बेचैनी दूर करने के आसान उपाय

तनाव, बेचैनी भय आदि आधुनिक जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। मनोवैज्ञानिक कारणों के अतिरिक्त प्रतिस्पर्धी माहौल, भागदौड़ भरा जीवन और सब कुछ जल्दी से जल्दी पा लेने की ख्वाहिश में कहीं भी पीछे रह जाने पर या ये सब न पाने का भय बेचैनी पैदा करते हैं। हम सभी जीवन के किसी न किसी मोड़ पर इन सब का शिकार होते हैं और कुछ लोग तो लम्बे समय के लिए अवसाद में भी चले जाते हैं। यहां हम विशेषज्ञों द्वारा प्रमाणित कुछ उपायों पर गौर करेंगे जो बेचैनी दूर करने के सहायक सिद्ध होते हैं –

वर्तमान में जियें – चिंताएं या बेचैनी अक्सर भविष्य के प्रति सशंकित होने से उठती हैं। भविष्य में क्या होगा ये कोई नहीं जानता इसलिए भविष्य के प्रति शंका को छोड़कर वर्तमान में ही जीना चाहिए क्योंकि अक्सर जिस अनचाहे भविष्य के प्रति हम सशंकित रहते है वैसा नहीं होता है। मिशेल डी मोंटेपेने ने पांच सौ साल पहले लिखा था “मेरा जीवन ऐसी भयावह दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटनाओं से भरा हुआ है जिनमें से अधिकांश कभी घटी ही नहीं”।

जो हो रहा है उस पर दुबारा विचार करें – घबराहट में अक्सर हम अपने आस-पास होने वाली घटनाओं का सबसे अवांछित निष्कर्ष निकलते हैं जो अक्सर नहीं होता इसलिए हमें शांत चित्त से पुनः जो हो रहा है, का अवलोकन करना चाहिए फिर किसी निष्कर्ष पर पहुचना चाहिए। जैसे अगर किसी प्रियजन का मोबाइल बहुत देर से रिसीव नहीं हो रहा है तो तुरन्त कोई अनहोनी होने के निष्कर्ष पर पहुचने से बेचैनी बढ़ना स्वाभाविक है जबकि जरूरी नहीं की जिस अनहोनी के प्रति आप आशंकित है वो हो ही।

अपने विचारों का तथ्यगत विश्लेषण करें – बेचैनी में अक्सर हम सर्वाधिक अवांछित परिणाम के बारे में सोचते हैं, ऐसे किसी परिणाम पर पहुचने से पहले हमें अपने विचारों का तार्किक और तथ्यगत विश्लेष्ण कर लेना चाहिए। उदाहरणस्वरूप पहली बार पहाड़ी रास्तों पर जाते समय अक्सर मन में बस के गहरी खाई में गिरने सम्बन्धी दुर्घटनाएं मन पर हावी होने लगती हैं पर ऐसा सोचने से पहले हमे ये भी सोचना चाहिए कि रोजाना कितने लोग इन पहाड़ी रास्तों से गुजरते हैं और दुर्घटनाएं उस अनुपात में कितनी हैं और साथ यह भी सोचना चाहिए दुर्घटनाएं तो मैदानी रास्तों पर भी होती ही हैं।

तेजी से सांस लेना और तेजी से सांस छोड़ना – जब बेचैनी बहुत हावी हो जाये तो सोचना छोड़कर सिर्फ सांसों पर ध्यान देना चाहिए और सांस तेजी से लेकर तेजी से निकालनी चाहिए इससे सामान्य अवस्था में लौटने में मदद मिलती है।

किसी काम में व्यस्त हो जायें – बेचैनी बढ़ने पर खुद को किसी काम में व्यस्त कर लेना चाहिए इससे राहत मिलती है।

शरीर को सीधा एवं चुस्त रखे – बेचैनी होने पर हमे अपने शरीर के उपरी हिस्से जिसमे ह्रदय छाती फेफड़े आदि स्थित हैं, की रक्षा करनी चाहिए इसके लिए पूरा ध्यान इन हिस्सों पर देते हुए या तो सीधे खड़े हो जायें या सीधे बैठ जायें स्नायुओं को पीछे खींचे तथा सीने को आगे की ओर ले जाएं।

अपनी समस्या दूसरों को बताएं और उनसे समाधान पूछे – ऐसी अवस्था में अपने किसी प्रियजन या मित्र से बात करें उसे अपनी समस्या बताएं तथा उसकी राय जाने, इससे भी बेचैनी दूर करने में मदद मिलती है।

कॉमेडी विडियो या फिल्म देखें – बेचैन होने पर कोई कॉमेडी विडियो या फिल्म देखने से आराम मिलता है तथा यह बेचैनी दूर करने और सामान्य अवस्था में वापसी में भी सहायक होता है।

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