ब्रह्मकुमारी क्या है और क्या है राजयोग

जनवरी 7, 2018

प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय पूरी दुनिया में फैला हुआ एक ऐसा आध्यात्मिक संस्थान है जो ना केवल लोगों को अपने व्यक्तित्व को ऊँचा उठाने में मदद करता है बल्कि दुनिया में अध्यात्म के ज़रिये नए और बेहतर बदलाव लाने के लिए समर्पित भी है। इस संस्था की स्थापना वर्ष 1937 में दादा लेखराज कृपलानी ने की, जिन्हें आज इस संस्था में प्रजापिता ब्रह्मा के नाम से जाना जाता है।

हीरों के व्यापारी रहे दादा लेखराज बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे और 60 वर्ष की उम्र में जब उन्हें परमात्मा यानी ईश्वर की सर्वोच्च सत्ता का साक्षात्कार हुआ तो उन्होंने अपना बाकी जीवन मानव के कल्याण में लगाने का निर्णय ले लिया और ब्रह्मकुमारी संस्था की स्थापना की, जिसमें शुरुआत में केवल महिलाएं ही हुआ करती थी जिन्हें ब्रह्माकुमारी कहा जाने लगा। आगे चलकर पुरुषों को भी इस संस्था का हिस्सा बनाया गया।

आज ब्रह्मकुमारी दुनिया की ऐसी सबसे बड़ी आध्यात्मिक संस्था बन गयी है जो महिलाओं द्वारा चलायी जाती है। इस संस्था के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा ने शुरुआत से ही महिलाओं को आगे रखने का निर्णय लिया और इसी कारण आज पूरी दुनिया की आध्यात्मिक संस्थाओं में ब्रह्मकुमारी का अपना अलग अस्तित्व कायम है।

इस संस्था के सभी प्रमुख पदों पर महिलायें आसीन है जो संस्था में शामिल पुरुष भाईयों के साथ मिलकर निर्णय लिया करती हैं। इस संस्था से जुड़े पुरुषों को ब्रह्मकुमार कहा जाता है।

भारत के माउन्ट आबू में ब्रह्मकुमारी का अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय है और अधिकांश शहरों में इस संस्था के स्थानीय केंद्र मौजूद है। इस संस्था द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर की जाने वाली गतिविधियों को विभिन्न देशों में स्थित कार्यालयों के माध्यम से संचालित किया जाता है, जैसे लन्दन, मॉस्को, नैरोबी, न्यूयॉर्क और सिडनी जैसे देशों में।

आज दुनिया के 137 देशों में ब्रह्मकुमारी की 8,500 से भी अधिक शाखाएं हैं, जहाँ हर दिन 10 लाख विद्यार्थी नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा ग्रहण करते हैं। प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की उपाधियों को वैश्विक स्तर पर स्वीकृति और अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त है।

आइये अब राजयोग के बारे में जानते हैं – आज की इस भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में सभी सफल होना चाहते हैं और इस चाहत के चलते जीवन में कब तनाव और मानसिक अशांति घर करने लगती है इसका पता ही नहीं चलता। ऐसे में हम शरीर और मन से अस्वस्थ होने लगते हैं और सफल होने के बावजूद हमें जीवन में शून्यता का अहसास होने लगता है। इस तनाव और शारीरिक-मानसिक कमज़ोरी को दूर करके, स्वयं के लिए एक खुशहाल जीवन बनाने का तरीका है राजयोग।

स्वयं को जानने की इस प्रक्रिया में कुछ समय निकालकर, शान्ति से बैठकर आत्म-निरीक्षण किया जाता है। ये एक ऐसा योग है जिसे कोई भी, कभी भी कर सकता है। योग के इस प्रकार में किसी धार्मिक मन्त्र या प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती है। योग के इस अभ्यास को आँखें खोलकर किया जाता है इसलिए इसका अभ्यास सरल और आसान है।

शांत स्थान पर बैठकर, खुली आँखों से स्वयं के भीतर देखने की सरल प्रक्रिया है राजयोग। आत्म-निरीक्षण के इस नियमित अभ्यास से, मन से नकारात्मक विचार दूर होते जाते हैं और मन सकारात्मक विचारों की शक्ति से भरने लगता है।

राजयोग करने से तनाव दूर हो जाता है और हर प्रकार के रिश्तों में मिठास आने लगती है और जीवन पहले से बेहतर, खुशनुमा और संतुष्ट बनने लगता है क्योंकि हमारे भीतर भागते रहने की लालसा कम होती जाती है और जीवन के हर क्षण के महत्व को समझने का नजरिया विकसित हो जाता है।

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“योग का जीवन में महत्व और लाभ”

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