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ब्लड टेस्ट कितने प्रकार के होते हैं और किस टेस्ट से क्या जानकारी मिलती है?

बीमार होने पर अक्सर डॉक्टर हमें ब्लड टेस्ट करवाने के लिए कहते हैं, जिसकी रिपोर्ट देखने के बाद हमारी तकलीफ का पता चल पाता है और उस बीमारी का इलाज संभव हो पाता है। शरीर की कई बीमारियों का पता ब्लड टेस्ट से चलता है इसलिए ब्लड टेस्ट करवाना अपनेआप में एक जरुरी प्रक्रिया है। ऐसे में क्यों ना आज, ये जानें कि मुख्य रूप से ब्लड टेस्ट कितने प्रकार के होते हैं और हर टेस्ट में शरीर के किस अंग से जुड़ी जानकारी मिलती है। तो चलिए, आज आपको बताते हैं ब्लड टेस्ट के कुछ प्रमुख प्रकारों के बारे में –

केमिस्ट्री पैनल और CBC – केमिस्ट्री पैनल और CBC (पूर्ण रक्त गणना) आपके स्वास्थ्य की पूरी जानकारी एकसाथ देता है। इस जांच में नाड़ी, किडनी, लीवर और ब्लड सेल्स की स्थिति का आकलन करने के लिए आवश्यक जानकारी मिलती है। CBC प्लेटलेट्स, लाल रक्त कोशिकाओं और श्वेत रक्त कोशिकाओं की क्वालिटी, संख्या, वैरायटी, पर्सेंटेज का मापन करता है जिससे ये ब्लड टेस्ट रक्तस्राव, इन्फेक्शन और हेमटोलॉजिकल असामान्यताओं की स्क्रीनिंग करने में मदद करता है।

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केमिस्ट्री पैनल के ज़रिये कुल कोलेस्ट्रॉल, एचडीएल, एलडीएल, ट्राइग्लिसराइड्स आदि की जांच करके कार्डिओवैस्क्युलर सिस्टम की स्थिति के बारे में जानकारी मिलती है। इस टेस्ट से ब्लड शुगर के बारे में भी जानकारी मिलती है और कैल्शियम, पोटैशियम और लोहे जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का आकलन भी होता है।

फाइब्रिनोजन – रक्त का थक्का जमाने में फाइब्रिनोजन की अहम भूमिका होती है और फाइब्रिनोजन का स्तर अगर बढ़ जाता है जो दिल का दौरा पड़ने का रिस्क बढ़ जाता है, रुमेटीइड गठिया, किडनी में सूजन जैसे विकार भी हो जाते हैं और इससे मृत्यु का खतरा भी बढ़ जाता है इसलिए ब्लड टेस्ट के ज़रिये इसके लेवल का पता लगाया जाता है।

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हीमोग्लोबिन ए 1 सी ( HBA 1 C ) – शरीर में ग्लूकोज की स्थिति का आकलन करने के लिए ये टेस्ट किया जाता है। इस ब्लड टेस्ट के ज़रिये पिछले दो से तीन महीनों में, ब्लड शुगर के नियंत्रण का मापन होता है और डायबिटीज होने या ना होने की स्थिति में, किसी व्यक्ति में हृदय रोग होने का कितना ख़तरा है, इसका पता लगाया जाता है।

प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन (PSA) – प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन पुरुषों में प्रोस्टेंट ग्लैंड द्वारा बनाया जाने वाला एक प्रोटीन है। इस टेस्ट के ज़रिये प्रोस्टेट ग्लैंड के बढ़ने, उसमें होने वाली जलन और प्रोस्टेट कैंसर जैसी जानकारी ली जाती है।

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होमोसिस्टीन – होमोसिस्टीन एक एमिनो एसिड है जिसका बढ़ा हुआ लेवल हार्ट अटैक और बोन फ्रैक्चर होने का रिस्क बढ़ा देता है। ऐसे में इस ब्लड टेस्ट के ज़रिये होमोसिस्टीन के लेवल का पता लगाया जाता है।

थाइरॉइड स्टिम्युलेटिंग हार्मोन (TSH) – ये हार्मोन थाइराइड ग्लैंड से निकलने वाले हार्मोन के स्राव को नियंत्रित करता है। इस हार्मोन के कम या ज़्यादा होने की स्थिति का पता लगाने के लिए ये ब्लड टेस्ट किया जाता है।

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टेस्टोस्टेरोन (फ्री) – महिला और पुरुषों की एड्रिनल ग्लैंड्स में बनने वाला ये हॉर्मोन, महिलाओं की ओवरी और पुरुषों के टेस्टिस में भी बनता है। उम्र बढ़ने के साथ महिला और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का लेवल कम हो सकता है। इस हार्मोन का निम्न स्तर पुरुषों में हार्ट डिसीज का ख़तरा बढ़ा सकता है और महिलाओं में मेनोपॉज़ के दौरान इस हार्मोन का लेवल कम होने से स्वाभाव में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं।

आइये अब जानते हैं ब्लड टेस्ट करने वाली मशीन के बारे में – ब्लड टेस्ट करने के लिए सीबीसी मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। 14 लाख की इस मशीन से 22 तरह के ब्लड टेस्ट किये जा सकते हैं। इस मशीन से WBC, RBC, हीमोग्लोबिन, हेमाक्रिन, एमसीवी, आरओ, प्लेटलेट्स सहित खून से जुडी 22 जांचें बारीकी से की जा सकती है। ब्लड टेस्ट दूरबीन पद्दति से भी किये जाते हैं जिसमें 13 तरह की जांचें हो पाती हैं।

blood-test ब्लड टेस्ट कितने प्रकार के होते हैं और किस टेस्ट से क्या जानकारी मिलती है?

तकनीक ने बीमारियों का पता लगाने और उन्हें दूर करने के तरीकों को काफी आसान बना दिया है और इन्हीं सरल तरीकों में शामिल है ब्लड टेस्ट के ज़रिये बीमारी का पता लगाना ताकि उसे तुरंत दूर किया जा सके।

इतनी सुविधाओं के बीच एक दायित्व आपका भी है कि आप अपने स्वास्थ्य का सही तरीके से ख्याल रखें और किसी भी तरह का असामान्य संकेत मिलने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें और जरुरत पड़ने पर डॉक्टर द्वारा बताये गए ब्लड टेस्ट करवाने में भी झिझके नहीं, क्योंकि ये सब-कुछ आपके बेहतर स्वास्थ्य के लिए ही तो उपलब्ध हैं।

आपको यह लेख कैसा लगा? अगर इस लेख से आपको कोई भी मदद मिलती है तो हमें बहुत खुशी होगी। अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है, हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे।

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