बैटरी का आविष्कार

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आइये जानते हैं बैटरी का आविष्कार कैसे हुआ। बैटरी का इस्तेमाल रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत अधिक होता है। बहुत से ऐसे जरुरी काम होते हैं जिन्हें बैटरी ने बहुत आसान बना दिया है। जैसे गाड़ी को स्टार्ट करना, लैपटॉप को चार्ज करना, फोन को चार्ज करना और इन्वर्टर का इस्तेमाल करने जैसी बहुत-सी चीज़ें।

बैटरी का आकार भले ही छोटा होता है लेकिन इसमें विद्युत संग्रह की क्षमता बहुत अधिक होती है। ऐसे में क्यों ना, आज बैटरी के आविष्कार के बारे में ही जाना जाये। तो चलिए जागरूक पर आज आपको बताते हैं कि बैटरी क्या होती है और इसका आविष्कार कैसे हुआ।

बैटरी एक DC पावर सप्लाई का सोर्स है जिसकी मदद से DC पावर सप्लाई से चलने वाले उपकरण चलाये जा सकते हैं। अगर बैटरी से AC सप्लाई से चलने वाले उपकरण चलाने हो तो इसके लिए इन्वर्टर का इस्तेमाल किया जाता है जो बैटरी से आने वाली DC सप्लाई को AC सप्लाई में बदल देता है।

बैटरी का आविष्कार

1749 में बेंजामिन फ्रैंकलिन ने सबसे पहले बैटरी शब्द का इस्तेमाल किया था। जबकि बैटरी के आविष्कार का श्रेय एलेजांद्रो वोल्टा को जाता है जिन्होंने सन 1800 में बैटरी का आविष्कार किया और उनके द्वारा बनायी गयी बैटरी को Voltaic pile कहा गया।

वोल्ट ने बहुत-सी धातुओं पर प्रयोग करने के बाद जाना कि जिंक और सिल्वर मेटल सबसे बेहतरीन परिणाम देती हैं। इसके बाद धीरे-धीरे बहुत से प्रयोग होते रहे और बैटरी के आकार और उसकी क्षमताओं में बदलाव होता रहा। उसी का नतीजा है कि आज छोटी-सी बैटरी में बहुत सारी पावर को सेव रखकर हम अपना हर मुश्किल काम आसानी से कर पा रहे हैं।

ऐसा भी माना जाता है कि बैटरी का आविष्कार इसके मान्य समय से बहुत पहले भारत में हो गया था। इसके आविष्कारक महर्षि अगस्त्य थे जिन्होंने बैटरी के निर्माण की पूरी प्रक्रिया अगस्त्य संहिता में बता रखी है।

उम्मीद है जागरूक पर बैटरी का आविष्कार कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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