कहीं टीवी पर दिखाये जा रहे क्राइम शो तो नहीं बढ़ते अपराध की वजह?

आज कल टीवी पर क्राइम पर आधारित कई शो दिखाए जाते हैं ताकि आम जनता को जागरूक और सतर्क बनाया जा सके ताकि उनके साथ कभी कोई आपराधिक घटना ना हो। ऐसे शो टीवी पर हर समय चलते ही रहते हैं। लेकिन एक मुद्दा ये भी है की कहीं ये क्राइम शो आपराधिक मानसिकता रखने वाले लोगों के लिए अपराध के नए नए तरीके सीखने का जरिया तो नहीं बन रहे?

हालाँकि इन शो में दिखाई जाने वाली घटनाएं आम जनता को सीख देने के लिए होती है। खास तौर पर बच्चों के लिए जहाँ उन्हें सीख मिलती है की उन्हें किसी अनजान व्यक्ति के साथ नहीं जाना चाहिए ना ही उससे कोई खाने की चीज़ लेनी चाहिए इत्यादि। लेकिन इसका दूसरा पहलु देखा जाये तो आपराधिक मानसिकता रखने वाले व्यक्ति इनसे काफी कुछ सीखते हैं। उदाहरण के तौर पर इन शो में दिखाया जाता है की कैसे एक फ़ोन या सिम के जरिये पुलिस ने अपराधी को धर दबोचा और इसी को देखकर आपराधिक मानसिकता वाले लोग सतर्क हो जाते हैं और अपराध करते समय फ़ोन आदि का इस्तेमाल नहीं करते।

इसके अलावा ऐसे क्राइम शो में बताते हैं की कैसे एक अपराधी ने शातिर तरीके से ब्लैकमेलिंग, एसिड अटैक, स्नूपिंग, छेड़खानी, साइबर क्राइम, बलात्कार और अपहरण जैसे अपराध को अंजाम दिया। हालाँकि ये तरीके आम जनता को सावधान करने के लिए दिखाए जाते हैं लेकिन इससे नौसिखिये अपराधियों को अपराध के नए नए तरीके सीखने को भी मिलते हैं।

इन सब बातों पर गौर करें तो ये सवाल भी खड़ा होता है की क्या ऐसे शो दिखाए जाने की वजह से बच्चों के खिलाफ आपराधिक मामले बढ़ रहे हैं? छोटे बच्चों को कैसे फंसाया जाता है, कहीं ये शो ऐसे तरीकों को दिखाकर अपराधियों की अप्रत्यक्ष रूप से मदद तो नहीं कर रहे? कई बार इन शो में दिखाया जाता है की बच्चों के साथ योन शोषण होता है लेकिन बच्चों को डरा धमका कर किसी को ना बताने के लिए दबाव दिया जाता है और बच्चे डर के कारण अपने माता पिता को नहीं बताते।

हालाँकि इसके पीछे शो में सीख ये दी जाती है की बच्चों को सिखाना चाहिए की वो माता पिता के अलावा किसी अनजान के साथ ना जाये और अगर उसके साथ कुछ गलत होता है तो वो अपने माता पिता को बताये। लेकिन इसके साथ ही ऐसे अपराध करने वाले अपराधी कई तरीके भी सीखते हैं की कैसे अपने काम को सही तरीके से अंजाम दिया जाए और जो गलतियां शो में दिखाए गए अपराधी ने की है वो गलतियां ना करें जिससे अपराधी बच कर निकल सके।

कई बार ऐसे शो में दिखाया गया है कि सड़क पर रोते हुए एक बच्चे को उसकी माँ तक पहुंचाने के लिए एक महिला उसकी मदद करती है लेकिन ये सब एक चाल होती है और बदले में वो औरत ही मदद करने के चक्कर में खुद फंस जाती है और बलात्कार और हत्या का शिकार हो जाती है। तो ऐसे में कई बार मन में शंका होती है की क्या ऐसी स्थिति में हमें मदद के लिए आगे आना चाहिए या खुद फंस जाने के डर से नजरअंदाज कर आगे बढ़ जाना चाहिए। जबकि ऐसी घटना देखकर आपराधिक मानसिकता रखने वाले लोगों का हौसला और बढ़ जाता है और वो भी अपराध के लिए ऐसी प्लानिंग करते हैं। सर्वे और कई अपराधों के नतीजों के आधार पर देश में हजारों ऐसे मामले सामने आये हैं जिसमे अपराधी ने माना है की उसने ये अपराध टीवी पर दिखाए जाने वाले क्राइम शो को देखकर किये हैं।

अब सवाल ये है की जहाँ ऐसे क्राइम शो आम जनता को सतर्क होने की सीख देते हैं वहीं कहीं ये शो अपराधियों को बढ़ावा तो नहीं दे रहे और क्या इनमे दिखाए जाने वाले अपराध के तरीकों को सीख कर आपराधिक मानसिकता वाले लोग और शातिर तो नहीं हो रहे ? ये एक गंभीर मुद्दा है जिस पर हमेशा बहस होती रही है और होनी भी चाहिए और विचार करना चाहिए की ऐसे क्राइम शो टीवी पर दिखाए जाने चाहिए या नहीं और अगर दिखाए जाते हैं तो इनमे किस तरह का बदलाव किया जाये ताकि इससे आम जनता, बच्चों और आपराधिक सोच रखने वाले लोगो पर नकारात्मक प्रभाव ना पड़े।

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