बोन मिनरल डेंसिटी टेस्ट या डेक्सा स्कैन क्या है?

अगस्त 22, 2018

हमारे शरीर की मजबूती के लिए हड्डियों का मजबूत होना बेहद जरुरी होता है और हड्डियों का घनत्व यानि डेंसिटी ज्यादा होने पर हड्डियां मजबूत होती हैं जबकि बोन डेंसिटी कम होने पर हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। हड्डियों के घनत्व को जानने के लिए बोन मिनरल डेंसिटी टेस्ट किया जाता है जिसे डेक्सा स्कैन भी कहा जाता है। ऐसे में क्यों ना आज, बोन मिनरल डेंसिटी टेस्ट के बारे में जानकारी ली जाये। तो चलिए, आज बोन मिनरल डेंसिटी टेस्ट (डेक्सा स्कैन) के बारे में जानते हैं–

डेक्सा स्कैन में एक्स-रे के जरिये किसी हड्डी में मौजूद कैल्शियम और मिनरल्स की मात्रा का पता लगाया जाता है। बोन डेंसिटी का पता करने के लिए इस्तेमाल होने वाले कई तरीकों में से सबसे ज्यादा प्रचलित तरीका है डेक्सा स्कैन, जिसे ड्यूल एक्स रे एब्सॉर्पटोमेट्री टेस्ट कहा जाता है जिसमें किसी हड्डी में मौजूद कैल्शियम और मिनरल की मात्रा का पता लगाया जाता है।

इस टेस्ट से क्या पता चलता है – बोन डेंसिटी कम होने की स्थिति में फ्रैक्चर होने का खतरा रहता है इसलिए इस टेस्ट के जरिये ये पता लगाया जाता है कि मरीज की बोन डेंसिटी कम है या नहीं। इसके अलावा हड्डियों से जुड़े रोगों जैसे ऑस्टियोपोरेसिस की जांच करने के लिए भी ये स्कैन किया जा सकता है।

टेस्ट से पहले तैयारी – इस टेस्ट को करवाने से पहले किसी विशेष तैयारी की जरुरत नहीं होती है लेकिन अगर इस टेस्ट से पहले सीटी स्कैन या एमआरआई करवाया गया हो तो इस बारे में अपने डॉक्टर को जरूर बताएं।

टेस्ट का रिजल्ट कैसे आता है – इस टेस्ट का रिजल्ट T और Z स्कोर के रूप में आता है। T स्कोर में मरीज की बोन डेंसिटी को नार्मल स्टैण्डर्ड बोन डेंसिटी से तुलना करके दर्शाया जाता है।

T स्कोर –

Z स्कोर से ये पता चलता है कि मरीज की बोन डेंसिटी में एक नार्मल बोन डेंसिटी के ऊपर और नीचे कितना स्टैण्डर्ड डेविएशन (विचलन) है।

तो दोस्तों, अब आप बोन डेंसिटी टेस्ट यानी डेक्सा टेस्ट के बारे में जानकारी ले चुके हैं और उम्मीद है कि ये जानकारी आपके लिए फायदेमंद साबित होगी।

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