भारत की राजधानी दिल्ली कब बनी थी?

अक्टूबर 21, 2018

आइये जानते हैं भारत की राजधानी दिल्ली कब बनी थी। क्या आप जानते हैं कि भारत की राजधानी पहले दिल्ली नहीं, बल्कि कलकत्ता हुआ करता था लेकिन 12 दिसंबर 1911 को हुयी घोषणा के बाद भारत की राजधानी दिल्ली को बना दिया गया। 12 दिसम्बर 1911 की सुबह 80 हजार से भी ज्यादा लोगों के सामने, ब्रिटेन के किंग जॉर्ज पंचम ने ये घोषणा की – “हमें भारत की जनता को यह बताते हुए बेहद हर्ष होता है कि सरकार और उसके मंत्रियों की सलाह पर देश को बेहतर ढ़ंग से प्रशासित करने के लिए ब्रितानी सरकार भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करती है।”

उसके बाद ब्रिटिश आर्किटेक्ट सर हरबर्ट बेकर और सर एडविन लुटियंस ने नए शहर की योजना को अंजाम दिया और इस योजना को पूरा होने में 2 दशक का समय लग गया। इसके बाद 13 फरवरी 1931 को आधिकारिक रूप से दिल्ली को देश की नयी राजधानी बनाया गया।

माना जाता है कि दिल्ली शब्द फ़ारसी के ‘देहलीज़’ शब्द से आया है क्योंकि दिल्ली गंगा के तराई इलाकों के लिए एक ‘देहलीज़’ है जबकि कुछ लोगों का मानना ये है कि दिल्ली का नाम तोमर राजा ढिल्लू के नाम पर दिल्ली पड़ा है।

नयी दिल्ली नाम 1927 में दिया गया और इस नयी दिल्ली में चौड़ी सड़कें, विशाल इमारतें, ऑफिस, क्वार्टर, विश्वविद्यालय बनाये गए जिनके जरिये अंग्रेज़ अपनी छाप छोड़ना चाहते थे और इसलिए उन्होंने ‘वायसराय हाउस’ और ‘नेशनल वॉर मेमोरियल’ जैसी इमारतें बनवायी जिन्हें आज ‘राष्ट्रपति भवन’ और ‘इंडिया गेट’ कहा जाता है लेकिन शाहजहां द्वारा बसाई गयी पुरानी दिल्ली कभी नयी दिल्ली में शामिल नहीं हो सकी।

माना जाता है जब दिल्ली को राजधानी बनाने की घोषणा की गयी, तब दिल्ली की स्थिति अच्छी नहीं थी। दिल्ली से बेहतर हालात कलकत्ता, मद्रास और बॉम्बे जैसे महानगरों के थे लेकिन दिल्ली भौगोलिक दृष्टि से देश के बीच में स्थित थी इसलिए अंग्रेजों ने भारत की राजधानी दिल्ली को ही बनाने का निर्णय लिया।

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