ब्लड शुगर या ग्लूकोज टेस्ट से खून में ग्लूकोज की मात्रा का पता लगाया जाता है। ग्लूकोज हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है लेकिन जब हमारे आहार में कार्बोहायड्रेट्स की मात्रा बढ़ जाती है तो खून में ग्लूकोज का लेवल भी बढ़ने लगता है। ऐसे में डायबिटीज जैसे लक्षण दिखाई देने पर ब्लड शुगर टेस्ट किया जाता है। ऐसे में आपको भी जानना चाहिए कि ये टेस्ट कब किया जाता है, क्यों किया जाता है और कैसे किया जाता है। तो चलिए, आज आपको बताते हैं ब्लड शुगर टेस्ट के बारे में–

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ब्लड शुगर टेस्ट कब किया जाता है-

इन स्थितियों में ये टेस्ट करने की जरुरत महसूस होती है-

  • अचानक वजन बढ़ने पर
  • धुंधला दिखाई देने पर
  • बार बार पेशाब आने पर
  • सामान्य व्यवहार करने में दिक्कत आने पर
  • पहली बार मिर्गी आने पर
  • बेहोशी आने पर

इस टेस्ट से क्या पता चलता है-

ब्लड शुगर टेस्ट तुरंत रिजल्ट देता है और इस टेस्ट से ये जानकारी मिलती है-

  • ब्लड में शुगर लेवल बढ़ा हुआ है या नहीं
  • डाइट में किसी तरह का बदलाव करने की जरुरत है या नहीं
  • व्यायाम के तरीके में बदलाव की जरुरत है या नहीं
  • डायबिटीज रहने पर, इसका इलाज सही तरीके से चल रहा है या नहीं

डायबिटीज का खतरा कब बढ़ जाता है-

  • व्यायाम नहीं करने पर
  • उम्र 45 साल या उससे ज्यादा होना
  • बीपी, ट्राइग्लिसराइड्स या कोलेस्ट्रॉल का लेवल हाई होना
  • किसी परिवारजन को डायबिटीज होने की स्थिति में

इस टेस्ट को रैंडम टेस्ट (सामान्य स्थिति) या फास्टिंग टेस्ट (बिना कुछ खाये) के रूप में किया जा सकता है।

  • फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट का सामान्य स्तर – 70 से 100 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर
  • रैंडम ब्लड शुगर टेस्ट का सामान्य स्तर – 130 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर के आसपास

टेस्ट में ब्लड शुगर लेवल सामान्य स्तर से अलग आना डायबिटीज का संकेत दे सकता है। ऐसे में डॉक्टर द्वारा दिए निर्देशों और सुझावों पर ध्यान दें और घबराएं नहीं। अगर सही तरह से देखभाल की जाए तो डायबिटीज से भी आसानी से उबरा जा सकता है।

दोस्तों, अब आप जान चुके हैं कि ब्लड शुगर टेस्ट क्या है और ये हमारे स्वास्थ्य से जुड़ी क्या जानकारी देता है। उम्मीद है कि ये जानकारी आपके लिए फायदेमंद साबित होगी।

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