आइये जानते हैं चांदी का वर्क कैसे बनाया जाता है। चांदी का वर्क लगी मिठाइयां देखने में भी मोहक लगती है और हर त्यौहर और अवसर की चमक भी बढ़ा देती है। कुछ समय पहले तक हम सभी चांदी का वर्क लगी मिठाई खाना ही पसंद करते थे और बहुत से लोग आज भी मिठाई को इसी तरह खाना पसंद करते है।

यहाँ तक कि पान भी चांदी का वर्क लगाकर खाया जाता रहा है लेकिन अगर आप सोचते हैं कि इस वर्क में चांदी की प्रचुरता होगी जिसे खाने से आपके शरीर को फायदा होगा तो ये जानकर आप चौंक जाएंगे कि इस चांदी के वर्क में चांदी शायद ही होती होगी।

ऐसे में ये जानना जरुरी है कि आखिर चांदी का वर्क बनाया कैसे जाता है। तो चलिए, आज आपको बताते हैं चांदी का वर्क बनाने की प्रक्रिया के बारे में।

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चांदी का वर्क कैसे बनाया जाता है?

एक अनुमान के अनुसार, हमारे देश में हर साल करीब 30 टन चांदी के वर्क की खपत होती है और इसे बनाने का काम कानपुर, जयपुर, अहमदाबाद, सूरत, इंदौर, रतलाम, पटना, भागलपुर, वाराणसी, गया और मुंबई जैसी कई जगहों पर होता है।

कहने को तो चांदी का वर्क बनाने के लिए चांदी को पीट-पीटकर एक पतली चादर में ढाला जाता है और इसे सहेजने के लिए कागज़ की परतों के बीच रखा जाता है।

इसके बावजूद चांदी के वर्क के शाकाहारी या मांसाहारी होने को लेकर चलने वाले संदेह को स्पष्ट करने के लिए इससे जुड़ी वास्तविक जानकारी लेना भी जरुरी है।

चांदी के वर्क पर की गयी कुछ स्टडीज के अनुसार गायों को मारा जाता है और उनके पेट से आंत निकालकर उसमें चमकीली चांदी जैसी धातु का टुकड़ा परत दर परत लपेटकर रखा जाता है।

उसके बाद खोल तैयार हो जाता है जिसे लकड़ी के हथौड़े से जोर जोर से पीटा जाता है जिससे आंत फैल जाती है और आंत के साथ धातु का टुकड़ा वर्क के रूप में पतला हो जाता है। चांदी का वर्क गाय की आंत में ही बनाये जाने का कारण ये है कि गाय की आंतें पीटने से फटती नहीं हैं।

लखनऊ के इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च के अध्ययन के अनुसार, बाजार में मिलने वाले चांदी के वर्क में लेड, निकल, क्रोमियम और कैडमियम बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है और ऐसे चांदी के वर्क को खाने से कैंसर जैसी घातक बीमारी हो सकती है।

मेडिकल स्टडीज के अनुसार, धातु का सेवन करने से लीवर, किडनी और गले को बहुत नुकसान पहुँचता है यानि इसके सेवन से सेहत पर बुरा असर पड़ना तय है।

स्टडीज और रिसर्च के अनुसार चांदी के वर्क में चांदी होती ही नहीं है जबकि फूड रेगुलेटरी ऑथोरिटी के अनुसार, चांदी के वर्क में 99.9% चांदी होनी चाहिए लेकिन जांच के दौरान ज्यादातर में चांदी थी ही नहीं।

ऐसे में आप समझ ही गए होंगे कि चांदी का वर्क आपकी सेहत को कोई फायदा तो नहीं पहुंचाता है बल्कि सेहत और आपकी भावनाओं से खिलवाड़ जरूर करता है इसलिए मिठाई जरूर खाएं लेकिन चांदी के वर्क को नजरअंदाज कर सके तो जरूर करें।

उम्मीद है जागरूक पर चांदी का वर्क कैसे बनाया जाता है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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