चिंता दूर कर जीवन को सरल बनायें ये उपाय

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प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि उसका जीवन खुशियों से भरा हो, हर दिन खुशनुमा बीते और चारों और सिर्फ आनंद और सुकून का वातावरण हो लेकिन ये ख़याल रखना किसी सुनहरे सपने जैसा लगता है क्योंकि आज के इस दौर में हर शख़्स के अरमानों और सपनों की लिस्ट इतनी लम्बी है कि उसे पूरा करते करते कब उनका जीवन ही पूरा हो जाता है, वो ये जान ही नहीं पाते। हमारा जीवन भी तो कुछ ऐसा ही है और अपने सपनों को पूरा कर पाने में जब भी हम असफल होने लगते हैं तो चिंता हमारी मित्र की तरह चौबीसों घंटों के लिए हमारे साथ हो जाती है। जबकि हम जानते हैं कि चिंता चिता समान है, फिर भी हम उसे अपनी असफलताओं का साथी बना लेते हैं और ये चिंता हमारे तन मन को सिर्फ क्षति ही पहुँचाती है। चिंता से कभी किसी को कोई लाभ हुआ हो, ऐसा तो आपने भी नहीं सुना होगा। अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की चिंता, नए और बड़े लक्ष्य बनाने की चिंता, शोहरत और सम्मान की चिंता और इतनी सारी चिंता करने के बाद सेहत बिगड़ जाने पर सेहत की चिंता, चिंता का साम्राज्य अंतहीन है। लेकिन चिंता दूर कर और इसे अपने जीवन पर हावी ना होने देना भी तो ज़रूरी है। तो चलिए, आज आपको बताते हैं कि चिंता में बने रहने की स्थिति में आपको कौनसे कदम उठाने चाहिए जिनसे आप चिंता दूर कर जीवन को सरल बना सकें।

ताज़ी हवा में सैर करिये – वैसे तो चिंता की स्थिति में कहीं भी जाने का मन नहीं करता लेकिन अगर आप चाहते हैं कि चिंता से भरे इन विचारों पर विराम लगे तो आप ताज़ी हवा में सैर करने निकल जाइये। खुले वातावरण की ताज़ी हवा आपके अंदर ताज़गी भर देगी और चिंता के नकारात्मक प्रभाव को भी आप कम होता हुआ पाएंगे।

गहरी सांस लीजिये – आप गौर कीजियेगा कि चिंता और तनाव जैसे नकारात्मक विचार जब आपके ज़ेहन में उथलपुथल मचा रहे होते हैं तब आपकी साँसे छोटी होती है यानि नेगेटिव ऊर्जा के समय आप छोटी-छोटी साँसे ले रहे होते हैं। साँसों और विचारों का गहरा सम्बन्ध होता है। आप आज़माना चाहते हैं तो गहरी सांसें लीजिये और देखिये कि क्या अभी भी आपको नेगेटिव विचार आ रहे हैं या सांसों के गहरा और लम्बा हो जाने से आप हल्कापन और पॉजिटिव फील करने लगे हैं।

माहौल बदलिए – जैसा माहौल वैसे ही मन के विचार। आसपास अगर अच्छा और खुशनुमा माहौल हो तो एक निराश व्यक्ति भी खुद को ऊर्जावान महसूस कर सकता है लेकिन अगर आप चिंताग्रस्त हैं तो आपके आसपास मौजूद नेगेटिव माहौल भी इसके लिए ज़िम्मेदार है। ऐसे में आप खुद को निराश करने की बजाए अपने माहौल को बदलिए। पॉजिटिव माहौल में आते ही आप महसूस करेंगे कि चिंता करना आपकी फितरत है ही नहीं, आप तो मुस्कुराना पसंद करते हैं।

अपनी चिंता को साझा करें – भले ही आप अपने नेगेटिव विचारों से अपने करीबी लोगों को परेशान नहीं करना चाहते हो लेकिन चिंता किसी बीमारी से कम नहीं और बीमार होने पर हमारे अपने ही तो हमारी देखभाल किया करते है ना, तो फिर इस चिंता के दौर में उन्हें याद करने में झिझकना कैसा? आपकी चिंता अगर समय के साथ बढ़ती जा रही है तो इसे अपने ख़ास और विश्वसनीय लोगों के साथ साझा कीजिये, ऐसा करके आप काफी हल्का महसूस करेंगे और हो सकता है कि कोई हल भी निकल आये।

रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से एक ब्रेक लें – रोज़ाना एक-सा काम करते रहना कई बार बोझिल हो जाता है और चिंता की मनोदशा को और अधिक प्रबल भी बना देता है जिसके परिणामस्वरुप आप चिड़चिड़े और गुस्सैल भी होने लगते हैं। ऐसे में कोई भी काम ढंग से कर पाने की अपेक्षा आप खुद से नहीं कर सकते। ऐसे में बेहतर यही होगा कि आप कुछ समय का ब्रेक लें और इस समय को आप अपनी पसंद के काम करने में बिताये। ऐसा करके आप ख़ुशी महसूस करेंगे और चिंता आपसे दूरी बना लेगी।

अपना ख़याल रखिये – चिंता एक ऐसी मनः स्थिति है जिसमें इंसान बुरे विचारों में डूबता चला जाता है। ऐसे में व्यक्ति अपनी देखभाल भी नहीं करता। लेकिन अगर आप चिंता से मुक्ति चाहते है तो इसके लिए आपको सबसे पहले आपकी सेहत का ख़याल रखना होगा। अच्छी डाइट, पर्याप्त नींद, व्यायाम जैसी चीज़ों का ध्यान रखकर आप अपने तन को स्वस्थ बनाये रख सकेंगे और ये तो आप जानते ही हैं कि स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन निवास करता है।

अकेले रहना हल नहीं है – चिंता की स्थिति में आप गुमसुम, अकेले ही समय बिताना पसंद करते हैं जबकि ऐसा करने से चिंता कम होने की बजाये बढ़ती जाती है। अगर आप चिंता के चक्रव्यूह को तोड़ना चाहते हैं तो सब के बीच घुल-मिलकर रहिये, बातें करिये, खेल खेलिए, घूमने जाइये। चिंता की स्थिति में ये सभी कार्य करने का मन नहीं करता लेकिन आपको तो चिंता को अपने जीवन से दूर करना है ना, तो इस दिशा में ये बेहतर प्रयास साबित होंगे।

अपने शौक पूरे कीजिये – अक्सर दिमाग में चलने वाले चिंता के विचारों को रोकने के लिए कुछ ऐसे काम करना ज़रूरी होता है जो आपके पसंद के हो और जिनकी तरफ आपका पूरा ध्यान चला जाए। ऐसे में आपके दिमाग में चिंता की जगह उत्साह ले लेता है, अपने मनपसंद काम करने का उत्साह। इसलिए चिंता में गवांने वाले समय का सदुपयोग खुद के शौक पूरे करने में करिये। चाहे कोई बुक पढ़िए, म्यूजिक सुनिए या फिर छोटे बच्चों के साथ मिलकर खेल खेलिए।

समय रहते अगर चिंता को दूर न करा जाए तो ये मानसिक रोग का रूप ले लेती है जिसे ठीक करना आसान नहीं रह पाता। छोटी-छोटी रोज़मर्रा की चिंताओं से शुरू होकर ये चिंता अपना आकार बढ़ा करती जाती है और आप इसके नियंत्रण में आ जाते है और उसके बात आपके जीवन में केवल तनाव और कुंठा जैसे नकारात्मक विचारों का ही स्थान रह जाता है। ऐसे में ज़रूरत है कि आप इसी क्षण अपने आप को चिंता दूर करने के प्रयास तेज़ कर दे ताकि ज़िन्दगी की इस मुस्कुराती दौड़ में आप आगे निकल जाएं और चिंता पीछे छूट जाये।

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“घबराहट को दूर करने के उपाय”

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