अगर निर्णय लेने में हो रही है परेशानी तो आजमायें ये तरीके

अक्सर कितनी बार आप निर्णय लेते समय दुविधाग्रस्त हो जाते हैं, नहीँ जान पाते कि क्या सही है? ज़िन्दगी हमे कई बार उस चौराहे पर ला देती है जहां हमें ध्यानपूर्वक नफे और नुकसान को सन्तुलित करते हुए दूसरे रास्तों की जगह एक को चुनना होता है, अगर आप अपनी ज़िंदगी मे खुशहाल रहना चाहते हैं तो अपने दिल की सुने और अपने निर्णय पर दूसरे प्रभावोँ को हावी न होने दे…. अपने कैरियर और साथ ही साथ ज़िन्दगी में आगे बढ़ने के लिए निर्णय लेने की दक्षता आवश्यक है।

निर्णय लेना इतना कठिन क्यों है? – हम अक्सर किसी भी दिन सैकड़ों छोटे और शायद महत्वहीन निर्णय लेते हैं जैसे कब उठना है, व्यायाम करना है कि नहीँ, क्या पहनें, क्या खाएं, कहां जाएं, कैसे जाएं? ये निर्णय सेकंडों में किये जाते हैं और आसान होते हैं क्योंकि हमारी ज़िंदगी को बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं करते। जब निर्णय कई बाहरी कारकों से जटिल हो जाते हैं तब ये मायने रखते हैं। ऑफिस जाने के लिए क्या पहनें ये बहुत बड़ा मुद्दा नहीँ है पर जब कोई इंटरव्यू देना हो तो पहनावे के सम्बंध में निर्णय करते समय परेशानी होती है। यद्दपि नफे नुकसान को सोचे बिना, चुटकियों में निर्णय लेने की सलाह हम नहीँ देते फिर भी आपको तुरंत और सटीक फैसला लेते समय इन विचारों को याद रखना चाहिए।

  • ज्यादा सोचना हमेशा अच्छा नहीं होता
  • खुद पर भरोसा रखना सीखे
  • निर्णय लेने की समय सीमा निर्धारित करें
  • ये स्वीकार करे कि सब कुछ आपको नहीँ मिल सकता कहीं न कहीं थोड़ा बहुत समझौता करना होगा
  • अंत मे याद रखे निर्णय अंततः गलत भी साबित हो सकते हैं
  • ज़िन्दगी कभी असफ़लता भी देती है।

मैं अपनी निर्णय लेने की क्षमता में कैसे सुधार करूँ – अपने निर्णय लेने की समस्या को जानना एक अच्छा कदम है अगर आपको खाने का आर्डर देने में भी समस्या है तो आपको अपने निर्णय लेने की क्षमता में सुधार की जरूरत है।

कठिन पर आवश्यक निर्णय लेने सम्बन्धी 10/10/10 नियम – सूजी वेल्क (Suzy Welck) विभिन्न प्रकाशनो के लिए व्यवसायिक लेखिका है और उन्होंने आगे बढ़ने के लिए निर्णय लेने में सहायता के लिए एक सूत्र खोजा है, जिसे 10/10/10 कहा जाता है जो इसी नाम की पुस्तक में लिखा है। यह कहता है किसी भी निर्णय लेने के पहले तीन तरीकों से सोचो कि तुम इस निर्णय पर दस मिनट बाद क्या महसूस करोगे और इसी तरह दस महीने और दस साल बाद क्या महसूस करोगे। यह हमें एक नए परिप्रेक्ष्य में ले जाता है और निश्चित करता है कि हमे बाद में अफ़सोस न करना पड़े । अगर आपको लगता है कि निर्णय विशेष से आपको बाद में पछताना पड़ेगा तो आपको दूसरा रास्ता अपनाना चाहिए।

अपने डर का सामना करें और आगे बढ़े – अधिकतर समय हम निर्णय लेते हुए असहाय हो जाते हैं क्योंकि हम संभावित परिणाम से डरते हैं। अपने निर्णय के परिणाम के डर से हम इतना घबरा जाते हैं कि बहुत ज्यादा सोचते हैं और अन्तोगत्वा बहुत ज्यादा पीड़ा का अनुभव करते हुए जड़वत हो जाते हैं। इससे बाहर निकलने का तरीका यह है कि डर का सामना करें। बुरे से बुरे परिणाम को लिखें जो आपके निर्णय से हो सकता है – उदाहरण के लिए आपको आपकी पत्नी के साथ बहुत समस्या है और अपनी शिकायतें बाहर कहना चाहते हैं, लेकिन आप और बड़े झगड़े या रिश्ता खत्म होने से डरते हैं।

अगला चरण यह देखना होता है कि आप बुरे से बुरे हालात से कैसे निपट सकते हैं? यदि अलगाव होता है या तलाक़ भी होता है तो क्या आप और आपके बच्चे अकेलेपन से निपट सकते हैं? यदि आप इस बारे में सोचेंगे तो आप देखेंगे कि डर और बुरे से बुरे हालात कठिन लगेंगे लेकिन साथ ही साथ वे संभाले भी जाने योग्य हो जाते हैं।

ठहराव… फायदे और नुकसान को लिखें – TED(एक मीडिया संग़ठन) के वक्ता, RUTH CHANG(रुथ चांग) ने निर्णय क्षमता को बढ़ाने के लिए एक आसान रास्ता सुझाया है। वो कहती है कि जो फैसला आप लेने वाले हो उसके फायदे नुकसान बारे में लिखें क्योंकि कोई भी चुनाव सही या गलत नहीं होता। समाधान तभी असरकारक होता है जब हम दो विकल्पों में उलझ जाते हैं और दोनों हमें अच्छे लगते हैं। जैसे दो विवाह प्रस्तावों, दो नौकरियां या बच्चों के लिए दो स्कूल इत्यादि।

अपनी अनिच्छा और इस पर आधारित निर्णय से सावधान रहें – विशेषज्ञ कहते हैं हम अक्सर गलत फैसले लेते हैं क्योंकि हम जो चाहते हैं उस बारे में स्पष्ट नहीँ रहते। मनुष्य होने के कारण हम अपनी भावनाओं और अनुभूतियों पर निर्भर करते हैँ। लेकिन अनुभूतियां अपने स्रोत के बारे में कभी नही बताती और हम अक्सर उनके स्रोत को ठीक से समझ नही पाते जिससे अन्तोगत्वा हम ये भी नहीँ समझ नहीं पाते कि हम चाहते क्या हैं। हम कुछ चाहते हैं पर अपनी वास्तविक पसंद के बारे निश्चित नहीं रहते। जैसे हमें नया लुक चाहिए पर क्या ये हमे पसंद है इसके बारे में कुछ नहीं जानते। इसलिए कभी कभी हमारे निर्णय हमारी पसन्द पर आधारित होते हैं न कि जो हम चाहते हैं उस पर।

विरोधाभासी विकल्पों से बचना : कई वर्षों पूर्व निर्णय लेना आसान था क्योंकि आज की अपेक्षा विकल्प कम थे । पहले कमीज (shirt) खरीदना आसान था क्योंकि सिर्फ साइज और रंग ही चुनना होता था पर आज ब्रांड, फिटिंग, बटन, कपड़ा, कॉलर, पैटर्न, रंग और साइज आदि में से चुनाव करना होता है।

जैसा बैरी स्वार्टज(Barry Schwartz) ने TED से बातचीत में स्पष्ट तरीके से कहा कि आज हमारे पास कई विकल्प हैं। इसलिए हमारा हर सही या गलत फैसला एक अनोखे अफसोस पर ले जाता है क्योंकि हम हमारे पास विकल्प A, B, C,D……..X,Y,Z रहते हैं न कि A,B,C और D । ऐसा हर जगह होता है चाहे वो नौकरी हो या सैंडविच खरीदना हो या फिर आइसक्रीम का फ़्लेवर चुनना हो या फिर कार का मॉडल चुनना हो।

समस्या का समाधान आसान है विकल्प सीमित रखिए दूसरों की ओर देखने से अच्छा खुद की सुने। बाकी छोड़ दीजिए दुनिया को दुविधा में रहने दीजिए आप अपने फैसले से खुश रहिए । मुद्दे की बात यह है कि अगर आप खुश है तो दूसरों की परवाह क्यों करना।

हमने यह लेख प्रैक्टिकल अनुभव व जानकारी के आधार पर आपसे साझा किया है। अपनी सूझ-बुझ का इस्तेमाल करे। आपको यह लेख कैसा लगा? अगर इस लेख से आपको कोई भी मदद मिलती है तो हमें बहुत खुशी होगी। अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है, हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे।

“कभी जल्दबाजी ना करें वरना भुगतने पड़ेंगे ये नुकसान”

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