आज आपको बताते हैं कि कैसे आप अपने बच्चों के मन से डर को दूर करने में उनकी मदद कर सकते हैं। ये तो आप भी जानते हैं कि बच्चे भले ही ढ़ेरों शरारतें करते हों लेकिन वो मन के सच्चे होते हैं। वो भले ही हर बार अपने आप को बड़ा साबित करने में जुटे रहते हों लेकिन वो छोटे ही होते हैं। वो अपने हमउम्र बच्चों के बीच बहादुर बनने की भले ही कोशिश करते हों लेकिन उन्हें भी डर लगता है। जैसे हर बच्चा अलग होता है वैसे ही उनके डर भी अलग-अलग होते हैं।

किसी को पानी से, ऊंचाई से, अँधेरे से डर लगता है तो किसी को अजनबियों से, नयी जगहों से और अकेले रहने से डर लगता है। जाने ऐसे कितने ही डर बच्चे अपने मन में पाले रखते हैं और अपने पैरेंट्स से ये उम्मीद करते हैं कि वो सुपर डैड और सुपर मॉम की तरह उन्हें हर डर से बाहर निकाल लेंगे।

ऐसे में माता-पिता की जिम्मेदारी कहीं ज्यादा बढ़ जाती है और आप इसे बखूबी निभा पाएं। इसके लिए क्यों ना आज, इसी बारे में बात की जाये।

बच्चों के मन से डर कैसे दूर करें?

बच्चे के मन की बात सुनिए – बच्चे अक्सर शुरुआत में अपने माता-पिता से अपने डर को शेयर करते हैं। लेकिन अगर उस समय आप उनकी बात को महत्त्व नहीं देंगे या मामूली समझेंगे तो बच्चे आपसे अपनी प्रॉब्लम्स शेयर करने से कतराने लगेंगे इसलिए उनके डर को पहचानिये और दूसरे बच्चों से तुलना करने की बजाये उन्हें बताइये कि डरना बुरा नहीं होता है। बस अगली बार जब उन्हें डर लगे तो वो आपको आ कर बताएं और आपसे हेल्प लेने में झिझके नहीं।

बच्चे को सहज महसूस करवाएं – बच्चे जब आपसे अपने डर के बारे में बात करें तो उन्हें ध्यान से सुनें। उन्हें प्यार से समझाये कि उन्हें डरने की जरुरत नहीं है, आप उनके साथ हैं। वो जब डर महसूस करें तब तुरंत आपके पास आ सकते हैं। अगर अपने बचपन के डर बच्चों को बताये जाए तो बच्चे सहज महसूस करने लगते हैं। उन्हें लगता है कि सिर्फ वो अकेले नहीं हैं जिन्हें डर लगता है बल्कि उनके पैरेंट्स भी अपने बचपन में डरा करते थे। ऐसी बातें जानकर बच्चों के मन से डर कम होना शुरू हो जाएगा।

बच्चे के डर का मजाक ना बनाएं – अक्सर माता-पिता बच्चे के छोटे-छोटे डरों के बारे में जानकर उसका मजाक उड़ाने लगते हैं। ऐसा करने से बच्चे के मन में हीनभावना आ सकती है इसलिए ऐसा बिलकुल ना करें। ना ही बच्चों पर ऐसी चीजें करने का दबाव डालें जिनसे उन्हें डर लगता हो। चाहे वो पानी के पास जाना हो या कीड़े को पकड़ना हो। दबाव डालने पर बच्चा आपसे दूरी बना लेगा और उसका डर पहले से कहीं ज्यादा बढ़ जाएगा।

बच्चे को डर दूर करने की स्ट्रैटेजी सिखाएं – बच्चों को अगर ऐसी कुछ ट्रिक्स बताई जाएँ जिनसे उनका ध्यान डर से हट जाये तो धीरे-धीरे डर पर काबू पाना उनके लिए आसान होता जाता है। इसलिए उन्हें कुछ ऐसी ट्रिक्स सिखाएं- अपने डर को कागज़ पर ड्रॉ करना और उसे छूना, 1 से 10 तक की गिनती बोलना, पानी पीना, प्रेयर बोलना, गाने गाना। आप अपने बच्चे के साथ आसान मेडिटेशन करके भी उसके मन को शांत कर सकते हैं।

बच्चे को धीरे-धीरे डर से सहज बनायें – बच्चे को उसके डरों से सहजता से मिलाना शुरू करें। इसमें बहुत धैर्य की जरूरत होगी। बच्चे को अगर पानी, ऊंचाई या अँधेरे से डर लगता है तो उसे अपने साथ उस स्थिति में ले जाएँ। उसके साथ बने रहें और धीरे-धीरे उस माहौल से फ्रेंडली बनाने में मदद करें। इसमें किसी भी तरह की जल्दबाजी ना करें।

आपको ऐसे माहौल से सहज देखकर आपका बच्चा भी धीरे-धीरे सहज होने लगेगा और उसका डर कम होते-होते खत्म हो जाएगा। फिर चाहे वो अंधरे का डर हो, मकड़ी और कुत्ते जैसे जानवरों का डर हो या फिर किसी नए व्यक्ति से मिलने का डर ही क्यों ना हो।

अगर इन सभी प्रयासों के बाद भी बच्चे के मन का डर निकल नहीं रहा हो तो आप एक्सपर्ट से राय लेने में झिझकें नहीं।

दोस्तों, उम्मीद है बच्चों के मन से डर कैसे दूर करें कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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