सिस्टोस्कोपी क्या होती है?

मई 23, 2018

यूरिनरी ट्रैक्ट में बार-बार इन्फेक्शन होने और यूरिन से जुड़ी समस्याओं का पता लगाने के लिए सिस्टोस्कोपी की जाती है जिसमें मूत्रमार्ग (urethra) और मूत्राशय (bladder) के अंदर देखने के लिए सिस्टोस्कोप का इस्तेमाल किया जाता है। सिस्टोस्कोप एक पतला लम्बा ऑप्टिकल उपकरण होता है जिसके जरिये यूरिनरी ट्रैक्ट के स्पष्ट चित्र देखे जा सकते हैं। ऐसे में यूरिन इन्फेक्शन होने पर सिस्टोस्कोपी के जरिये कैसे निजात दिलाई जाती है, ये जानना आपके लिए भी काफी फायदेमंद हो सकता है इसलिए आज बात करते हैं सिस्टोस्कोपी के बारे में-

सिस्टोस्कोपी कब की जाती है-

इतना ही नहीं,सिस्टोस्कोपी का इस्तेमाल यूरिनरी ट्रैक्ट में से स्टोन या ट्यूमर निकालने और उनका इलाज करने के लिए भी किया जाता है।

सिस्टोस्कोपी कैसे की जाती है-

सिस्टोस्कोपी के लिए कपड़े उतारकर अस्पताल का दिया कपड़ा इस्तेमाल करना होता है। टेस्ट होने से एक घंटे पहले सीडेटिव दिया जाता है जिससे सहज महसूस होता है। इसके बाद बांह की नस में इंजेक्शन के जरिये दवाएं और लिक्विड डाले जाते हैं।

इसके लिए टेबल पर घुटने मोड़कर पीठ के बल लिटाया जाता है। इसके बाद एनेस्थिशिया का प्रभाव शुरू होने के बाद यूरोलॉजिस्ट द्वारा सिस्टोस्कोप की टिप को मूत्रमार्ग में डालकर मूत्राशय की ओर धीरे-धीरे ले जाया जाता है। इस दौरान सिस्टोस्कोप से एक स्टेराइल लिक्विड बहता है जो मूत्राशय को भरकर उसे स्ट्रेच कर देता है ताकि ब्लैडर वॉल को अच्छे से देखा जा सके। इसके बाद मूत्रमार्ग और मूत्राशय की लाइनिंग की जांच की जाती है। इस प्रक्रिया को पूरा होने में 15 मिनट से लेकर आधा घंटा तक लग सकता है और अगर स्टोन को हटाने या बायोप्सी करने के लिए ये प्रक्रिया की जा रही है तो इसमें लगने वाला समय ज्यादा भी हो सकता है।

सिस्टोस्कोपी के बाद की जाने वाली देखभाल–

सामान्य तौर पर सिस्टोस्कोपी के बाद मरीज सीधे घर जा सकता है लेकिन ये मरीज की स्थिति और एनेस्थीसिया के प्रभाव पर भी निर्भर करता है इसलिए डॉक्टर के निर्देशों का पालन करना चाहिए।

सिस्टोस्कोपी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मरीज को यूरिनरी ट्रैक्ट में जलन या बेचैनी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती है जो 24 घंटे में ठीक हो जाती है लेकिन ज्यादा तकलीफ होने की स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना जरुरी है।

दर्द ज्यादा होने की स्थिति में एंटीबायोटिक दवाएं और पेनकिलर दी जा सकती हैं।

जलन से राहत के लिए हलके गुनगुने पानी से नहाना चाहिए और डॉक्टर के बताये हर निर्देश का पालन  करना चाहिए।

दोस्तों, अब आप जान चुके हैं कि सिस्टोस्कोपी क्या होती है और कैसे की जाती है और अब आप इस बात से भी परिचित हैं कि किन लक्षणों के दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श करने की जरुरत है इसलिए यूरिनरी ट्रैक्ट से जुड़ी किसी भी समस्या को नजरअंदाज करने की बजाए उसके प्रति सतर्क हो जाएँ और स्वस्थ बने रहें।

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