चेरापूंजी में इतनी ज्यादा बारिश क्यों होती है?

आइये जानते हैं चेरापूंजी में इतनी ज्यादा बारिश क्यों होती है। चेरापूंजी का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में जो बात आती है वो है सबसे ज्यादा बारिश। यहां भारत की सबसे ज्यादा बारिश होती है क्योंकि यह स्थल हमेशा बादलों से घिरा रहता है।

यह स्थल 25.30°N 91.70°E में स्थित है। यह 4869 फुट की ऊंचाई पर खासी हिल्स के दक्षिणी पठार पर स्थित है जहां पर मानसूनी हवाओं का हर समय जोर बना रहता है। इसके सामने बांग्लादेश का मैदानी इलाका पड़ता है। यह पठार आस-पास की पहाड़ियों पर 600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

यहां पर पूर्वोत्तर और दक्षिण-पश्चिमी मानसून की हवाएं आती हैं जिसकी वजह से यहां हर समय मानसून मौजूद रहता है। सर्दियों मे ब्रह्मपुत्र की तरफ से आने वाली पूर्वोत्तर हवाओं की वजह से यहां बारिश होती है। क्या आपको पता है कि चेरापूंजी में इतनी ज्यादा बारिश क्यों होती है। नहीं पता तो कोई बात नहीं हम आपको बता देते हैं।

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चेरापूंजी में इतनी ज्यादा बारिश क्यों होती है?

1. पर्वतीय संरचना – चेरापूंजी में सबसे ज्यादा बारिश होने की एक वजह इसकी पर्वतीय संरचना है। दक्षिण की तरफ से पहाड़ियों में उड़ते बादलों को हवा के दबाव से तेजी मिलती है। बादल खासी हिल्स से टकराते हैं जिसकी वजह से भारी बारिश होती है।

2. मानसूनी हवाएं – मेघालय की राजधानी शिलांग से 60 किलोमीटर दूर स्थित चेरापूंजी में दक्षिण-पश्चिम और पूर्वोत्तर की तरफ से मानसूनी हवाए आती हैं। जिसकी वजह से यहां बारिश होती रहती है।

3. जियोग्राफी – भारत में बारिश की राजधानी के तौर पर मशहूर चेरापूंजी की जियोग्राफी ऐसी है जिसकी वजह से नीचे उड़ रहे बादल इसके आसमान को भर देते हैं। यहां की हवाएं बादलों को घाटियों के ऊपर और तीखे ढलानों की ओर उठा देती है। इसके बाद ऊपर पहुंचे बादल तेजी से ठंडे होकर जम जाते हैं जिससे जोरों की बारिश होने लगती है।

4. वर्ल्ड रिकॉर्ड – अपनी तेज बारिश की वजह से चेरापूंजी के नाम कई वर्ल्ड रिकॉर्ड हैं। पहला रिकॉर्ड अगस्त 1860 से लेकर जुलाई 1861 के बीच में एक साल में सबसे ज्यादा बारिश का है तो दूसरा 1861 जुलाई में 22,987 मिलीमीटर (905.0 इंच) बारिश का है। दूसरा रिकॉर्ड 1861 के जुलाई महीने में सबसे ज्यादा 370 मिलीमिटर बारिश होने का है।

5. बेंत के छाते का इस्तेमाल करते हैं लोग – चेरापूंजी के लोग बेंत के छातों को हमेशा अपने पास रखते हैं क्योंकि आसमान से कभी भी बादल बरबस बरस पड़ते हैं। जिससे उन्हें बचाने का काम बेंत के बने यह छाते करते हैं। यहां के लोगों का ज्यादातर साल सड़कों की मरमम्त करने में लग जाता है। बारिश की वजह से सड़क टूट जाती है।

6. मनमोहक दृश्य – चेरापूंजी में गिरते पानी के फव्वारे, कुहासे का सामान एक अळग ही अनुभव देते हैं। यहां के लोगों को बसंत का शिद्दत से इंतजार होता है। यहां रहने वाली खासी जनजाति के लोग बादलों को लुभाने के लिए लोक गीत और लोक नृत्य का आयोजन करते हैं।

7. पानी की कमी – यह जानकर आपको हैरानी होगी कि बादलों से घिरे चेरापूंजी को कुछ महीनों तक सूखे का सामना करना पड़ता है। यहां नवंबर में सूखा अपना असर दिखाना शुरू करता है। इस समय स्थानीय लोग पानी के लिए पब्लिक हेल्थ इंजिनियरिंग के वाटर सप्लाई पर निर्भर रहते हैं।

अपने अंदर बेसूमार खूबसूरती सजोए हुए ये जगह हमेशा पर्यटकों से गुलजार रहती है। खूबसूरत वादियां, ठंडा मौसम यहां आने वाले लोगों को इस कदर लुभाता है कि वो बार-बार यहां आते हैं।

उम्मीद है जागरूक पर चेरापूंजी में इतनी ज्यादा बारिश क्यों होती है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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