भारत की खोज किसने और कब की?

दुनिया में मौजूद हर देश कभी ना कभी खोजा गया है। कभी जान-बूझकर तो कभी अनजाने में। ऐसी ही एक दिलचस्प कहानी है भारत की खोज की। ऐसे में आप भी भारत की खोज से जुड़ी जानकारी तो जरूर लेना चाहते होंगे। तो चलिए, आज आपको बताते हैं भारत की खोज की कहानी।

वास्को द गामा वो पहले यूरोपियन थे जिन्होंने यूरोप को पहली बार भारत तक पहुँचने का समुद्री मार्ग बताया था। उससे पहले भारत यूरोपी देशों की पहुँच से बहुत दूर था।

यूरोप मसाले, मिर्च अरब के देशों से खरीदता था लेकिन अरब देश के व्यापारी यूरोप को ये जानकारी नहीं दिया करते थे कि वो मसाले पैदा किस जगह करते हैं। ऐसे में यूरोप को व्यापार के लिए अरब देशों से अच्छे विकल्प की जरुरत महसूस हो रही थी।

भारत तक पहुँच बनाना आसान नहीं था क्योंकि भारत के एक ओर हिमालय की ऐसी शृंखलाएँ हैं जिन्हें पार करना तब संभव नहीं था वहीं दूसरी ओर भारत तीन ओर समुद्र से घिरा था। ऐसे में भारत पहुँचने के लिए यूरोप के पास तीन विकल्प थे।

पहला – रशिया पार करके चीन से बर्मा पहुंचकर भारत आने का रास्ता, जो बहुत लम्बा और खतरों से भरा था।

दूसरा – अरब और ईरान को पार करके भारत पहुँचना, लेकिन ये रास्ता अरब के लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जाता था और अरब इस मार्ग से किसी ओर को घुसने नहीं देते थे।

तीसरा – समुद्र के रास्ते भारत पहुंचना लेकिन इस रास्ते में समुद्र ही चुनौती देने वाला था।

ऐसे में कोलम्बस द्वारा अमेरिका को भारत समझकर, वहां के नागरिकों को ‘रेड इंडियंस’ कहने के 5 साल बाद, पुर्तगाल के नाविक वास्को द गामा भारत का समुद्री मार्ग ढूंढने निकले और समुद्री रास्ते से कालीकट पहुंचकर वास्को द गामा ने भारत पहुँचने के लिए नया मार्ग खोज लिया।

8 जुलाई 1497 को वास्को द गामा चार जहाजों के एक बेड़े के साथ लिस्बन से निकले थे और 20 मई 1498 में वास्को द गामा ने समुद्र के रास्ते कालीकट पहुंचकर यूरोप वासियों के लिये भारत पहुंचने का एक नया मार्ग खोज लिया और इस तरह यूरोप को भारत तक पहुंचाने का ऐतिहासिक कार्य वास्को द गामा ने किया।

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