चुनाव आचार संहिता क्या है?

सितम्बर 26, 2017

चुनाव के दौरान आपने आदर्श आचार संहिता या चुनाव आचार संहिता जैसे शब्द कई बार सुने होंगे। क्या आप इसका मतलब जानते हैं? आपको बता दें कि निर्वाचन आयोग चुनाव के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और चुनावों को शांति से संपन्न कराने के उद्देश्य से आचार संहिता लागू करता है। चुनाव खत्म होने तक हर पार्टी और उम्मीदवार को इन निर्देशों का पालन करना होता है। अगर कोई नेता या पार्टी इन नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो चुनाव आयोग को उसके खिलाफ कार्रवाई करने के अधिकार होते है। इतना ही नहीं उस उम्मीदवार का टिकट रद्द किया जा सकता है और उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करा सकता है।

चुनाव आचार संहिता की घोषणा कब होती है? – मसलन अगर किसी राज्य में चुनाव होने वाले हैं, तो चुनाव आयोग राज्य में चुनावों की तारीखों की घोषणा के साथ-साथ आचार संहिता भी लागू कर देता है। इसके लागू होते ही राज्य सरकार और प्रशासन पर कई बंदिश लग जाती हैं। यानि चुनाव खत्म होने तक राज्य के सरकारी कर्मचारी चुनाव आयोग के कर्मचारी बन जाते हैं और उसके दिशा-निर्देशों पर काम करने लगते हैं।

चुनाव आचार संहिता लागू होने पर क्या होता है? – एक बार चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद प्रदेश का मुख्यमंत्री और उसके मंत्री किसी तरह की कोई घोषणा, उदघाटन या शिलान्यास नहीं कर सकते हैं। अगर वो ऐसा करते हैं, तो इसे आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा। इसका मतलब यह है कि वो कोई भी ऐसा काम नहीं कर सकते हैं, जिससे किसी विशेष दल को लाभ पहुंचे। इतना ही नहीं चुनाव आयोग उनके हर कामकाज पर कड़ी नजर रखता है। इसके अलावा उम्मीदवार और पार्टी को जुलूस निकालने या रैली और बैठक करने के लिए चुनाव आयोग से आर्डर लेना होता है और इसकी जानकारी निकटतम थाने में देनी होती है।

आदर्श आचार संहिता के कुछ नियम-

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