बच्चों की शादी की प्लानिंग कैसे करें?

आज हम बात करेंगें बच्चों की शादी की प्लानिंग की, जिसके लिये मध्यमवर्गीय परिवार घर में कन्या का जन्म होते ही चिन्तित होने लगता है। अपने देश में शादी-ब्याह में दिखावे के लिये बहुत पैसा खर्चा किया जाता है। पेरेंट्स अगर प्लानिंग नहीं करते हैं तो लोन लेकर खर्चा करते हैं लेकिन दिखावे को नहीं छोड़ते। कारण आज भी जाने-अनजाने सामाजिक मान्यताओं के अनुसार दहेज का प्रचलन बहुत ज़ोरों से है। आम आदमी सोने में निवेश करके या एलआईसी की ट्रेडिशनल पॉलिसी लेकर या कोई प्रॉपर्टी खरीदकर बच्चों की शादी की प्लानिंग करता है। कई बार देखा गया है कि प्लानिंग नहीं होने पर बहुत ज्यादा लोन लेकर भी खर्चा करता है और अपना आगे का भविष्य खराब कर देता है। लेखक का मानना है कि यह सब गलत है। मेरा स्पष्ट मानना है कि दिखावे के लिये, फालतू में खर्चा करना और वो भी लोन तो लेकर बिल्कुल गलत है। पेरेंट्स अपनी बच्ची की शादी में सिर्फ दिखावे के लिये ज्यादा खर्चा करते हैं न कि उसकी फ्यूचर फाइनेंशियल सिक्योरिटी के लिये।

मेरी राय में पेरेंट्स को अपने बच्चों (विशेषकर लड़की) की शादी के लिये प्लानिंग दिखावे के खर्चे के लिये नहीं करके बल्कि फाइनेंशियल सिक्योरिटी के लिये करनी चाहिये। जी हाँ आप ठीक समझ रहे हैं केवल फाइनेंशियल सिक्योरिटी। इसके लिये बच्चे (विशेषकर बच्ची) की 18 वर्ष की उम्र होते ही 5000-10000 न्यूनतम प्रतिमाह रिटायरमेंट प्लानिंग में एसआईपी करनी चाहिये। आजकल पढ़ी-लिखी लडकियाँ सामान्यतः 22-24 वर्ष की उम्र में ही शादी करना पसंद करती हैं। पेरेंट्स को चाहिये कि बिटिया रानी के 18 वर्ष की आयू होते ही रिटायरमेंट में एसआईपी कर दें और शादी में उसको गिफ्ट कर दें। बिटिया को समझायें कि यह रिटायरमेंट प्लान में जमा रकम उसकी जीवन भर की फाइनेंशियल सिक्योरिटी है। अगर बिटिया उसमें शादी के बाद कुछ भी जमा नहीं करती हैं और विथड्रावल भी नहीं करती है तो 60 वर्ष की आयू में रकम बहुत बडी राशि बन जाती है।

उदाहरण के तौर पर 5000/- प्रतिमाह की राशि 18 से 23 वर्ष तक यानि कुल केवल 5 वर्ष पीरियड में अपनी बिटिया के लिये आपने जमा करी, बिटिया ने 60 वर्ष की आयू तक रकम नहीं निकाली तो 12% रिटर्न से ही यह राशि 2.70 करोड बन जायेगी, जबकि जमा रकम 5000 x 12 x 5 = केवल 3,00,000 (3 लाख) ही है। हमने रिटर्न 12% प्रति वर्ष ही काउंट किया है जबकि मेरा मानना है कि अगले 20 वर्षों तक रिटर्न 13-14% प्रति वर्ष आयेगा। इस तरीके से बिटिया के लिये जीवन भर की फाइनेंशियल सेफ्टी हो जाती है। यह बिटिया के लिये सबसे बडा गिफ्ट है। बिटिया जब चाहे तब यह पैसा निकाल सकती है। पेरेंट्स को चाहिये कि बिटिया को समझाये कि यह रिटायरमेंट की राशि विशेष परिस्थिति होने पर ही निकाले वरना इसे भूल जाये। संभव हो तो इसमें कुछ भी रकम लम्प-सम या एसआईपी के माध्यम से टॉप-अप करते रहेे। यह प्लानिंग हर पैरेंट को करनी चाहिये।

हमारे यहाँ शादी के बाद भी पेरेंट्स अपनी सामर्थ्य अनुसार 25-50 हजार रूपये प्रतिवर्ष लड़की पर त्यौहार आदि के मौकों पर खर्च करते रहते हैं। पेरेंट्स को चाहिये कि इस अपव्यय को रोककर जितना संभव हो उतना लम्प-सम या एसआईपी के माध्यम से शादी के बाद भी कुछ जमा करा दें।

इसके अलावा शादी में फालतू खर्चा नहीं करना चाहिये। नॉर्मल खर्चे के लिये बच्चों की शुरू से ही एक छोटी राशि की बैलेंस्ड फण्ड में एसआईपी कर देनी चाहिये जो शादी के समय पर अच्छी रकम हो जायेगी। बैलेंस्ड फण्ड के अलावा और कहीं भी इन्वेस्टमेंट नहीं करना चाहिये। केवल बैलेंस्ड फण्ड में ही 10-14% सालाना रिटर्न आने की संभावना है।

मेरी समस्त पेरेंट्स को राय है कि शादी की प्लानिंग की जगह बेटी की फाइनेंशियल सिक्योरिटी की प्लानिंग करें व दिखावे के खर्चों पर कण्ट्रोल करें। दिखावे के खर्चों की जगह बच्चों के एजुकेशन पर खर्चा करें। आने वाले समय में यह बदलाव अवश्य आयेगा। नई जनरेशन भी कम खर्चों को ज्यादा महत्व देगी और अपने पेरेंट्स के मुकाबले अपने पसन्द का जीवनसाथी पसन्द करेगें जिससे फालतू खर्चें अपने आप कम हो जायेंगें।

अभी मेरे एक क्लाइंट ने अपने पसंद के जीवनसाथी से विवाह किया और नवविवाहित जोड़े ने अपने पेरेंट्स को इस शादी में व्यय किये जाने वाले फालतू खर्चे को रोककर उस राशि से फ्लैट खरीद लिया। सो नई जनरेशन स्मार्ट एवं समझदार है। अतः लेखक का मानना है कि शादी की प्लानिंग की जगह लडकी की फाइनेंशियल सिक्योरिटी के लिये रिटायरमेंट प्लानिंग करें।

ये लेख फाइनेंशियल एडवाइजर श्री राजेश कुमार सोढानी, सोढानी इंवेस्टमेंट्स, जयपुर द्वारा प्रस्तुत है। फाइनेंशियल प्लानिंग पर आधारित ये लेख आपको कैसा लगा? अगर इस लेख से आपको कोई भी मदद मिलती है तो हमें बहुत खुशी होगी। अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है, हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे।

“हायर एजुकेशन प्लानिंग कैसे करें?”

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