबकि अचेतन मन की कोई सीमा ही नहीं होती। तो बस, देर किस बात की। मनचाहा जीवन जीना अब आपके अपने दिमाग में हैं तो इसी पल से अच्छा सोचना शुरू कर दीजिये और अपने लिए एक बेहतरीन ज़िन्दगी को तैयार कर लीजिये।

“कैसे करें मन पर नियंत्रण”
“क्या आपका पढ़ने में मन नहीं लगता? इन बातों का रखेंगे ख्याल तो पढ़ने में हमेशा लगेगा मन”
“पढ़ाई में मन लगाने के कुछ सरल उपाय”

Add a comment