झूठ बोलने की आदत से बच्चों को कैसे बचाए?

जून 29, 2017

आज हमने बहुत ही नाजुक टॉपिक लिया है जिसमे बच्चों की सबसे बड़ी समस्या का जिक्र होगा। वो है बच्चों को झूठ बोलने की आदत। जाने अनजाने तो कभी जानबूझकर नादानी में बच्चे कई बार झूठ का सहारा लेते है। क्या आपने कभी सोचा है बच्चे ऐसा क्यों करते है। बच्चों पर ऐसा क्या दबाव है की वे झूठ बोलना जरूरी समझते है। जबकि बच्चे तो कच्ची मिट्टी के समान नाजुक होते है उन्हें जिस सांचे में ढाला जाए ढल जाते है। बच्चों के व्यक्तित्व को सही आकार देने में अभिभावक अपना सब कुछ दाव पर रख देते है। अधिकांश बच्चे छोटी उम्र से ही झूठ बोलने लग जाते है। रिसर्च के अनुसार चार साल का बच्चा दो घंटे में एक बार और छः साल का बच्चा एक घंटे में एक बार झूठ बोलता है। रिसर्च से यह भी सामने आया की झूठ बोलना बच्चों के मानसिक विकास में शामिल है।

सदियों पहले संत कबीर दास जी ने क्या खूब कहा था -”सांच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप” इसलिए बच्चों के छोटे से छोटे झूठ को भी अनदेखा ना कीजिए। आपको अंदाजा भी नहीं होगा आगे जाकर आपकी यह लापरवाही कितने बड़े सबक का कारण बनेगी। बड़े होते-होते बच्चों में यह आदत कब लत का रूप ले लेती है पता भी नहीं चलता। बच्चों के पास आपसे या औरों से झूठ बोलने के कई कारण होते है। जैसे-जैसे वे बड़े होने लगते है उनके कारण भी बड़े होते जाते है। इसलिए यह पता लगाना अभिभावक के लिए बहुत ही मुश्किल हो जाता है की बच्चा कब झूठ बोल रहा है और कब सच।

आपने भी कई बार अपने बड़ों से सुना होगा ”बच्चे मन के सच्चे” अगर यह कहावत सच है तो जरूर बच्चे के आस-पास का माहौल या परवरिश में जरूर कोई कमी या अनदेखी हो रही है। अभिभावक स्वयं को दोष ना दे। बल्कि यह जानने की कोशिश करे की क्या आपका बच्चा भी झूठ बोलना सीख गया है। अगर जवाब हाँ है तो यह सोचे की अब इसका समाधान कैसे हो। बच्चे और समाज के प्रति यह आपकी नैतिक जिम्मेदारी भी है। क्योंकि एक कुशल समाज तभी संभव है जब हमारे बच्चे सच्चे और जिम्मेदार होंगे। आइये जाने बच्चे झूठ किन कारणों से बोलते है और इनका समाधान क्या हैं।

क्यों बोलते है बच्चे झूठ-

ऐसे करे बच्चों में सच बोलने का विकास –

बच्चा चाहे प्री स्कूल की उम्र का हो या टीनएजर, दोनों को आपका समय चाहिए। आज का जीवन बहुत व्यस्त है लेकिन बच्चे आपकी पहली प्राथमिकता है यह माहौल घर पर बनाए। सख्ती और डर आपसे आपके बच्चो को दूर कर देगी। अपने पैरेंटिंग के तरीकों को समयनुसार बदले। यह कोई पुराना समय नहीं है जहा बच्चे आँख दिखाते ही समझ जाए. आज के आधुनिक बच्चों को गुमराह करने के बहुत से साधन है। डाँट और पिटाई से बच्चे का ना सिर्फ आत्मसम्मान कमज़ोर होगा, बल्कि वो और झूठ बोलने लगेगा। प्यार से उन्हें सब सिखाया जा सकता है बस आपके पास उनके लिए पर्याप्त समय होना चाहिए।

एक्सपर्ट्स के अनुसार कई पैरेंट्स दबाव के साथ अपने बच्चे को बहुत बड़ा या मुश्किल लक्ष्य दे देते हैं। ऐसी स्थिति में जब बच्चा अपने पेरेंट्स की उम्मीद पर खरा नहीं उतरता, तो वो झूठ बोलने लगता है या चुप रहने लगता है या अकेला रहना पसंद करता है या गलत संग में रंग जाता है। बच्चे की ऐसी स्थिति ना आपके लिए अच्छी है ना आपके बच्चे के लिए। विशेषज्ञों की माने तो बच्चे जब नाजुक उम्र के दौर से गुजर रहे है तो माँ-बाप उनका हर कदम पर साथ दे, उनका विश्वास जीतकर एक मजबूत रिश्ता कायम करे, उन्हें यकीन दिलाए की आप उनके दोस्त पहले हो पेरेंट्स बाद में, तभी बच्चे आपसे सबकुछ शेयर करेंगे। उन्हें हर चीज को आजमाने का मौका दे, मना ना करे। लेकिन उस काम के फायदे-नुकसान से उन्हें आगाह कर दे। आपके रहते अगर वे अपने काम में फैल हो भी जाए तो कोई बात नहीं, आपकी यह नसीहत भविष्य में आपके बच्चे के जरूर काम आएगी की कोई भी काम करने से पहले विवेक का इस्तेमाल जरूरी है।

बच्चे को समझाए सच खुद अपना वकील होता है और झूठ बेवजह दलील देता है यानी सच बोलने के बाद आपको भविष्य में कुछ भी याद रखने की आवश्यकता नहीं है लेकिन झूठ बोलने पर आपको हर बार यह याद रखना पड़ेगा की कब कौन सा झूठ बोला था। इतना ही नहीं एक झूठ को छुपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ेंगे। जो अनुचित ही नहीं बल्कि महापाप है। झूठ समस्या का समाधान नहीं करता बल्कि जटिलता पैदा करता है। बच्चे को यकीन दिलाए सच आज नहीं तो कल उजागर तो होगा ही, उस स्थिति में आप सब की नजरों में बुरे बन जाओगे। सच चाहे कितना भी मुश्किल हो कहने से शरमाओ मत बल्कि झूठ बोलने से शरमाओ। बच्चों को अपने कठिन जीवन की व्यथा बताओं और कहो की हमने कभी किसी गलत कारण से झूठ का सहारा नहीं लिया। फिर भी हम आज खुश है। क्योंकि सच पर विश्वास करने का मतलब है ईश्वर पर विश्वास करना। सच की राह कठिन जरूर है लेकिन नामुमकिन नहीं। सच की आदत तुम्हें बहुत सारी विपत्ति से बचा के रखेगी।

ऐसा नहीं है की सभी बच्चे झूठ बोलते है जो बच्चे सच बोलना चाहते हैं वे सच बोलेंगे। अगर वे किसी कारण से सच नहीं बोल पा रहे तो ये आपकी पहली जिम्मेदारी है कि आप उन्हें सच बोलने के लिए प्रोत्साहित करें। बच्चों पर दबाव का सहारा ना ले नहीं तो बच्चे जल्दी झूठ बोलने लगते हैं। सभी पेरेंट्स अपने बच्चे की बेहतर परवरिश करते है की उनका बच्चा उनसे भी बेहतर करे। इसलिए समय-समय पर बच्चों की रियलिटी चैक करते रहे।

इस लेख के माध्यम से हमने आपकी मदद करने की एक छोटी सी कोशिश की है। अगर इस लेख से आपको किसी भी तरह का मार्गदर्शन मिलता है तो इस लेख का लिखना हमारे लिए सार्थक हो गया। आपको हमारा लेख कैसा लगा? हमने सत्य और सदाचार व्यक्तियों के जीवन और अपने अनुभव के आधार पर आपसे ज्ञानवर्धक जानकारी साझा की है। किसी भी निष्कर्ष या अपने बच्चों के प्रति कोई धारणा बनाने से पहले अपनी सूझ-बुझ का इस्तेमाल हमेशा करे। सदैव खुश रहे और स्वस्थ रहे।

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