छींकते वक्त आंखें बंद क्यों हो जाती है?

सितम्बर 28, 2018

सर्दी-जुकाम होने और धूल-मिट्टी से एलर्जी होने पर छींक आना एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि हमें छींक क्यों आती है और छींकते वक्त आंखें बंद क्यों हो जाती है? हो सकता है कि इस बारे में आप कभी सोच ना पाए हों या फिर इसका जवाब आपको अभी तक मिला नहीं हो। ऐसे में क्यों ना आज, हम इसी बारे में बात करें कि छींक आने के दौरान शरीर में कैसी प्रक्रिया होती है और छींकते वक्त हमारी आंखें बंद क्यों हो जाती हैं। तो चलिए, आज इसी रोचक बात को जानते हैं–

जब तक सांस लेने की प्रक्रिया सामान्य रूप से चलती रहती है तब तक छींक नहीं आती है लेकिन जब सांस लेने पर धूल का कण या कोई रेशा नाक में अटक जाता है तो उसे बाहर निकालने के लिए शरीर क्रिया करता है और ये क्रिया छींकना कहलाती है। धूल का कण सांस लेने की प्रक्रिया में बाधा बनता है इसलिए मस्तिष्क की ट्राइजेमिनल नर्व को सन्देश भेजा जाता है जिसके बाद फेफड़े ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन इकट्ठी करके जोर से बाहर निकालते हैं। ऐसा होने पर दबाव के साथ बाहर आयी हवा नाक में फंसे धूल के कण को बाहर निकाल देती है। छींक की स्पीड 160 किलोमीटर प्रति घंटा होती है।

छींकते वक्त आंखें बंद होने का कारण ट्राइजेमिनल नर्व होती है जो चेहरे, आंखें, मुँह, नाक और जबड़े को नियंत्रित करती है और जब मस्तिष्क द्वारा हर तरह के अवरोध को दूर करने का संकेत मिलता है तो ट्राइजेमिनल नर्व के जरिये ये संकेत आँखों तक भी पहुँच जाता है और इसी वजह से आँखे भी बंद हो जाती हैं।

दोस्तों, अब आप जान चुके हैं कि छींक क्यों आती है और छींकते वक्त आंखें बंद क्यों हो जाती है। उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी।

“सेब का सिरका के फायदे”

अगर आप हिन्दी भाषा से प्रेम करते हैं और ये जानकारी आपको ज्ञानवर्धक लगी तो जरूर शेयर करें।
शेयर करें