सुधार की शुरुआत खुद से करें

हम सब हमेशा से इस बात को बोलते है की यह ठीक नहीं, वो ठीक नहीं है, ये ख़राब है, वो ख़राब है मगर क्या कभी खुद की कमियों को भी समझा, जाना या परखा है? शायद किसी ने भी नहीं, ऐसा इसलिए भी है क्योँकि हम सब बदलाव तो चाहते है मगर हम खुद बदलना नहीं चाहते है।

हम सब गंदगी से परेशान है मगर हम कभी भी खुद गंदगी फैलाने में पीछे नहीं रहते फिर हम किस हक़ से किसी को बोल सकते है। हम खुद भ्रष्टाचार फैलाते है, रिश्वत देते है ताकि जल्दी काम हो जाये पर उस मुद्दे पर जब सवाल पुछा जाता है तो सब विरोध करते है।

नियम सब चाहते है पर उन नियमों का पालन कोई नहीं करना चाहता है तो फिर कैसे बदलेगा ये देश। कैसे बदलेगा ये समाज। खुद में किया गया एक छोटा सा सुधर भी आपको दूसरों का आदर्श बना सकता है। मगर कमी रह जाती है तो दृढ़ इच्छा शक्ति की।

जो लोग बदलाव लाते है वो भी आम इंसान ही होते है बस फर्क नज़रिए का है। वो शायद वो सोच या देख लेते है जिसे हम देख के भी अनदेखा कर देते है। सोचिये अगर आज हम बदलाव नहीं ला पाए तो हमारी आने वाली नस्लों के दोषी हम ही होंगे।

“सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं , मेरा मकसद है ये तस्वीर बदलनी चाहिए “

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