भारत का सबसे ऊंचा पर्वत

दुनिया के सबसे ऊँचे पर्वत माउन्ट एवरेस्ट के बारे में तो आप जानते हैं लेकिन भारत का सबसे ऊंचा पर्वत कौनसा है इसके बारे में भी क्या आप जानते हैं? भारत का सबसे ऊंचा पर्वत होने का श्रेय कंचनजंघा को जाता है। ऐसे में भारत के इस सर्वोच्च शिखर और विश्व के तीसरे सबसे ऊँचे पर्वत के बारे में आपको भी जरूर जानना चाहिए। तो चलिए, आज जानते हैं कंचनजंघा के बारे में।

कंचनजंघा सिक्किम और नेपाल की सीमा पर, तिब्बत और भारत की जल विभाजक रेखा के दक्षिण में स्थित है। इस पर्वत की ऊंचाई 8586 मीटर (28169 फीट) है।

कंचनजंघा एक तिब्बती शब्द है जिसका अर्थ होता है – महान हिमानियों के पांच अतिक्रमण, जो इसकी पांच चोटियों से सम्बंधित है। इस पर्वत का दूसरा नाम कोंगलोचु है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है – बर्फ का सर्वोच्च पर्दा। नेपाली में इस पर्वत को कुम्भकरण लंगूर कहा जाता है।

पौराणिक कथाओं में और स्थानीय निवासियों के धार्मिक अनुष्ठानों में इस पर्वत को विशेष महत्व दिया गया है। कंचनजंघा पर्वत का आकार एक विशाल सलीब (सूली) के समान है जिसकी भुजाएं पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण चारों दिशाओं में स्थित है। अलग-अलग खड़े शिखर अपने पास स्थित शिखर से चार प्रमुख पर्वतीय कटकों द्वारा जुड़े हुए हैं जिनसे चार हिमनद बहते हैं- जेमू (पूर्वोत्तर), तालुंग (दक्षिण-पूर्व), यालुंग (दक्षिण-पश्चिम), कंचनजंघा (पश्चिमोत्तर)

कंचनजंघा का पहला मानचित्र 19वीं शताब्दी में रिनज़िन नामग्याल नामक अन्वेषणकर्ता ने बनाया था। इस पर्वत क्षेत्र में आने वाले और इसका वर्णन करने वाले पहले यूरोपीय वनस्पतिशास्त्री सर जोजेफ होकर थे जो 1848-1849 में यहाँ आये।

1899 में अन्वेषणकर्ता और पर्वतारोही डगलस फ्रेशफील्ड ने इस पर्वत की परिक्रमा की। इसके बाद कंचनजंघा पर चढ़ाई करने के कई प्रयास हुए जिनमें कई दुर्घटनाएं हुयी जिसके चलते इस पर्वत को कठिन पर्वत और असामान्य रूप से ख़तरनाक पर्वत कहा जाने लगा।

1955 में चार्ल्स इवान के नेतृत्व में ब्रिटिश अभियान दल ने इस पर्वत शिखर पर चढ़ने का प्रयास किया लेकिन सिक्किम वासियों की धार्मिक भावनाओं का आदर करते हुए वो मुख्य शिखर तक नहीं गए बल्कि कुछ कदम की दूरी पर ही रुक गए।

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