टीवी के शुरुआती दौर में रामायण, महाभारत और बच्चों के मनोरंजन के कुछ शालीन और ज्ञानवर्धक धारावाहिक आते थे लेकिन आज के दौर में इन धारावाहिकों की जगह रियलिटी शोज ने ले ली है। लेकिन आजकल बच्चों के रियलिटी शोज भी काफी पॉपुलर हो रहे हैं जिनमे बच्चों के टैलेंट को आगे बढ़ाने का दावा किया जाता है। लेकिन सवाल ये उठता है की क्या बच्चों से जुड़े टीवी के रियलिटी शो जायज है? बच्चों की पढाई और मौज मस्ती के दिनों में उन्हें ऐसे शो में व्यस्त रखना कहीं उनसे उनका बचपन तो नहीं छीन रहा है?

हाल ही में मशहूर फिल्मकार शुजीत सरकार ने भी टीवी पर आने वाली इन बच्चों के रियलिटी शो को बंद कर देने की गुहार लगाई थी। शुजीत का भी ये मानना है की इन रियलिटी शो से बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है और उनका बचपन उनसे छीना जा रहा है और ऐसे में सुजीत ने बच्चों के इन रियलिटी शो पर प्रतिबन्ध लगाने की बात कही थी। वैसे एक तरीके से देखा जाये तो ये सही भी है क्योंकि ऐसे रियलिटी शो से चैनल वाले बच्चों का सहारा लेकर अपनी टीआरपी बढ़ाने में लगे हैं लेकिन इसके विपरीत बच्चों पर इसका बुरा असर होता है और बच्चों से उनकी मासूमियत छिन रही है।

अगर इसके दूसरे पहलु को देखा जाये तो इस तरह के शोज से बच्चे कम उम्र में ही प्रतिस्पर्धा की दौड़ में भागने लगे हैं साथ ही उनके दिमाग में नाम और शोहरत कमाने का जूनून आ जाता है। ऐसे शो में बच्चों के हिस्सा लेने से कहीं ना कहीं पेरेंट्स के भी मन में अपने बच्चे को सर्वश्रेष्ठ और अव्वल आने की लालसा जागने लगती है। और अगर बच्चा दूसरे बच्चों से पिछड़ जाता है और उस शो से होना पड़ता है तो ना सिर्फ बच्चा बल्कि पेरेंट्स भी काफी दुखी होते हैं कई बार तो बच्चों के बाहर किये जाने पर वाद विवाद भी खड़ा हो जाता है और ऐसे में बच्चे खुद को कमजोर समझने लगते है और खुद को असहाय महसूस करते हैं।

शो की टीआरपी बढ़ाने के लिए चैनल वाले हर तरह के हथकंडे अपनाते हैं और बच्चों को घंटों घंटों तक व्यस्त रखते हैं। इसके अलावा बच्चे के बेहतर प्रदर्शन ना करने पर उस शो के जज बच्चों को काफी कटु शब्द कहकर और डांटकर बच्चों के मन को काफी आहात करते हैं। ऐसे में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से बच्चों पर मानसिक दबाव बन जाता है ! एक तरीके से कहा जाये तो ये बालश्रम से कम नहीं है जो टैलेंट के नाम पर बच्चों का बचपन छीन रहे हैं। इन शोज से बच्चों को कुछ हासिल हो ना हो लेकिन चैनल और शो वाले मोटी कमाई कर लेते हैं।

चैनल वाले सिर्फ कमाई और दर्शकों की वाहवाही लूटने के लिए बच्चों की मासूमियत को भुनाने में कोई कसार नहीं छोड़ते। शो में विजेता कोई एक ही बनता है लेकिन बाकी बच्चों पर हार का मानसिक दबाव उन्हें छोटी सी उम्र में डिप्रेशन की तरफ ले जाता है। जो उम्र बच्चों की पढाई लिखाई और बचपना करने की होती है उस उम्र में ऐसे रियलिटी शो का हिस्सा बनकर बच्चे पैसे और फेमस होने की दौड़ में भाग रहे हैं लेकिन अंततः इसका उनपर नकारात्मक असर होता है।

इस तरह के रियलिटी शो आजकल काफी पॉपुलर हो रहे हैं और ऐसे में हर पेरेंट्स के मन में ये इच्छा जागने लगी है की हमारा बच्चा भी टीवी पर आये और नाम कमाए। इसका असर ऐसा हो रहा है की पेरेंट्स का रुझान बच्चों की पढाई में कम और ऐसे रियलिटी शो में बच्चों की भागीदारी की तरफ ज्यादा बढ़ रहा है। ऐसे में छोटी उम्र में ही इन रियलिटी शो का हिस्सा बनने के लिए दूर दूर से बच्चे आते हैं। जिन बच्चों का शो में सिलेक्शन नहीं होता वो हताश हो जाते हैं और जिनका हो जाता है वो सिर्फ शो में उलझ कर रह जाते हैं।

बच्चों के इस तरह के रियलिटी शो अगर चलते भी हैं तो इनमे शायद थोड़े बदलाव की जरूर आवश्यकता है। मसलन ऐसे रियलिटी शो में बच्चों की आयु सीमा तय होनी चाहिए। कम से कम 9-10 से कम उम्र के बच्चों को ऐसे शो का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए। साथ ही शो के जजों को अपनी वाणी पर काबू रखना चाहिए और व्यवहार में शालीनता रखनी चाहिए ताकि बच्चों को आघात ना पहुंचे और बच्चे प्रोत्साहित हों। इसके अलावा शो की टीआरपी बढ़ाने के लिए चैनल वाले बच्चों के एलीमिनेशन को काफी बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं लेकिन इसका बुरा असर बच्चों के दिमाग पर पड़ता है और वो अपने आप को पिछड़ा हुआ समझते हैं और आखिरकार डिप्रेशन का शिकार होते हैं।

ये बात सही है की बच्चों के टैलेंट को दबाना नहीं चाहिए लेकिन दूसरा पहलु ये भी है की क्या अपनी टीआरपी और कमाई के लिए बच्चों को भुनाने वाले ऐसे रियलिटी शो में बच्चों की भागीदारी कहीं छोटी सी उम्र में उनसे उनका बचपन तो नहीं छीन रही? क्या ऐसे शो पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए? इस बारे में आपका क्या विचार है हमसे जरूर शेयर करें।

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