आयुर्वेद के सदा स्वस्थ रहने के 10 मन्त्र

आयुर्वेद के अनुसार हमारा शरीर पांच तत्वों से मिल कर बना है और ये पांच तत्व है आकाश, वायु, तेज, जल और पृथ्वी। हमारे शरीर की प्रकृति भी भिन्न भिन्न होती है जैसे वात, पित्त और कफ़ की प्रकृति और इसी प्रकृति के अनुरूप शरीर में बीमारियां उत्पन्न होती है। ऐसे में ये आवश्यक हो जाता है कि हम अपने शरीर को प्राकृतिक पोषण दे ना कि पोषण रहित भोजन और अनियमित जीवनशैली से इन तत्वों का संतुलन बिगाड़े। तो चलिए, आज आपको बताते है आयुर्वेद के ऐसे कुछ प्राकृतिक तत्व जो किसी औषधि से कम नहीं –

तुलसी और काली मिर्च – अगर आप रोज़ सुबह दस तुलसी के पत्ते और पांच काली मिर्च को साथ में चबाएंगे तो आपको जल्दी जल्दी होने वाले सर्दी-ज़ुकाम, बुखार और श्वास रोग अस्थमा नहीं होगा।

सौंठ का प्रयोग – अगर आप बुखार, जुकाम, कफ़ और फ्लू जैसी आये दिन होने वाली बीमारियों से खुद को दूर रखना चाहते है तो पीसी हुयी आधा चम्मच सौंठ और ज़रा सा गुड एक गिलास पानी में इतना उबालिये कि पानी आधा रह जाए और फिर रात को सोने से पहले इसे पी लीजिये।

दालचीनी और शहद – दालचीनी और शहद दोनों ही अपने आप में गुणों की खान है तो सोचिये दोनों मिल कर कितनी राहत दे सकते है। सर्दियों में चुटकी भर दालचीनी का सेवन कर लीजिये या चाहे तो इसे शहद के साथ दिन में दो बार ले ले, ऐसा करके आप सर्दियों में होने वाली आम बीमारियों से अपने शरीर को बचा पाएंगे।

आंवला – आंवला प्रकृति का दिया तोहफा है। इसमें विटामिन सी, विटामिन बी काम्प्लेक्स, कैल्शियम, फॉस्फोरोस और आयरन पाया जाता है। अगर आप इसे किसी भी रूप में रोज़ाना सेवन करेंगे तो आपको उच्च रक्तचाप और दिल का दौरा पड़ने जैसे मुसीबतों का सामना नहीं करना पड़ेगा साथ ही साथ इसके सेवन से आपके चेहरे का तेज़ बढ़ेगा, बाल भी स्वस्थ होंगे और आप शरीर में नयी ऊर्जा महसूस करेंगे।

हरड़ – कहते है कि इंसान के दिल का रास्ता उसके पेट से हो कर जाता है वैसे ही ये भी कहा जाता है कि सभी रोगों की जड़ भी पेट से जुड़ी होती है। ऐसे में स्वस्थ रहने के लिए पेट का स्वस्थ होना सबसे जरुरी होता है। इसके लिए आपको बस इतना करना है कि हर रोज़ एक छोटी हरड़ भोजन के बाद दाँतो के बीच में रखे और इसका रस पेट में जाने दे और जब हरड़ एकदम नरम हो जाये तो इसे चबा चबा कर निगल ले। ऐसा करके आप अपने पेट को तो स्वस्थ बना ही लेंगे साथ ही अपने दाँतो और बालों को भी स्वस्थ रख पाएंगे।

मेथी – सेहत की बातें जब भी होती है मेथी का ज़िक्र खुद-ब-खुद आ ही जाता है। अगर आप चाहते है कि आपका पेट ठीक रहे, ब्लड शुगर नियंत्रित रहे, जोड़ों के दर्द में राहत मिले तो आप मेथीदाना को पीसकर रख ले और इसका एक चम्मच एक गिलास पानी में उबाल कर रोज़ाना पिए।

छाछ – आयुर्वेद में छाछ का विशेष महत्व बताया गया है। शरीर का तेज़ बढ़ाने और स्वस्थ शरीर पाने के लिए रोज़ाना सुबह और दोपहर के भोजन में छाछ का सेवन बेहद फायदेमंद रहता है।

नाक में तेल डालना – रोज़ रात को सोते समय सरसों का तेल नाक में लगाये और बादाम रोगन, सरसों के तेल या गाय के देसी घी की 5–5 बूंदे नाक में डालने से न केवल नाक से जुडी परेशानियां जैसे नाक बंद होना, जुकाम होना और छींकों से निजात मिलेगी बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ भी मिलेगा।

कानों में तेल डालना – कान में कभी कभी 2-3 बूँद तेल डालने से कान स्वस्थ रहते है। सर्दियों में हल्का गर्म और गर्मियों में ठंडा सरसों का तेल डाले लेकिन ध्यान रखे कि अगर आपको कान सम्बन्धी कोई भी समस्या हो तो अपने चिकित्सक से परामर्श ले।

लहसुन का सेवन – लहसुन का स्वाद आपको बेहद पसंद है और आपके भोजन को खुशबू और ज़ायके से भर देने में इसकी अहम भूमिका भी होती है लेकिन स्वाद के साथ साथ सेहत सँवारने में भी इसका कोई जवाब नहीं। रात के खाने के साथ लहसुन की केवल 2 कली लेने से ही आप यूरिक एसिड बनने, दिल की बीमारियों, जोड़ों के दर्द और कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों से दूरी बनाये रख सकते है।

आज हमारी जीवनशैली में भले ही बदलाव आ गए हो लेकिन हमारे मूल में आज भी आयुर्वेद रचा बसा है। आयुर्वेद में सेहत से जुड़ी हमारी हर समस्या का निदान छिपा हुआ है। ऐसे में अगर आप इन छोटी छोटी चीज़ों को अपने आहार में जोड़ ले तो आपको बार बार अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और आप एक स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन को प्राप्त कर सकेंगे। तो देर किस बात की, आज ही से आयुर्वेद के इस वरदान का लाभ उठाइये और स्वस्थ जीवन की और एक बड़ा कदम बढ़ाइए।

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“जीवन संजीवनी आयुर्वेद”

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