आजकल दिल से जुड़ी बीमारियों का ख़तरा बहुत बढ़ गया है और बाईपास सर्जरी का सम्बन्ध भी दिल से ही होता है। दरअसल दिल की तीन प्रमुख धमनियां होती हैं जिनमें कई बार रूकावट आ जाती है। ये रूकावट कई बार एक धमनी में और कई बार तीनों ही धमनियों में आ जाती है। हृदय के धमनी में ये रूकावट वसा के जमाव के कारण होती है जिससे धमनी कठोर हो जाती है और रक्त के बहाव में रूकावट आना शुरू हो जाता है।

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इस समस्या का समय रहते उपचार नहीं किया जाए तो धमनी के पूरा बंद हो जाने के कारण हार्ट अटैक भी आ सकता है। ऐसे में दिल की इन धमनियों में आयी ब्लॉकेज यानी रूकावट को दूर करने के लिए शरीर के किसी भाग जैसे पैर, हाथ, सीने या कंधे से नस निकालकर उसे दिल की धमनी के रुके हुए स्थान के समानांतर जोड़ दिया जाता है। ये नयी जोड़ी गयी नस धमनी में रक्त प्रवाह को फिर से सामान्य रूप से शुरू कर देती है और इस तकनीक को बाईपास सर्जरी कहा जाता है।

बाईपास सर्जरी को सीएबीजी यानी ‘कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट’ के रूप में जाना जाता है। बाईपास दो तरीके से बनाये जाते हैं। एक या दो जगह बाईपास बनाये जाने की जरुरत पड़ने पर इंटरनल मेमोरी धमनी का रास्ता बदलकर उसे कोरोनरी धमनी के संकरे हिस्से के अगले भाग में जोड़ दिया जाता है। ऐसा करने पर दिल के उस हिस्से में रक्त प्रवाह शुरू हो जाता है।

लेकिन जब दो या दो से ज़्यादा बाईपास बनाने होते हैं तो मरीज के पैर की नस यानी लॉन्ग सेफनस वेन का इस्तेमाल किया जाता है।

इसके लिए मरीज के पैर की इस नस को निकालकर, जरुरत अनुसार टुकड़े कर लिए जाते हैं। टुकड़े का एक सिरा बड़ी धमनी से जोड़ा जाता है और दूसरा सिरा कोरोनरी धमनी के संकरे हिस्से के आगे जोड़ दिया जाता है। इसी तरह जरुरत के अनुसार एक से ज़्यादा बाईपास ग्राफ्टिंग की जा सकती है।

कुछ बाईपास सर्जरी चिकित्सकों द्वारा पैर की धमनी के स्थान पर पेट में जाने वाली गैस्ट्रो-एपिप्लोइक आर्टरी का भी इस्तेमाल किया जाता है।

इस सर्जरी में करीब आठ घंटे का समय लगता है और सर्जरी के 14 दिन बाद टांकें खुल जाने के बाद, मरीज सामान्य जीवन जी सकता है लेकिन कुछ सावधानियां रखने की आवश्यकता होती है इसलिए उसे शुरुआती चार हफ्ते आगे की ओर नहीं झुकने के निर्देश दिए जाते हैं और लगभग 6 महीने तक भारी सामान उठाने से मना किया जाता है।

अगर मरीज द्वारा अपने आहार और रहन-सहन में सावधानी बरती जाती है तो इस सर्जरी के बाद स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है लेकिन लापरवाही करने की स्थिति में कुछ सालों में फिर से ब्लॉकेज की समस्या हो सकती है।

ऐसे में बेहतर यही होगा कि अपने आहार को अभी से संतुलित कर लें ताकि धमनियों पर वसा का अतिरिक्त जमाव ही ना हो लेकिन फिर भी अगर बाईपास सर्जरी की स्थिति आ जाए तो घबराएं नहीं और इसे करवाने में बिलकुल भी देर ना करें और सर्जरी के बाद डॉक्टर के निर्देशों का पूरी तरह पालन करें ताकि आपका दिल स्वस्थ और मजबूत बना रहें।

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