क्या बढ़ते प्रदूषण से हो सकता है महिलाओं में बांझपन का खतरा?

सितम्बर 17, 2018

वर्तमान में बढ़ते वायु प्रदूषण से कोई सुरक्षित नहीं है लेकिन महिलाओं को इसकी वजह से चिंताजनक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए कई स्वास्थ्य समस्या हो सकती है लेकिन इसकी वजह से लड़कियों में अनियमित माहवारी का खतरा आज बहुत बड़ी समस्या है क्योंकि इसकी वजह से आगे जाकर बांझपन की समस्या भी आ सकती है। कुछ दशकों में जीवनशैली में बहुत ही तेज़ी से बदलाव आया है। इस जीवनशैली में अगर कुछ अच्छा है तो बहुत सी समस्याओं ने अपनी पकड़ भी मजबूत की है। अनियमित माहावारी महिलाओं में बांझपन का मुख्य कारण है लेकिन इस समस्या का सिर्फ यही कारण है यह कहना पूर्णरूप से सही नहीं होगा। लेकिन शोधकर्ताओं के अनुसार प्रदूषण की वजह से मासिक धर्म को नियमित होने में बहुत लंबा समय लग जाता है। जिससे प्रजनन तंत्र में बाधा आती है। तेजी से बदलती जीवनशैली का स्तर और बढ़ते प्रदूषण ने 45 से 50 प्रतिशत तक महिलाओं में बांझपन के खतरे को बढ़ा दिया है।

तरक्की और सफलता पर समान रूप से लड़कियों का भी पूरा हक है। आत्मनिर्भरता लड़कियों को समान दर्जा देती है। इस चाह में लड़कियाँ कम उम्र में शादी नहीं करती और जब बढ़ती उम्र में माँ बनना चाहती है तो उनमें इन्फर्टिलिटी की संभावना बढ़ जाती है। बढ़ते प्रदूषण की वजह से तनाव भी अपना काम कर जाता है जो महिलाओं में बांझपन के रूप में सामने आता है। वायु प्रदूषण की वजह से श्वास क्रिया प्रभावित होती है जिसकी वजह से अस्थमा, दमा, टी। बी। निमोनिया, हृदय रोग, गुर्दे की बीमारी, मधुमेह, फेफड़ों का कैंसर जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे माहौल में प्रजनन में और गर्भवती महिलाओं के पेट में पल रहे शिशु दोनों को ही खतरा रहता है।

डॉक्टर का कहना है की उच्च स्तर के प्रदूषण में महिलाओं में अंडाणुओं और पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता कम हो जाती है। ऐसे में कई बार गर्भपात की समस्या भी पैदा हो जाती है। बार-बार इस दशा से गुजरने के बाद महिलाओं में बांझपन की समस्या आ सकती है। प्रदूषण भरे माहौल में बच्चे का सही विकास का ना होना, जन्म के समय कम वजन का होना, गर्भ में या जन्म के कुछ समय बाद बच्चे की मृत्यु का होना, बच्चे में मानसिक या शारीरिक दोष होना आदि कई जटिल समस्याओं का सामना दंपति को करना पड़ सकता है। प्रदूषण इतना खतरनाक हो सकता है की यह हार्मोन और जीनों के काम करने के तरीकों को पूरी तरह से गड़बड़ा देता है। हार्मोन के बिगड़ने से मासिक धर्म में अनियमितता की समस्या आती है।

डॉक्टर के अनुसार बांझपन रोग नहीं बल्कि एक समस्या है। इस समस्या को प्राकृतिक और वैज्ञानिक तरीकों से हल किया जा सकता है। आजकल युवा पीढ़ी अपने करियर को लेकर बहुत सजग है जिस कारण विवाह में समय लेते है। अगर युवा पीढ़ी अपने करियर और विवाह को आपसी तालमेल से साथ-साथ लेकर चले तो यह समस्या हल की जा सकती है। समय रहते विवाह करने के बाद भी कोई समस्या आती भी है तो उसका इलाज विज्ञान के द्वारा संभव है।

बढ़ते प्रदूषण के माहौल को देखते हुए पुरुषों और महिलाओं दोनों में बांझपन की समस्या दिनों दिन बढ़ रही है। उपर से शहरी जीवनशैली, देरी से विवाह, अधिक उम्र में गर्भधारण, तनाव, बढ़ता वजन, प्रदूषण जैसी कई वजह है जिस कारण बांझपन बढ़ता जा रहा है। एक रिसर्च के अनुसार मेन रोड से 200 मीटर के दायरे में जीवनयापन करने से बांझपन का खतरा 11% अधिक बढ़ जाता है। क्योंकि वायु प्रदूषण में उच्च स्तर के एसिड, कार्बनिक रसायन, धातुओं, गैस और मिट्टी या धूल कणों जैसे हानिकारक तत्व होते है।

कुछ उचित कदम उठाए-

महिलाओं में बांझपन कई कारणों से हो सकती हैं। लेकिन समय रहते अगर समस्या का समाधान निकाल लिया जाए तो आप मातृत्व और पैतृत्व का पूरा सुख उठा सकते हैं। बांझपन की समस्या से निजात पाने के लिए कुछ बातों का रखें ध्यान जैसे अधिक उम्र में विवाह करने पर डॉक्टर से सलाह ले। विवाह के तुरंत बाद अगर आप बच्चा नहीं चाहते तो भी डॉक्टर से परामर्श जरूर करे। अस्वस्थ सेक्सुअल आदतों से बचें, काम का तनाव घर तक ना लाए और ऑफीस से आने के बाद टहलने जाएं।

हमने यह लेख प्रैक्टिकल अनुभव व जानकारी के आधार पर आपसे साझा किया है। किसी भी परिस्थिति में डॉक्टर से अच्छा कोई मार्गदर्शक नहीं होता। हमेशा अपनी सूझ-बुझ का इस्तेमाल करे। हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे।

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