आंवला है अमृत समान – आंवला के फायदे

आंवला का महत्व सिर्फ आयुर्वेद में ही नही बल्कि वास्तु, ज्योतिष और धार्मिक रूप से भी इसकी अनेक मान्यतायें है। आयुर्वेद में आँवले को रसायन माना गया है। आयुर्वेद और यूनानी पैथी की कई प्रसिद्ध दवाओं में आंवला का प्रयोग प्राचीनकाल से होता आ रहा है। सिर से लेकर पैर तक ऐसा कोई रोग नही जिसका निवारण आंवला से ना हो सके। सिर्फ श्वेत कुष्ठ रोग में आँवले का प्रयोग मानव शरीर में नही होता। आँवले का सेवन हर मौसम में लाभदायक है। विटामिन-सी आँवले में प्रचुर मात्रा में होता है, जिस कारण यह आँखों, बालों, त्वचा, कब्ज, मधुमेह आदि कई रोगों को नष्ट करने की चमत्कारी औषधीय शक्ति से भरपूर है। इसमे मौजूद विटामिन-सी को किसी भी मौसम में सुखाने या उबालने पर भी नष्ट नही होता है, इसलिए आयुर्वेद में आंवला सदाबहार फल व औषधि है।

यह एक ठंडी तासीर वाला फल है, इसलिए इसका सेवन किसी भी रूप में किया जाये, आपके स्वास्थ्य के लिए लाभकारी ही होगा। अपने इन्हीं गुणों के कारण आँवले को आयुर्वेद ने ‘अमृत फल’ कहा है। आँवले में मिनरल और प्रोटीन की उचित मात्रा होने के कारण यह वज़न घटाने में भी सहायक है। यह खून में वसा को कम करके एल डी एल (बुरा कोलेस्ट्रॉल) की मात्रा कम करता है और एच डी एल (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) की मात्रा बढ़ाता है। जिससे शरीर की बेकार चर्बी कम होती रहती है और मोटापा कंट्रोल रहता है। एंटी आक्सीडेंट होने के कारण आंवला शरीर में किसी भी परेशानी को नही आने देता। स्वाद में आंवला कड़वा होता है इसलिए इसका सेवन रस, मुरब्बा, चटनी, चूर्ण व अचार के रूप में आप रोजाना कर सकते है। आंवला को संस्कृत में आमलकी के नाम से जाना जाता है।

आइये आँवले के कुछ घरेलू उपायों को समझे और प्रयोग में लायें:-

  1. आँवले में एलोवेरा के रस को मिलाकर प्रयोग में लाने से इसका प्रभाव व गुण दुगना हो जाता है। प्रतिदिन सुबह खाली पेट 15-15 एम एल एलोवेरा और आंवला के रस को 120 एम एल गुनगुने पानी में मिलाकर पीने से पेट साफ रहता है तथा कब्ज व गैस की समस्या जड़ से ख़त्म हो जाती है।
  2. जिन लोगों को सर्दी-जुखाम की समस्या सदा बनी रहती है उन्हें 5 एम एल आँवले के रस में 20 एम एल गुनगुना पानी मिलाकर रोजाना पीना चाहिए। ज़्यादा सर्दी-जुखाम से पीड़ित व्यक्ति को कच्चे आँवले का सेवन नही करना चाहिए।
  3. एक चम्मच आँवले के पावडर को पानी में मिलाकर रोजाना सुबह खाली पेट लेने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर नही बढ़ता है।
  4. छाती की दुर्बलता और जलन में एक चम्मच आँवले के चूर्ण में दो चम्मच शहद को मिलाकर दिन में दो बार चाटने से फायदा मिलता है। यह प्रयोग एक टॉनिक का काम भी करता है।
  5. रोजाना आँवले का रस पीने से आँखों की रोशनी बढ़ती है। प्रतिदिन एक बड़े चम्मच आँवले के रस में शहद मिलाकर चाटने से मोतियाबिंद की समस्या से निजात मिलता है।
  6. कच्चे आँवले को बारीक पीसकर बकरी के दूध में मिलाकर सिर और ललाट पर लगाने से नकसीर में आराम आता है।
  7. दिल के रोगी किसी भी रूप में तीन आंवला रोज खायें, इससे दिल संबंधी समस्या दूर होगी। आप आँवले का मुरब्बा भी खा सकते है।
  8. कफ-खाँसी में आँवले के मुरब्बें को गाय के दूध के साथ दिन में तीन बार खायें या शहद के साथ ले खाँसी में आराम मिलेगा।
  9. एसिडिटी होने पर एक ग्राम आँवले के चूर्ण और शक्कर को पानी या दूध में सुबह-शाम लेने से फायदा मिलता है।
  10. चालीस दिन तक आँवले के चूर्ण में मूली का रस मिलाकर लेने से पथरी की समस्या समाप्त हो जाती है।
  11. खून में हिमोग्लोबिन का स्तर कम हो तो रोजाना आँवले के रस का सेवन करे लाभ होगा। आंवला शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के बनने में सहायक है जिससे खून की कमी दूर होती है।
  12. आँवले के रस को छौंक लगाकर पीने से बुखार से छुटकारा मिलता है, इसके अलावा आँवले के रस में थोड़ा सा कपूर मिलाकर मसूड़ों पर लगाने से दातों के दर्द और कैविटी में आराम मिलता है।
  13. बार-बार हिचकी या उल्टी होने पर आँवले के रस को मिश्री के साथ दिन में 3-4 बार लेने से बहुत लाभ मिलता है।
  14. सुबह एक आँवले का मुरब्बा गाय के दूध के साथ लेने से दिमाग तेज होता है व याददाश्त भी अच्छी होती है। आँवले का पेस्ट चेहरे पर लगाने से चेहरा साफ, चमकदार तो होता ही है और दाग-धब्बें व झुरिया भी धीरे-धीरे ख़त्म हो जाती है।
  15. आँवले के पावडर को हिना या पानी में मिलाकर बालों की जड़ों में लगायें और कुछ देर बाद बाल को धो ले, इससे बाल कालें, घने, मजबूत व चमकदार होते है। इस प्रयोग से बालों का झड़ना भी बंद हो जाता है।
  16. गठिया के रोगी 20 ग्राम आँवले के चूर्ण में 25 ग्राम गुड़ ले और 500 एम एल पानी में डालकर उबालें जब तक पानी आधा ना हो जायें। फिर इस काढें को छानकार दिन में दो बार पिएं। इस काढें के सेवन के दौरान नमक ना ले या बहुत ही कम मात्रा में ले।
  17. आँवले के पत्तों को पानी में उबाल कर ठंडा कर ले फिर इस पानी से दिन में 2-3 बार कुल्ले करें मुँह के छाले व घाव में जल्द आराम आयेगा।
  18. रोजाना सुबह और रात को सोते वक्त 50-50 ग्राम आँवले का रस और शहद मिलाकर लेने से पेट की चर्बी और मोटापा कम होता है। इस उपाय से सूखी खाँसी की समस्या भी दूर होती है।
  19. एक गिलास गन्ने के रस में तीन हरे आँवले का रस व तीन चम्मच शहद मिलाकर 10 दिन तक ले पीलिया जड़ से ख़त्म हो जायेगा। जबकि रोग तो 3-4 दिन में ही ठीक हो जायेगा।
  20. आंवला और हल्दी के पावडर को बराबर मात्रा में अच्छे से मिलाकर रख ले। जितनी बार भी भोजन करे एक चम्मच(टी स्पून) इस मिक्स पावडर को पानी के साथ ले। मधुमेह से आप कभी परेशान नही होंगे। इस मिश्रण को आप शहद के साथ भी ले सकते है।

आँवले से और भी कई रोगों में फ़ायदा होता है जैसे की बवासीर, सिर दर्द, अनिंद्रा, हकलाना, तुतलाना, पित्त दोष, अजीर्ण, हिचकी, उच्च रक्तचाप, पेट की समस्या, अर्थराइटिस के दर्द व सूजन को कम करने में, दमा, श्वांस रोग, दिल के रोग, दाद, किडनी, प्रदर, चर्म रोग, हड्डियों की कमजोरी, नर्वस सिस्टम, पाचन क्रिया, गर्भाश्य की तकलीफ़ आदि कई रोगों से निजात के लिए आँवले का उपयोग किया जाता है।

आँवले का सेवन बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित और लाभप्रद है। आँवले को मानव जाति के लिए प्रकृति का वरदान कहा गया है। प्रतिदिन आँवले के सेवन से रोग-प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है क्योकि आँवले में सभी रोगों को दूर करने की क्षमता और गुण पूर्ण रूप से मौजूद है। आयुर्वेद में आँवले का प्रयोग दवाइयों, च्यवनप्राश, त्रिफला रसायन, त्रिफला चूर्ण, मुरब्बा, शर्बत, केश तेल आदि में आँवले का उपयोग किया जाता है।

आँवले में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होने के कारण यह शरीर की चयापचय प्रक्रिया को दुरूस्त रखता है जिससे शरीर का एक्स्ट्रा फ़ैट घट जाता है। पूरे साल आंवला ना मिलने के कारण आप आँवले को मुरब्बें के तौर पर पूरे साल रख सकते है। 1 कि० लो० हरा आंवला, 200 ग्राम हरी मिर्च और 100 ग्राम सेंधा नमक को बिना पानी डाले बारीक पीस ले। पीसने से पहले आँवले की गुठलिया निकाल ले और आँवले व हरी मिर्च को अच्छे से सूखा ले, फिर इस पावडर को पूरे साल के लिए आप सुरक्षित रख सकते है। इस पावडर को आप दाल-सब्जी या चटनी में डाल कर कभी भी खा सकते है। आँवले के इस चूर्ण में हरी मिर्च और सेंधा नमक मिलाने से आँवले का गुण दोगुना हो जाता है यानी की यह मिश्रण सोने पे सुहागे का काम करता है।

किसी न किसी रूप में आँवले का सेवन नित्य करे, इससे शरीर में ताक़त व स्फूर्ति बनी रहती है क्योकि यह एक ब्रेन टॉनिक है, जो पाचन तंत्र से लेकर याददाश्ती तक को बढ़ाने की क्षमता रखता है। यह शरीर से हानिकारक टोक्सिन को बाहर निकालने में भी सहायक है। गर्मियों के मौसम में खाली पेट आँवले के मुरब्बें का सेवन करने से शरीर को अंदर से शीतलता मिलती है। अंत में हम यह ही कहना चाहेंगे कि आंवला हमारे शरीर के लिए अमृत तुल्य है। इसका सेवन प्रतिदिन करने से जाने-अनजाने कई बिमारियों से हमें सुरक्षा प्रदान होती है।

हमारा उद्देश्य आपका सामान्य ज्ञान बढ़ाना है। आंवला का उपयोग कितनी मात्रा में और कैसे करे उसके लिए आप अपने चिकित्सक से सलाह ज़रूर ले।

“जीवन संजीवनी आयुर्वेद”

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