मान लीजिये कि आपका पसंदीदा कपड़ा किसी हिस्से से मैला हो गया है लेकिन बाकी का कपड़ा एकदम साफ है। ऐसे में आप अपने उस फेवरेट कपड़े के साथ क्या करना चाहेंगे? उसे इस्तेमाल करना छोड़ देंगे या कोई ऐसा रास्ता निकालेंगे जिससे आपका फेवरेट क्लॉथ भी आपके काम आ जाये और ख़राब हुआ हिस्सा भी आसानी से निकल जाए। इसके लिए शायद आप भी कैंची का इस्तेमाल करके उस कपड़े में से ख़राब हिस्से को काटकर अलग करना पसंद करेंगे और हो सकता है कि उसकी जगह आप कोई और बेहतर कपड़े का टुकड़ा भी जोड़ लें ताकि आपका पसंदीदा कपड़ा और भी ज्यादा सुन्दर लगने लगे। कुछ ऐसा ही होता है CRISPR तकनीक में, जिसमें शरीर में मौजूद बीमारी वाले जीन को काटकर अलग करने की कोशिश की जाती है और उसकी जगह अच्छा जीन लगाया जाता है। ऐसे में इस तकनीक के बारे में जानना आपके लिए काफी रोचक हो सकता है। तो चलिए, जानते हैं इस तकनीक के बारे में-

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CRISPR तकनीक में CRISPR-Cas9 जीन पाया जाता है जो जेनेटिक सीजर की तरह काम करता है और DNA के एक स्पेशल सेक्शन को काट देता है। CRISPR तकनीक कैसे काम करती है-

  • ये तकनीक एक कैंची की तरह काम करती है जिसकी मदद से आनुवंशिक तौर पर मिलने वाले बीमारी ग्रस्त जीन को काटकर अलग किया जा सकता है।
  • ख़ास तरीके से तैयार किये गए मॉलिक्यूल ख़राब DNA strand को खोज लेते हैं।
  • एंजाइम द्वारा टारगेट DNA स्ट्रेंड को काट दिया जाता है।

CRISPR तकनीक से होने वाले फायदे-

  • कैंसर ग्रस्त जीन को काटकर अलग किया जा सकता है और उसकी जगह स्वस्थ जीन को लगाया भी जा सकता है।
  • ख़राब DNA strand को अच्छे DNA strand से बदला जा सकता है। चीन में पहली बार लंग कैंसर का इलाज करने के लिए जीन एडिटिंग की तकनीक का इस्तेमाल किया गया।

CRISPR तकनीक से होने वाले नुकसान-

  • इस तकनीक का ग़लत उपयोग करके डिज़ाइनर बेबी बनाने की कोशिश की जा सकती है यानी बच्चे के आँख, नाक और बालों का रंग बिलकुल वैसा बना दिया जाएगा जैसा उसके पैरेंट्स चाहेंगे। इसे साइंस और एथिक्स के ख़िलाफ माना गया है।

“फेनमैन तकनीक क्‍या है?”