भारत का प्रथम समाचार पत्र

आइये जानते हैं भारत का प्रथम समाचार पत्र कौन सा था। आधुनिक भारत में आज ऐसा कोई घर नहीं जो न्यूज पेपर से वंचित हो। भारत में अखबार का चलन ब्रिटिश भारत के समय से है। बस अंतर यह है उस समय कुछ भी छापने से पहले डर से गुजरना पड़ता था साथ में पहचान भी गुप्त रखनी पड़ती थी और आज का अखबार पूर्णरूप से स्वतंत्र है। अखबार का मुख्य उद्देश्य होता है समाज को हर तरह से जागरूक करना। इसलिए समाज में इसकी भूमिका वाच डॉग के रूप में मानी जाती है।

अब हम बात करते है भारत के प्रथम अखबार के बारे में, जिसका प्रकाशन गुलाम भारत के दौर में ही हो चुका था। क्योंकि भारत को स्वतंत्र कराने में अखबारिता का बहुत बड़ा योगदान था। उस वक्त यही एक जरिया हुआ करता था अपनी बात को एक-दूसरे के समक्ष रखने का। उस जमाने में संपादक को सख़्त सरकारी नियमों से गुजरना पड़ता था। अगर किसी ने गलती से भी ब्रिटिश सरकार के खिलाफ कुछ छाप दिया तो उसे कड़ी सजा या अखबार बंद करने का आदेश जारी कर दिया जाता था।

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भारत का प्रथम समाचार पत्र

29 जनवरी 1780 में जेम्स ऑगस्ट हिक्की द्वारा कोलकाता से भारत का पहला अखबार ”हिकी बंगाल गजट” या ”बंगाल गजेटिअन” के नाम से अंग्रेज़ी भाषा में प्रकाशित हुआ। साथ ही यह भारत का पहला अखबार था जो पूर्णरूप से स्वतंत्र विचारों से परिपूर्ण था। चार पन्नों का यह अखबार साप्ताहिक था।

जेम्स ऑगस्ट हिक्की देश के पहले ऐसे पत्रकार थे जिन्होंने ब्रिटिश सरकार से प्रेस की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया और बिना डरे अपने अखबार में भ्रष्टाचार व ब्रिटिश शासन की जमकर आलोचना की। ज्यादातर इस समाचार पत्र में ब्रिटिश शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के निजी जीवन पर ही लेख होते थे।

एक बार हिक्की ने गवर्नर की पत्नी के बारे में अपने अखबार में आलोचना कर दी तो ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारियों को बहुत नागवार गुजरा और हिक्की को चार माह की जेल और पाँच सौ रुपये का जुर्माना से गुजरना पड़ा। लेकिन हिक्की इस तरह के कृत्य से भी घबराए नहीं बल्कि पूरी ताकत के साथ अपने अखबार में ब्रिटिश शासन की बर्बरता और भ्रष्टाचार के बारे में छापते रहे। उन्हें सच्चाई से परहेज करना गवारा नहीं था।

हिक्की ने जब अपने अखबार बंगाल गजट में गवर्नर और सर्वोच्च न्यायाधीश द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार की निंदनीय आलोचना की तो ब्रिटिश सरकार ने 5000 जुर्माने के साथ हिक्की को जेल में डाल दिया और उनके प्रेस को जब्त कर लिया गया। इस तरह लगभग दो साल दो महीने बाद 23 मार्च 1782 को बंगाल गजट के प्रकाशन पर रोक लगा दी गई।

ब्रिटिश इंडिया कंपनी की नजर में हिक्की की निडरता एक अपराध था। परिणाम यह हुआ की हिक्की को भारत छोड़ने पर मजबूर किया गया। उसके बाद किसी भी अंग्रेज ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ प्रकाशन नहीं किया। आजादी से पूर्व कई समाचार पत्र शुरू हुए। लेकिन अधिक समय तक प्रकाशन में रह नहीं पाए और बंद कर दिए गये। इसलिए यह कहना उचित होगा की भारत में मुद्रित पत्रकारिता का श्रेय हिक्की को ही दिया जाता है।

आजाद भारत में समाचार पत्र व पत्रिकाओं में कई बदलाव हुए। क्योंकि अधिकांश अखबार भारतीयों के हाथ में आ गये और आगे इसका कार्य सुचारू रूप से चल सके उसके लिए भारतीय प्रेस ट्रस्ट की स्थापना हुई। 1970 तक आते-आते भारतीय अखबार ने उद्योग का स्थान ले लिया।

आज वर्तमान में भारत का अखबार उद्योग विश्व का सबसे बड़ा अखबार उद्योग है। 1975-1977 के समय जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने तत्कालीन आपातकाल लगा दिया था। उस वक्त अखबार में छपने वाली हर खबर पर पूरी तरह से नियंत्रण करने का प्रयास किया गया था। इस दमनकारी वक्त से निकलने के बाद अखबारों की जड़ तुलनात्मक रूप से ओर मजबूत हुई और परिणाम आपके समक्ष है।

आज का अखबार चरम पर है। डिजिटल इंडिया आज के अखबारों की सबसे बड़ी ताकत है। कुछ मुख्य अखबार जो भारत के बड़े अखबारों की श्रेणी में आते है जैसे- दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, पत्रिका, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स आदि।

30 मई 1826 को भारत का प्रथम हिन्दी साप्ताहिक समाचार पत्र “उदन्त मार्तण्ड” जुगलकिशोर सुकुल द्वारा कोलकाता से प्रकाशित हुआ। आर्थिक तंगी और ब्रिटिश सरकार के असहयोग के कारण 4 दिसंबर 1827 को इसका प्रकाशन बंद करना पड़ा।

उम्मीद है जागरूक पर भारत का प्रथम समाचार पत्र कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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