चीनी को सफेद जहर क्यों कहते हैं?

व्यंजनों में मिठास घोलने के लिए सामान्य रूप से चीनी का ही इस्तेमाल किया जाता है और इन मीठे व्यंजनों को बहुत स्वाद लेकर खाया भी जाता है लेकिन इस स्वाद का आनंद लेते – लेते हम ये भूल रहे हैं कि चीनी की ये मिठास धीरे-धीरे हमारे शरीर में धीमा जहर घोल रही है जिसकी कड़वाहट का सामना कुछ वक्त बाद बीमारियों के रूप में हो ही जाएगा क्योंकि आपने भी ये जरूर सुना होगा कि चीनी सफेद जहर होती है। ऐसे में ये जानना जरुरी है कि आखिर मिठास से भरी चीनी को सफेद जहर कहे जाने का क्या कारण है ताकि हम भी अपनी सेहत से कोई भी खिलवाड़ होने से रोक सकें। तो चलिए, आज जानते हैं चीनी के इस सफेद सच को –

पाचन क्रिया मंद हो जाती है – चीनी की ज्यादा मात्रा शरीर में एसिड बनाने लगती है जो पेट में गैस बनने का कारण बनती है। चीनी को पचाने में 500  कैलोरी खर्च होती है यानि शरीर को बहुत मेहनत करनी पड़ती है और अगर चीनी खाने के बाद फिजिकल वर्क ना किया जाए तो शरीर में हानिकारक केमिकल रिएक्शन शुरू हो जाती है जो पाचन की गति को धीमा कर देती है।

मोटापा और डायबिटीज – चीनी में पोषक तत्वों का अभाव होता है और कैलोरी की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है जिससे ज़्यादा चीनी खाने के आदी लोगों में मोटापे की समस्या होने लगती है जो अपने साथ ढेरों बीमारियां लेकर आती है जिनमें डायबिटीज भी शामिल है, जो शरीर में इन्सुलिन की मात्रा असंतुलित होने के कारण होने वाला रोग है।

बुढ़ापा जल्दी आता है – चीनी के ज्यादा सेवन से ब्लड में एसिड बढ़ जाता है जिससे स्किन पर हानिकारक प्रभाव पड़ने लगते है, जैसे स्किन पर समय से पहले झुर्रियां आने लगती है और त्वचा पर बुढ़ापे के संकेत साफ दिखाई देने लगते हैं।

हृदय रोगों में बढ़ोतरी – चीनी का ज्यादा इस्तेमाल गुड कोलेस्ट्रॉल को घटाता है और बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को बढ़ाता है जिससे हाई बीपी और हृदय रोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

दांतों को नुकसान – चीनी का ज्यादा सेवन दांतों के ऊपरी आवरण इनेमल को हटा देता है। चीनी में कोई पोषक तत्व भी नहीं होते हैं और चीनी के कारण ख़राब बैक्टीरिया आसानी से मुँह में पनपने लगते हैं जो दांतों को नुकसान पहुंचाते हैं।

हड्डियों के लिए नुकसानदेह – चीनी का पाचन करने के लिए आवश्यक कैल्शियम हड्डियों और दांतों से लिया जाता है जिससे हड्डियों में फास्फोरस और कैल्शियम का संतुलन बिगड़ जाता है और हड्डियां कमजोर होने लगती है जिससे ऑस्टिओपोरेसिस जैसे हड्डी रोग पनपने लगते हैं।

स्वभाव में असहज बदलाव – ज्यादा चीनी खाने से व्यक्ति मूडी होने लगता है और तनाव महसूस करने लगता है। ऐसे लोगों का मूड स्विंग होता रहता है और ये कहीं भी खुश रहने में दिक्कत महसूस करने लगते हैं।

भूलने की आदत बढ़ना – चीनी ज्यादा खाने से ना केवल तनाव बढ़ता है बल्कि भूलने की आदत भी पड़ने लगती है।
चीनी से होने वाले नुकसानों को जानने के बाद आप चीनी खाना छोड़ें नहीं, क्योंकि चीनी की एक सीमित मात्रा शरीर के लिए जरुरी भी होती है क्योंकि चीनी शरीर को कार्बोहाइड्रेट और ग्लूकोज प्रदान करती है लेकिन शरीर के लिए जरुरी कैलोरी में, चीनी से मिलने वाली कैलोरी की मात्रा  10%  से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

एक चम्मच चीनी में लगभग 50  कैलोरी होती है और शरीर की जरुरत से ज्यादा चीनी लेने का मतलब बीमारियों को खुला निमंत्रण देना है। ऐसे में चीनी की मात्रा को सीमित कर लीजिये ताकि ये शरीर को ऊर्जा देने वाली मिठास ही बनी रहे, ना कि सफेद जहर बनकर शरीर पर हमला करे।

“चीनी खाने की आदत छोड़ें, होंगे ये आश्चर्यजनक स्वास्थ्य लाभ”

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