तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़ी कुछ मान्यताएं जो आपको हैरान कर देंगी

आज हम आपको भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़ी कुछ ऐसी मान्यताएं बताएंगे जो शायद आप नहीं जानते हैं। यह मान्यताएं जानकर आप हैरान हो जाएंगे।

यह माना जाता है कि वेंकटेश्वर स्वामी की मूर्ति पर जो बाल लगे हुए हैं वह असली बाल हैं और यह भी कहा जाता है की यह बाल कभी उलझते नहीं है और हमेशा इतनी ही मुलायम रहते हैं।

वेंकटेश स्वामी जो कि बालाजी के ही अवतार हैं उनकी मूर्ति का पिछला हिस्सा हमेशा गीला रहता है और अगर आप ध्यान से कान लगाकर सुनेंगे तो आप को आवाज भी सुनाई देगी।

अगर आप ध्यान देंगे तो मंदिर के दरवाजे की बाई तरफ एक छड़ी हमेशा रहती है। यह माना जाता है की इस छड़ी का उपयोग भगवान के बाल रूप को मारने के लिए किया गया था। उसी दौरान उनकी ठोड़ी पर चोट लग गई थी। जिस कारण बालाजी की मूर्ति पर चंदन का लेप लगाने की परंपरा की शुरुआत हुई।

आमतौर पर देखने में यह लगता है कि यह मूर्ति बिल्कुल बीचोंबीच स्थित है। लेकिन जब आप बाहर से खड़े होकर देखेंगे तो यह आपको यह स्थिति साफ हो जाएगी की यह मूर्ति मंदिर में दाईं ओर स्थित है।

आपको यह बता दें की मूर्ति पर चढ़ाए जाने वाले सभी फूलों और तुलसी के पत्तों को भक्तों में ना बांटकर परिसर में ही बने कुएं के अंदर फेंक दिया जाता है।

गुरुवार के दिन पूरी मूर्ति पर चंदन का लेप किया जाता है और जब यह चंदन का लेप हटाया जाता है तो इस पर लक्ष्मी माता के चिन्ह अंकित हो जाता है।

मंदिर में एक दीया कई सालों से जल रहा है और कोई यह नहीं जानता कि यह दिया किसने जलाया था।

मंदिर की मूर्ति पर कपूर चढ़ाया जाता है अगर किसी साधारण पत्थर पर कपूर चढ़ाया जाए तो वह कुछ ही देर में चटक जाएगा लेकिन मंदिर की मूर्ति पर इसका कोई प्रभाव नहीं होता।