डार्क एनर्जी क्या है?

पॉजिटिव एनर्जी और नेगेटिव एनर्जी जैसे शब्द तो आपने भी सुने है लेकिन ये डार्क एनर्जी जैसा शब्द आपके लिए शायद नया ही होगा। डार्क एनर्जी या श्याम ऊर्जा का सम्बन्ध ब्रह्माण्ड से होता है और ये काफी प्रभावशाली भी होती है। ऐसे में आपको भी इसके बारे में थोड़ी जानकारी तो होनी ही चाहिए इसलिए आज हम इसी बारे में बात करते हैं। तो चलिए, जानते हैं डार्क एनर्जी के बारे में।

डार्क एनर्जी एक ऐसा बल है जिसे आज भी रहस्य ही समझा जाता है लेकिन ये बल इतना प्रभावशाली है कि इसके प्रभाव से ब्रह्माण्ड के पिंड एक दूसरे से बहुत दूर होते जा रहे हैं। इस काल्पनिक बल का ऋणात्मक दबाव पूरे ब्रह्माण्ड में फैला हुआ है जो गुरुत्वाकर्षण के विपरीत प्रभाव के समान होता है।

डार्क एनर्जी से जुड़ी जानकारी 1998 में तब सामने आयी जब आकाशगंगाओं में विस्फोट की प्रक्रिया से गुजरने वाले सितारों पर सर्वे हुआ। इस सर्वे में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने पाया कि सुपरनोवा की प्रकाश दीप्ति अपेक्षा से कम है और इससे उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति पहले की तुलना में बढ़ गयी है। इससे पहले माना जाता था कि ब्रह्माण्ड के विस्तार की गति धीरे-धीरे गुरुत्वाकर्षण बल के कारण कम होती जा रही है।

सुपरनोवा का सर्वे ये बताता है कि ब्रह्माण्ड के विस्तार का त्वरण 5 अरब साल पहले शुरू हुआ था। उसके बाद डार्क एनर्जी के प्रभाव से ब्रह्माण्ड का विस्तार तेजी से होता जा रहा है जिसका परिणाम ये हो सकता है कि खरबों वर्षों के बाद हर आकाशीय पिंड एक दूसरे से तेजी से दूर होते जाएंगे और इंसान अकेला रह जाएगा क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बल सभी पिंडों को अपनी तरफ खिंचता है जबकि डार्क एनर्जी पिंडों को एक दूसरे से दूर ले जाती है।

एक अध्ययन से ज्ञात हुआ कि ब्रह्माण्ड का निर्माण 74% डार्क एनर्जी से, 22% डार्क मैटर से और सिर्फ 4% साधारण पदार्थ से हुआ है और हैरानी की बात ये है कि अभी तक हमें सिर्फ उस 4% के बारे में ही जानकारी है। डार्क एनर्जी का घनत्व काफी कम होता है, लगभग 10-29 g/cm3 और प्रयोगशाला में इसकी जांच करना लगभग असंभव है।

“आँख का वजन कितना होता है?”