सीटीसी चाय पत्ती क्या होती है?

चाय का सफर चीन से शुरु होकर भारत पहुंचा और तब से भारत का सबसे पसंदीदा और लोकप्रिय पेय पदार्थ भी बन गया। पूरी दुनिया में पानी के बाद सबसे ज्यादा पीया जाने वाला पेय पदार्थ चाय ही है। शुरुआत में चाय को सर्दियों में एक दवा के रूप में लिया जाता था लेकिन इसे रोज पीने की परंपरा भारत में ही शुरू हुयी। भारत में चाय पीने की शुरुआत 1835 से हुयी। चाय के कुछ रूपों के बारे में ही हम जानते हैं जैसे काली चाय, हरी चाय, पीली चाय और सफेद चाय लेकिन असल में चाय की तकरीबन 1500 किस्में होती हैं। भारत में चाय का उत्पादन प्रमुख रुप से असम में होता है और असम का राजकीय पेय भी चाय ही है। आज जानते हैं सीटीसी चाय पत्ती क्या होती है।

वैसे तो चाय के कई प्रकार होते हैं और अलग-अलग स्वाद और महक वाली चाय तैयार करने के लिए उन्हें विशेष रूप से तैयार भी किया जाता है और उन्हीं में से एक प्रक्रिया होती है सीटीसी (CTC) जिसके द्वारा चाय का उत्पादन किया जाता है। CTC यानी Crash, Tear, Curl और कभी-कभी इसे Cut, Tear, Curl भी कहा जाता है।

इस प्रक्रिया में चाय की पत्तियां बागानों से तोड़ी जाती है। इसके लिए छोटी और कड़क पत्तियां चुनी जाती हैं और उन्हें मिल में ले जाया जाता हैं जहाँ चाय की इन पत्तियों को बेलनाकार रोलर्स से गुजारा जाता है। इन रोलर्स में कई दांत होते हैं जो पत्तियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देते हैं। इसके बाद चाय को प्रोसेस किया जाता है।

चाय बनाने की बाकी प्रक्रियाओं से कुछ अलग, इस प्रक्रिया में सिर्फ पत्तियों को पतली पट्टियों में तोड़कर गोल घुमा दिया जाता है।

इस प्रकिया का आविष्कार 1930 में सर विलियम मेककार्चेर ने असम में किया था और 1940 में ये क्रियाविधि भारत और अफ्रीका में फैल गई और आज पूरी दुनिया में काली चाय बनाने का यही तरीका इस्तेमाल किया जाता है।

दोस्तों, उम्मीद है कि चाय से जुड़ी ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपका मन भी चाय पीने का हो गया होगा।

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