भारत के पहले प्रधानमंत्री कौन थे?

अक्टूबर 29, 2018

आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू थे जो समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष थे और उन्हें ‘लोकतान्त्रिक गणतंत्र का वास्तुकार’ भी माना गया है। उन्हें बच्चों से विशेष लगाव था इसलिए उनके जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवम्बर 1889 को इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ। उनके पिता का नाम पंडित मोतीलाल नेहरू था और उनकी माता श्रीमती स्वरुप रानी थी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उनके घर पर ही हुयी और 15 वर्ष की उम्र में उन्हें इंग्लैंड के हैरो स्कूल भेजा गया जहाँ दो साल पढ़ने के बाद नेहरू कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज से विज्ञान में स्नातक होकर निकले। इसके बाद उन्होंने लन्दन के इनर टेम्पल में रहते हुए वकालत की पढ़ाई भी की।

1912 में भारत लौटने के बाद जवाहर लाल नेहरू इलाहाबाद हाईकोर्ट में बैरिस्टर बन गए। वर्ष 1916 में उनका विवाह कमला कौल से हुआ और 1917 में उनके घर भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी का जन्म हुआ।

1917 में जवाहर लाल नेहरू होम रूल लीग से जुड़ गए और 1919 में जब नेहरू महात्मा गाँधी के संपर्क में आये तो उनके जीवन पर गाँधी जी के व्यक्तित्व का बहुत प्रभाव पड़ा और तब से नेहरू जी सक्रिय रूप से आन्दोलनों का हिस्सा बनने लगे। वो 1920-1922 के असहयोग आंदोलन में गिरफ्तार भी हुए।

1926 से 1928 तक जवाहर लाल नेहरू ने अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव का पद संभाला और 1929 में लाहौर में हुए कांग्रेस अधिवेशन के अध्यक्ष भी बनाये गए और उनकी अध्यक्षता वाले इस अधिवेशन में ‘पूर्ण स्वराज’ का प्रस्ताव पारित हुआ।

26 जनवरी 1930 को लाहौर में भारत का झंडा भी जवाहर लाल नेहरू ने ही फहराया था। 1936 और 1937 में उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुना गया। उन्हें 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गिरफ्तार भी किया गया।

एक महान राजनीतिज्ञ और वक्ता होने के साथ जवाहर लाल नेहरू एक महान लेखक भी थे जिन्होंने ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ किताब लिखी। इस किताब को नेहरू जी ने अहमदनगर की जेल में रहते हुए लिखा।

अपने देश से जुड़े हर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मसले को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाले जवाहरलाल नेहरू ने अपने पड़ोसी देशों से भी सम्बन्ध बेहतर बनाने के कई प्रयास किये लेकिन 1962 में चीन द्वारा हमला किये जाने की घटना से उन्हें बहुत ठेस लगी।

27 मई 1964 को दिल का दौरा पड़ने से जवाहरलाल नेहरू का देहांत हो गया और ऐसी महान शख्सियत भारत को अलविदा कह गयी। उनके महान प्रयासों के लिए उन्हें 1955 में भारत रत्न से नवाजा गया और उनकी स्मृतियाँ हर भारतीय के मन में आज भी जीवंत है और हमेशा जीवंत बनी रहेंगी।

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