बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के कुछ असरदार उपाय

उम्र भले ही कितनी भी क्यों ना हो लेकिन आत्मविश्वास हर उम्र में बेहतर जीवन जीने के लिए जरुरी होता है और अगर उम्र बचपन की हो तो इस सेल्फ कॉन्फिडेंस को बढ़ाना और भी जरुरी हो जाता है ताकि नन्हे-मुन्ने बच्चे जब भी किसी मुश्किल से सामना करे तो जीत उन्हीं की हो और खुद पर उनका यकीन बढ़ता रहे। आत्मविश्वास जीवन की बुनियादी जरूरतों में से एक है और बचपन की उम्र में अगर सही तरीके से बच्चों के आत्मविश्वास को विकसित कर दिया जाए तो आगे चलकर मुश्किलों का सामना करना और अपने व्यक्तित्व को प्रभावशाली तरीके से उजागर करना उनके लिए बहुत आसान हो जाता है।

ऐसे में आपको भी अपने बच्चों में इस जादुई गुण को विकसित करने में मदद करनी चाहिए। तो चलिए, आज आपको बताते हैं कुछ ऐसे असरदार उपाय जो आपके बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ा सकते हैं –

उन्हें सराहिये – किसी भी काम को करने के दौरान बच्चों की सराहना करिये, उनकी प्रशंसा में बोले गए कुछ शब्द उन्हें और बेहतर तरीके से काम करने के लिए प्रेरित करेंगे और उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाएगा।

अपना काम खुद करने के लिए प्रेरित करिये – बच्चों को बच्चा समझकर कुछ भी काम ना करने देना उनमें कॉन्फिडेंस की कमी ला सकता है जबकि उन्हें अपने छोटे-छोटे काम खुद करने के लिए प्रेरित करने से उनका खुद पर भरोसा बढ़ता है और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है इसलिए बच्चों को अपना स्कूल बैग जमाने दीजिये, बाल बनाने दीजिये और अपने कपड़े खुद पहनने का प्रयास करने दीजिये।

बच्चों को ऑप्शन दीजिए – सिर्फ पढ़ाई करने से ही बच्चों का विकास और आत्मबल मजबूत नहीं बन सकता इसलिए उन्हें पढ़ाई के अलावा खेलकूद से जुड़ी एक्टिविटीज में हिस्सा लेने का विकल्प दीजिये और उनके अनुसार सही विकल्प चुनने में उनकी मदद भी करिये। ऐसा करने से आपके साथ उनके रिश्ते में हल्कापन भी आएगा और सही ऑप्शन चुनने से उनका कॉन्फिडेंस काफी बढ़ भी जाएगा।

तुलना करने की भूल ना करें – अगर आप बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाना चाहते हैं तो उनकी तुलना दूसरे बच्चों से करना बंद कर दीजिये। तुलना होने पर बच्चों में हीन भावना आने लगती है और उनका मनोबल कमजोर होने लगता है इसलिए तुलना करने से बचिए।

बच्चों का मजाक ना उड़ाये – कई बार हम बिना सोचे-समझे बच्चों का मजाक उड़ाने लगते हैं और ऐसा करने के बाद इसके साइड इफेक्ट्स के बारे में सोच भी नहीं पाते। असल में बच्चे वही करते हैं जो वो देखते हैं और जब हम उनका मजाक उड़ाते हैं तो वो भी ऐसा करने के लिए प्रेरित होते हैं जिसकी वजह से उनमें एक बुरी आदत विकसित हो जाती है। इतना ही नहीं, मजाक उड़ने की स्थिति में बच्चे हताश भी हो सकते हैं इसलिए ऐसी भूल ना करें।

अपना कीमती समय उन्हें दीजिये – बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने का सबसे आसान और बेहतरीन तरीका है उन्हें समय देना क्योंकि ऐसा करने पर बच्चे खुश रहते हैं और अपने पेरेंट्स के साथ पूरे दिनभर की बातें शेयर कर पाते हैं, कुछ चीज़ों में सलाह ले पाते हैं और खुलकर हंस-खेल पाते हैं। ऐसा होने से उन्हें ख़ुशी मिलती है, आपसे उनके सम्बन्ध दोस्ताना होने लगते हैं और बच्चों का आत्मविश्वास बहुत बढ़ने लगता है।

उनकी भावनाओं का सम्मान करिये – बच्चे भले ही छोटे और नासमझ हों लेकिन उन  पर अपने निर्णय थोपना सही नहीं है। ऐसा करने पर बच्चों का मानसिक विकास भी सही से नहीं हो पाता है और उनका मनोबल भी कमजोर होता चला जाता है इसलिए जरुरी है कि उनके सम्बन्ध में कोई भी निर्णय लेने से पहले उनकी राय ली जाए, उनकी भावनाओं को महत्त्व दिया जाए और उनके अनुसार ही निर्णय लेने का प्रयास किया जाए।

खुद का सम्मान करना सिखाएं – दूसरों का सम्मान करना तो हम बच्चों को सिखाते ही हैं लेकिन क्या खुद का सम्मान करना सिखाना जरुरी नहीं है? बच्चों को खुद की इज्जत करना सिखाइये ताकि हर परिस्थिति में वो अपने आप को संभाले रख सके और जब उन्हें खुद का सम्मान करना आ जाएगा तो दूसरों का सम्मान करना सिखाने की जरुरत ही नहीं पड़ेगी।

अपने निर्णय खुद लेने दीजिये – ये सच है कि बच्चे अपने निर्णय खुद ले पाने में समर्थ नहीं होते लेकिन अगर बचपन से ही उन्हें इसी साँचे में ढाला जाए तो उनमें निर्णय लेने की क्षमता बहुत जल्दी विकसित हो जाती है इसलिए उनसे जुड़े हर छोटे-बड़े मसले का निर्णय उन्हें लेने दीजिये और सही गलत की समझ विकसित करने के लिए अपनी राय उन्हें जरूर बताइये। ऐसा करने पर बच्चे हर बार सही निर्णय ही लेंगे क्योंकि उनका आत्मविश्वास बहुत बढ़ चुका होगा और अपनी लाइफ के डिसीजन खुद लेने का अधिकार भी उन्हें उत्साह से भर देगा।

दोस्तों, बच्चों के भोले मन को समझना बहुत आसान होता है लेकिन उसकी देखभाल करना उतना ही मुश्किल। अगर आप अपने बच्चों के साथ उनके हमउम्र बनकर रहेंगे तो अपने बच्चों में सारे अच्छे गुण विकसित करना आपके लिए बहुत आसान हो जाएगा लेकिन अगर आप अपने निर्णय उन पर थोपते जाएंगे तो उनका व्यक्तित्व ही असंतुलित हो जाएगा जिसमें आत्मविश्वास की भारी कमी होगी इसलिए अभी से अपने बच्चों के दोस्त बनिए और उनका हाथ पकड़कर उन्हें लाइफ के इन ऊँचे-नीचे रास्तों पर पूरे आत्मविश्वास के साथ चलने का हुनर सिखाइए।

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