भुवनेश्वर के पर्यटन स्थल

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर महानदी के किनारे स्थित है। कहा जाता है कि एक समय ऐसा था जब इस शहर में 2000 से भी ज्यादा मंदिर थे। इसी कारण भुवनेश्वर को ‘मंदिरों का शहर’ भी कहा जाता है। यहाँ देश-विदेश से श्रद्धालु और सैलानी आया करते हैं। इस प्राचीन शहर का समृद्ध इतिहास 3000 साल पुराना है। पौराणिक दृष्टि से इस शहर का विशेष महत्त्व है इसलिए इसे ‘पूर्व का काशी’ भी कहा जाता है। ऐसे में जागरूक पर क्यों ना आज भुवनेश्वर के पर्यटन स्थल के बारे में बात की जाए। तो चलिए, आज भुवनेश्वर के पर्यटन स्थल के बारे में जानते हैं।

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कोणार्क सूर्य मंदिर – यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर में शामिल किये गए इस स्थल का इतिहास 13वीं शताब्दी से जुड़ा है। भगवान सूर्य को समर्पित इस मंदिर की वास्तुकला अनूठी है। इस मंदिर का निर्माण राजा लांगूल नृसिंहदेव ने शुरू करवाया था लेकिन उनकी अकाल मृत्यु के कारण इसका निर्माण कार्य बीच में ही छोड़ दिया गया। इस मंदिर से जुड़ी अनोखी बात ये है कि वास्तु दोषों के कारण इस मंदिर में पूजा नहीं की जाती है बल्कि इस मंदिर को केवल पर्यटन स्थल के रूप में ही इस्तेमाल किया जाता है।

चिल्का झील – ये भारत की पहली और विश्व की दूसरी सबसे बड़ी समुद्री झील है। झील में बहुत से छोटे-छोटे द्वीप हैं जो बहुत खूबसूरत नज़र आते हैं। इसकी खूबसूरती को देखने के लिए यहाँ रोज हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं। यहाँ आपको बहुत से देशी और प्रवासी पक्षी भी देखने को मिलेंगे।

लिंगराज मंदिर – भुवनेश्वर के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है लिंगराज मंदिर, जो भगवान त्रिभुवनेश्वर को समर्पित है। धार्मिक कथा के अनुसार, इसी स्थान पर माता पार्वती ने लिट्टी और वसा नामक दो राक्षसों का वध किया था।

धौलागिरी हिल्स – भुवनेश्वर से 8 किमी. दूर, दया नदी के किनारे धौलागिरी हिल्स स्थित है। इस पहाड़ी के शिखर पर एक बड़ी चट्टान पर अशोक के शिलालेख उत्कीर्ण हैं। इस पहाड़ी को कलिंग युद्ध क्षेत्र माना जाता है। इस युद्ध के कुछ साल बाद ये स्थान बौद्ध गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बना इसलिए यहाँ कई स्तूप और स्तम्भों का निर्माण भी हुआ।

उदयगिरि और खंडगिरि – भुवनेश्वर के पास स्थित ये दो पहाड़ियां पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्त्व रखती हैं। इनका निर्माण राजा खारवेल के शासनकाल में विशाल शिलाखंडों से किया गया था। उदयगिरि में 18 गुफाएं हैं और खण्डगिरि में 15 गुफाएं हैं। इनका निर्माण बहुत ही सुन्दर ढंग से किया गया है।

मुक्तेश्वर मंदिर – भुवनेश्वर के खुर्द जिले में स्थित मुक्तेश्वर मंदिर एक छोटी पहाड़ी पर स्थित है। भगवान शिव को समर्पित ये मंदिर दो मंदिरों का समूह है – परमेश्वर मंदिर और मुक्तेश्वर मंदिर। यहाँ भगवान शिव के साथ ब्रह्मा, विष्णु, पार्वती, नंदी और हनुमान जी भी विराजमान हैं। इन दोनों मंदिरों की स्थापना 970 ई. के आसपास हुयी थी। इन मंदिरों की चित्रकारी बहुत आकर्षक है। मुक्तेश्वर मंदिर में नक्काशी के साथ नागर शैली और कलिंग वास्तुकला का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

नंदनकानन पार्क – भुवनेश्वर से करीब 20 किमी. दूर स्थित नंदनकानन उद्यान 1960 में स्थापित हुआ। ये उद्यान ना केवल सफेद बाघों के लिए प्रसिद्ध है बल्कि घड़ियालों का प्रजनन केंद्र भी है। यहाँ के प्राकृतिक नज़ारों के साथ आप टाइगर सफारी का आनंद भी ले सकते हैं।

दोस्तों, उम्मीद है भुवनेश्वर के पर्यटन स्थल कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमन्द भी साबित होगी।

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