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ब्लड प्रेशर से जुड़ी कुछ ख़ास जानकारियां

ब्लड प्रेशर को आज भले ही एक सामान्य बीमारी मान लिया जाता है लेकिन वास्तविकता में ये एक गंभीर बीमारी है। आइये जानें ब्लड प्रेशर से जुड़ी कुछ ख़ास जानकारियां।

हमारे शरीर में परिसंचरण तंत्र पाया जाता है जो हृदय, धमनियों तथा शिराओं से मिलकर बना है। इस तंत्र का काम शरीर के हर भाग में रक्त पहुँचाना है ताकि शरीर के प्रत्येक अंग तक पोषण और ऑक्सीजन पहुंच सके। इस सिस्टम में हृदय का कार्य होता है रक्त को लगातार पम्प करते रहना। धमनियों से होकर रक्त शरीर के हर भाग तक पहुंच जाता है और शिराओं के ज़रिये अशुद्ध यानि ऑक्सीजन रहित रक्त शरीर के प्रत्येक भाग से हृदय में आता है। ये प्रक्रिया इसी तरह निरंतर चलती रहती है।

धमनी और शिरा को रक्त वाहिनियां कहा जाता है। इन रक्तवाहिनियों में जब रक्त बहता है तो ये रक्त इन वाहिनियों की दीवारों पर दबाव डालता है जिसे रक्तचाप यानि ब्लड प्रेशर कहते हैं। उम्र के अनुसार ये दबाव कम – ज़्यादा होता रहता है और अगर ब्लड प्रेशर की नियमित जांच कराई जाए तो बहुत से बीमारियों को उनके शुरुआती स्तर पर ही पहचान कर इलाज किया जा सकता है।

सामान्य स्थिति में ब्लड प्रेशर का मान 120/80 होता है। इसमें ऊपर की संख्या को सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहा जाता है क्योंकि यह हृदय के धड़कने या सिस्टोल होने के समय के ब्लड प्रेशर को दिखाता है जबकि नीचे वाली संख्या को डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहते हैं जो हृदय के तनाव-मुक्त रहने के समय के ब्लड प्रेशर की जानकारी देता है। युवा वर्ग में अक्सर डायस्टोलिक प्रेशर बढ़ा हुआ पाया जाता है जबकि अधिक उम्र के लोगों में सिस्टोलिक प्रेशर ज्यादा देखने में आता है। इसे मापने के लिए डॉक्टर द्वारा एक मशीन का इस्तेमाल किया जाता है जिसे स्फिग्नोमैनोमीटर कहते हैं।

ब्लड प्रेशर के 130/80 से ज़्यादा होने पर उसे हाईपरटेंशन या उच्च रक्तचाप कहते हैं जो धमनियों में तनाव बढ़ने के कारण होता है। इस अवस्था में हृदय को धमनियों में रक्त भेजने के लिये बहुत मेहनत करनी पड़ती हैं क्यूँकि समय के साथ हमारी धमनियाँ कठोर या कड़ी हो जाती हैं, जिसके फलस्वरूप हृदय कमजोर हो जाता हैं। उच्च रक्तचाप के कारण हमारी दिनचर्या से ही जुड़े होते हैं जैसे खानपान में पोषण की कमी, नमक का ज़्यादा सेवन, ज़्यादा चिंता, तनाव और गुस्से की स्थिति में बने रहना और व्यायाम और शारीरिक श्रम से दूर रहना।

जबकि निम्न रक्तचाप या हाइपोटेंशन वो दाब है जिससे धमनियों और नसों में रक्त का प्रवाह कम होने के संकेत दिखाई देते हैं। ऐसी स्थिति में मस्तिष्क, हृदय और किडनी जैसे अंगों में पोषण और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती जिसके कारण इन अंगों को क्षति भी पहुंच सकती है।

रक्तचाप का सामान्य बने रहना स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक है। इसलिए अपनी जीवनचर्या को इस तरह संयमित करना शुरू कीजिये जिसमें पौष्टिक भोजन शामिल हो, धूम्रपान जैसे विकार न हो और तनाव और चिंता जैसे व्यर्थ के विचार भी न हो। आप चाहे तो योग का सहारा लेकर अपने रक्तचाप को सामान्य बनाये रख सकते है और अगर आप उच्च या निम्न रक्तचाप से पीड़ित है तो इनमें राहत भी पा सकते है।

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