हर व्यक्ति अपने देश पर नाज़ करता है और देश की उपलब्धियों पर गौरवान्वित भी महसूस करता है। भारत के अनोखे आविष्कार और चकित करने वाली खोजें जानकर आप हैरान भी हो जाएंगे और फक्र भी महसूस करने लगेंगे क्योंकि चाहे अंतरिक्ष में भेजा गया मंगलयान हो या फिर गॉड पार्टिकल की खोज ही क्यों ना हो, भारत देश का नाम पूरी दुनिया में शान से लिया जाता है और इस देश को अपनी नई-नई खोजों और उपलब्धियों के लिए सराहा जाता है।

ऐसे में क्यों ना आज, हम भारत के ऐसे ही कुछ ख़ास और रोमांचक आविष्कारों के बारे में बात करें जो दुनिया को भारत की देन हैं। तो चलिए, आज भारत के अनोखे आविष्कार के बारे में जानते हैं।

भारत के अनोखे आविष्कार

हवाई जहाज का आविष्कार – ये सच है कि हवाई जहाज के आविष्कार का श्रेय राइट ब्रदर्स को जाता है। लेकिन इस आविष्कार से बहुत पहले ही भारत ने इस विमान की खोज कर ली थी और विमानों से जुड़ा विस्तृत विवरण महर्षि भारद्वाज द्वारा लिखे ग्रन्थ ‘विमान शास्त्र’ में मिलता है। जिससे स्पष्ट होता है कि विमान की खोज सदियों पहले भारत में हो चुकी थी।

भारत के अनोखे आविष्कार 1

सर्जरी का आविष्कार – आज मेडिकल साइंस का एक बहुत जरुरी हिस्सा सर्जरी हो गया है जिसमें प्लास्टिक सर्जरी भी शामिल है। भले ही मॉडर्न सर्जरी टेक्निक्स को ईजाद करने का श्रेय पश्चिमी देशों को मिला है। लेकिन भारत में सर्जरी की शुरुआत सदियों पहले, आचार्य सुश्रुत द्वारा कर दी गयी थी इसलिए उन्हें शल्य चिकित्सा (सर्जरी) का जनक कहा जाता है।

आचार्य सुश्रुत ने 300 प्रकार की ऑपरेशन प्रक्रियाएं खोजी। कॉस्मेटिक सर्जरी में एक्सपर्ट रहे आचार्य सुश्रुत ने पथरी का इलाज करने से लेकर कृत्रिम अंग लगाने तक की विधाओं की खोज कर ली थी। यानी सर्जरी का आविष्कार भारत में ही हुआ था।

पहिये का आविष्कार – सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेषों में मिली खिलौना हाथगाड़ी ही इस बात को प्रमाणित करने के लिए काफी है कि भारत में पहिये का अस्तित्व बहुत पहले से है। इसके अलावा श्री कृष्ण के सुदर्शन चक्र और महाभारत में इस्तेमाल हुए रथ भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि सबसे पहले भारत ने ही पहिये की खोज की। इतना ही नहीं, संसार की सबसे प्राचीन पुस्तक ऋग्वेद में भी विमान, चक्र और रथ का वर्णन मिलता है। ये सभी बातें स्पष्ट करती हैं भारत में पहिये का आविष्कार सबसे पहले हुआ था।

बिजली का आविष्कार – बिजली का आविष्कार करने का श्रेय माइकल फैराडे को जाता है। लेकिन बल्ब का आविष्कार करने वाले थॉमस एडीसन ने अपनी एक किताब में ज़िक्र किया है कि उन्हें बल्ब बनाने की प्रेरणा और दिशा-निर्देश महर्षि अगत्स्य के संस्कृत वाक्य से मिले हैं। जिसकी मदद से उन्होंने बल्ब का आविष्कार किया। इससे स्पष्ट होता है कि बल्ब और बिजली की खोज सबसे पहले भारत में ही हुयी थी। क्योंकि महर्षि अगस्त्य ने अगस्त्य संहिता ग्रन्थ में बिजली उत्पादन से जुड़े सूत्र बताये थे।

अस्त्र-शस्त्र का आविष्कार – आज दुनिया में जिन नए अस्त्र-शस्त्रों की खोज हो रही है, उनसे कहीं ज्यादा उत्तम अस्त्र-शस्त्र भारत में पहले ही बन चुके थे। भारत के वेद-पुराणों में अग्नि अस्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे संहारक अस्त्रों का वर्णन मिलता है। वर्तमान में परमाणु बम के जनक रॉबर्ट ओपन हाइमर को माना जाता है। जिन्होंने महाभारत ग्रन्थ का गहन अध्ययन किया और उसमें बताये गए संहारक अस्त्रों पर शोध करने के बाद ही अपना पहला परमाणु परीक्षण किया था।

इतना ही नहीं, परमाणु सिद्धांत शास्त्र के जनक जॉन बोतल को माना जाता है। लेकिन उनसे 2500 साल पहले ही भारत में ऋषि कणाद ने वेदों का अध्ययन करके परमाणु सिद्धांत प्रतिपादित कर दिया था।

ज्यामिति का आविष्कार – पाइथागोरस के सिद्धांत से पहले भारत के प्राचीन गणितज्ञ बौधायन ने ज्यामिति के सूत्र दिए थे। 2800 साल पहले ही बौधायन ने रेखागणित, ज्यामिति के नियमों की खोज कर ली थी। उस समय रेखागणित और ज्यामिति/त्रिकोणमिति को शुल्व शास्त्र कहा जाता था। इसलिए उन्हें शुल्व सूत्र और श्रौतसूत्र का रचयिता माना जाता था।

गुरुत्वाकर्षण की खोज – हम सभी जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण की खोज न्यूटन ने की। लेकिन ये जानकर आप हैरान रह जाएंगे कि प्राचीन भारत के प्रसिद्ध गणितज्ञ और ज्योतिषी भास्कराचार्य ने अपने ग्रन्थ ‘सिद्धांतशिरोमणि’ में पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के बारे में लिखा है कि ‘पृथ्वी आकाशीय पदार्थों को विशिष्ट शक्ति से अपनी ओर खिंचती है। इस कारण आकाशीय पिंड पृथ्वी पर गिरते हैं।’ इससे स्पष्ट है कि गुरुत्वाकर्षण की गुत्थी भारत में पहले ही सुलझ चुकी थी।

बटन का आविष्कार – मामूली से समझे जाने वाले बटन के महत्त्व को आप भी बखूबी जानते हैं। आपके लिए ये जानना रोचक होगा कि शर्ट के बटन की खोज भी भारत में ही हुयी थी। इसका प्रमाण मोहनजोदड़ों की प्राचीन सभ्यता से मिले हैं। इस स्थान की खुदाई में बहुत से वस्त्र मिले थे जिनमें बटन लगे हुए थे।

रेडियो का आविष्कार – रेडियो के आविष्कार का श्रेय मार्कोनी को जाता है। लेकिन भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु की डायरी के नोट्स के आधार पर ही उन्होंने रेडियो का आविष्कार किया था। मार्कोनी को 1909 में वायरलेस टेलीग्राफी के लिए नोबल पुरस्कार दिया गया। लेकिन संचार के लिए रेडियो तरंगों का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन जगदीश चंद्र बसु (मिलीमीटर तरंगें और क्रेस्कोग्राफ सिद्धांत के खोजकर्ता) ने 1895 में ही कर दिया था।

मार्कोनी ने इसके 2 साल बाद प्रदर्शन किया और उन्हें पूरा श्रेय मिल गया। इस तरह अंग्रेज काल में अपने आविष्कार का पेटेंट करवाने में असफल रहे जगदीश चंद्र बसु ही वो भारतीय थे। जिन्होंने सबसे पहले रेडियो जैसा महान आविष्कार किया था।

दोस्तों, प्राचीन समय में भारत दुनिया का गुरु रह चुका है जिसने दुनिया को शस्त्र और शास्त्र का ज्ञान देने के साथ नए-नए आविष्कारों की सौगात भी दी।

उम्मीद है भारत के अनोखे आविष्कार कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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