बुरी आदतों को रोकना क्यों है मुश्किल

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आदतें हमारे स्वभाव का महत्वपूर्ण भाग होती हैं। इनमें से जिन आदतों से हमें फायदा मिलता है उन्हें हम अच्छी आदतें कहते हैं और जिनसे हमें नुकसान पहुँचता है, उन्हें बुरी आदतें माना जाता है। अच्छी आदतें तो व्यक्तित्व को बेहतर बनाने में सहयोग करती हैं लेकिन बुरी आदतें आपको सिर्फ क्षति पहुँचाती है, ये जानने के बावजूद भी बुरी आदतें छोड़ना आसान क्यों नहीं होता ?

वैसे तो बुरी आदतों की लिस्ट काफी लम्बी हो सकती है जिसमें आपके तन और मन को हानि पहुंचाने वाली सभी आदतें शामिल हो सकती हैं लेकिन आज हम बात करेंगे स्वयं को मोटापे की ओर जानबूझकर धकेलना, तम्बाकू उत्पादों और नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़ी बुरी आदतों के बारे में।

अमेरिका में हुए एक अध्ययन से पता चलता है कि अमेरिका में साल 2000 में हुयी मौतों के कारणों में से एक महत्वपूर्ण कारण था सिगरेट पीना, पोषण रहित भोजन और व्यायाम की कमी। उस साल तम्बाकू के सेवन से हुयी मौतों का आंकड़ा 435,000 रहा, पोषण रहित भोजन और व्यायाम रहित जीवन के कारण 400,000 मौतें हुयी और ऐलकोहल के सेवन से मरने वालों की संख्या 85,000 रही।

ये बुरी आदतें जानलेवा साबित होती हैं, ये जानने के बावजूद भी, आखिर ऐसे क्या कारण है जो लोगों को बुरी आदतें छोड़ने नहीं देते –

स्वयं में जागरूकता की कमी –
आदत कोई भी हो, उसे नियंत्रित करना व्यक्ति के अपने हाथ में होना चाहिए, न कि उस लत के हाथ में कि वो किसी व्यक्ति को अपने नियंत्रण में रखे। तम्बाकू और नशे के सेवन से शरीर के अंग ख़राब होने लगते हैं, कैंसर जैसा भयानक रोग हो सकता है और इनसे परिवार की सेहत पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है, ये जानते हुए भी लोग इन बुरी आदतों बनाम लतों को छोड़ नहीं पाते क्योंकि उनमें सही और ग़लत काम के प्रति जागरूकता का अभाव है।

सभी ऐसा करते हैं –
ये जानने के बावजूद कि नशे का सेवन सेहत को पूरी तरह से तहस-नहस कर देता है, लोग इसे छोड़ना नहीं चाहते। इसका कारण है इन नशीले पदार्थों को मिली हुयी सामाजिक स्वीकृति। हर व्यक्ति अपने आप को इस लत से बचाने की बजाये, इसका शिकार बनता जाता है क्योंकि उनका मानना है कि समाज में अधिकाँश लोग ऐसा करते हैं और आजकल का यही चलन है। ऐसी सोच लोगों को इन बुरी लतों को बनाये रखने के लिए भी प्रेरित करती है।

ये आदतें पीढ़ियों से चली आ रही हैं –
तम्बाकू और नशे का सेवन करने वाले लोगों का मानना होता है कि ये आदतें बुरी नहीं है क्योंकि ये उनकी पुरानी पीढ़ियों से चली आ रही है। लोगों के तर्क ये भी होते हैं कि उनके पूर्वज सिगरेट पीने के बावजूद 90 साल तक जिए, इसलिए उनका स्वास्थ्य भी अच्छा ही बना रहेगा और इसलिए पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाली इन बुरी लतों को बिना तोड़े, बेझिझक परंपरा के रूप में आगे बढ़ाया जाता है।

दोस्तों के बीच प्रभाव बनाने के लिए –
नशे और तम्बाकू का सेवन करने वालों में युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है और उसका सबसे बड़ा कारण है अपने हमउम्र दोस्तों के बीच अपना प्रभाव बनाने की चाहत। ग़लत संगत में पड़ने के बाद खुद को उन दोस्तों के बराबर दिखाने के लिए युवा नशे का सेवन करने से नहीं झिझकते और बहुत ही कम समय में इन बुरी लतों के शिकार बन जाते हैँ।

अनावश्यक मात्रा में भोजन करने और शारीरिक श्रम रहित जीवन जीने की आदतें भी लत के समान ही नुकसानदायक होती हैं क्योंकि मोटापे से अनगिनत बीमारियाँ जन्म लेती हैं और बिना व्यायाम के निष्क्रिय बन चुके शरीर में भी बीमारियाँ बड़ी आसानी से अपना घर बना लेती हैं।

जो भी आदत आपके शरीर और आपके मन को क्षति पहुँचाये, उसे छोड़ देना ही सबसे सही विकल्प होता है। इसके लिए शुरुआती प्रयास आप ही को करने होंगे जैसे अपने मन पर नियंत्रण करने की कोशिश और अपना ध्यान इन आदतों से हटाकर कहीं और लगाना का प्रयास । इसके साथ-साथ आप डॉक्टर से परामर्श लेकर इन बुरी आदतों से छुटकारा पाने की राह पर आगे भी बढ़ सकते हैं। जरुरत है तो सिर्फ ये समझने की कि ये आदतें आपको किसी भी तरह का कोई लाभ नहीं पहुँचा सकती, इनसे अगर कुछ मिल सकता है तो वो है सिर्फ तकलीफ।

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