2050 तक भारत को सामना करना पड़ सकता है इन परेशानियों का

आज के समय में अधिकतर भारतीय बहुत ही कठिन सामाजिक व्यवस्था से जूझ रहे हैं पर आने वाले समय में कुछ ऐसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं जिनके बारे में आप सोच भी नहीं सकते हैं। सही मायनो मैं देखा जाये तो भविष्य की चिंता तो सबको है पर वह मूल रूप से पैसों से सम्बंधित है उसका और कोई मूलभूत आधार नहीं है। मगर एक बार आप बस यह सोच के देखिये की अगर पैसा समस्या ना हो तो इसके अलावा भी बहुत सारी ऐसी समस्या हैं जो आपके जीवन को अस्त व्यस्त कर सकती हैं। आइये उन बातों पर प्रकाश डालते हैं।

1. ज़रा सोचिये आप 1 साल तक जिम जाते हैं मगर 1 साल के बाद आप अपने आप को उसी स्थिति में पाते हैं जहाँ से आपने शुरू किया था तो उसका क्या कारण मानते हैं आप ? एक अध्यन के अनुसार अमेरिका में अधिकतर लोग उदासीन हैं और इसकी मूलभूत वजह कहीं न कहीं पैसा है। अगर औसतन अमेरिकी की ख़ुशी का मापदंड निकला जाये तो वह 2.2 प्रतिशत है जो की बहुत काम है। इस बात में कोई दो राय नहीं है की कहीं ना कहीं भारत भी इस समस्या का सामना आने वाले भविष्य में करेगा। जो लोग पैसे को अपनी ख़ुशी मान बैठे हैं वो उसी से दुखी हो जायेंगे लेकिन अभी यह बात लोगों को इतनी बड़ी समस्या नहीं लगती है।

2. ज़्यादा सम्पन्नता तनाव को बढ़ाने में भी मददगार है इसको हम इस प्रकार समझ सकते हैं। आने वाले समय में जब व्यक्ति शारीरिक श्रम काम करेगा और मानसिक श्रम ज्यादा करेगा तो ऐसा होना लाज़मी है। प्रतिस्पर्धा के ज़माने में जहाँ हर समय आपको अपने आप को और अपनी काबलियत को साबित करना पड़े तो यह समस्या उत्पन् हो जाती है। यह बात आज तक वैज्ञानिको की समझ में भी नहीं आई है की संपन्न होने के बाद भी ऐसा क्यों हो रहा है।

3. जिस देश में रहने वाले अधिकतर लोगों की संख्या अमीर होती है वहां यह बात होना लाज़मी है की अगर आप एक मध्यम वर्गीय व्यक्ति हैं तो आप अपने सपनो का आशियाना यानि एक रहने लायक घर खरीदने में असमर्थ हो जायेंगे। यह बात आप अभी दिल्ली मुंबई के माहोल और ज़मीनो के दामो को देख के समझ सकते हैं।

4. समस्या का अंत यहीं नहीं होता घर पहुचना भी एक समस्या हो जाएगी क्योंकि अगर हर व्यक्ति गाड़ी खरीदलेगा तो सड़कों पर अनायास ही यातायात में वृद्धि हो जाएगी। यह समस्या अन्य दी गयी समस्याओं से कई ज्यादा बड़ी है क्योँकि इससे बहुत सारी अन्य समस्याएं जुडी हैं जैसे वायु प्रदूषण उसमे भी इज़ाफ़ा हो जायेगा।

5. एक आम सी दिखने वाली जटिल समस्या है अकेला पन का होना, पर आने वाले समय में यह समस्या बहुत अधिक बढ़ जाएगी। ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि लोगों का आपसी रिश्तों पर से विश्वास उठता जा रहा है और जैसे जैसे सम्पनता बढ़ेगी अविश्वास भी बढ़ेगा। उस समय व्यक्ति को खुद ही तय करना पड़ेगा की वह किस तरफ जाना चाहता है।

6. अधिक प्रतिस्पर्धा के कारण लोगों के पास न ही किताब पढ़ने का समय होगा न कुछ और करने का, यह हम सबकी कलात्मकता को खत्म कर देगा। ऐसे में व्यक्ति नशे और अन्य बुरी आदतों का शिकार होगा जो समाज में व्याप्त बुराइयों को और बढ़ाएगा।

7. लोग अप्राकृतिक होना शुरू हो जायेंगे और अभी तो कुछ लोग गाँवो में रहते भी हैं तब शायद ऐसा ना हो। हमें इस बात का ख्याल रखना होगा की कहीं हम अपनी प्रकृति से खिलवाड़ तो नहीं कर रहे हैं।

यह सवाल हम सब को खुद से करना पड़ेगा कहीं हम विकसित होने की जगह अपनी आत्मा को ही तो नहीं मार रहे?

विकास जरुरी है मगर ऐसा विकास किस काम का जहाँ व्यक्ति बोध से ही दूर हो जाएँ। इस लेख को लिखने का उदेश्य यही था ताकि हम आने वाली परेशानियों के बारे में सजग हो जाएँ।

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