डिप्रेशन का मनोविज्ञान

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हम सभी के जीवन में कई बार ऐसे हालात आते हैं जब हम निराशा महसूस करते हैं, ये एक सामान्य बात है क्योंकि अपनी सफलता पर प्रसन्न होना और विफलताओं पर उदास होना स्वाभाविक ही तो है, लेकिन ये निराशा और उदासी कुछ समय के लिए हो, तब तक तो ठीक है लेकिन जैसे ही ये निराशा और हताशा से भरे विचार आप पर हावी होने लगे और लम्बे समय तक आप इसी निगेटिव माहौल में बने रहें तो संभल जाइये क्योंकि अगर आप अक्सर उदास, दुखी और हारा हुआ महसूस करने लगे हैं तो समझिये आप डिप्रेशन का शिकार होते जा रहे हैं जिस पर समय रहते आपने ध्यान नहीं दिया तो ये डिप्रेशन यानि अवसाद गंभीर मानसिक बीमारी का रूप ले लेगा जिससे बाहर निकल पाना आसान नहीं होगा। इसलिए इस अवसाद के कारणों और लक्षणों को जानना बहुत ज़रूरी है ताकि समय रहते हम इसकी आहट को पहचान सकें और इसे खुद से दूर रख सकें। हर उम्र के लोगों और महिला-पुरुष में डिप्रेशन का स्तर अलग-अलग होता है। तो चलिए, आज इसी पर बात करते हैं –

डिप्रेशन को अगर आप एक सामान्य सी मनःस्थिति मानते आये हो तो ये जानकर आप इसकी गंभीरता को समझ पाएंगे कि डिप्रेशन के चलते लोग आत्महत्या तक कर लेते हैं और इसका कारण होता है उनका स्वयं से पूरी तरह निराश हो जाना और अपने जीवन में किसी भी प्रकार के सकारात्मक बदलाव की आस छोड़ देना।

पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अवसाद ज़्यादा पाया जाता है जिसकी वजह कुछ हद तक शरीर में हार्मोन सम्बन्धी बदलाव होते हैं और अगर महिलाएं ज़्यादा सोना, ज़्यादा खाना, वजन बढ़ने की शिकायत रखती हैं और निराश महसूस करती हैं तो डिप्रेशन की इस आहट को सुन लीजिये।

वहीँ पुरुषों में तुलनात्मक रूप से कम डिप्रेशन पाया जाता है लेकिन इनमें सुसाइड की प्रवृति ज़्यादा पायी जाती है और अगर पुरुषों में डिप्रेशन के लक्षण पहचानना चाहते हैं तो गौर कीजिये कि क्या वो ज़्यादा थके हुए, चिड़चिड़े और काम में मन नहीं लगने और नींद नहीं आने की शिकायत करने लगे है ? इनके अलावा, क्या वो अब ज़्यादा गुस्सा करने लगे हैं और आक्रामक हो गये है? अलकोहल का ज़्यादा सेवन करने लगे हैं और लापरवाह भी होते जा रहे हैं ? अगर ये सभी लक्षण आप खुद में या अपने साथी या मित्र में देखते हैं तो तुरंत उसकी मदद कीजिये।

आजकल सबसे ज़्यादा अवसाद अगर किसी आयु वर्ग में देखा जा रहा है तो वो है युवा वर्ग, जो उत्साह और आशा से भरपूर उम्र के इस पड़ाव में घोर निराशा और अवसाद के शिकार होते जा रहें हैं और इनमें डिप्रेशन के कारण होते हैं- गलत संगत, सही मार्गदर्शन नहीं मिलने के कारण ग़लत राह पर चल देना, अपेक्षाओं पर खरा न उतर पाना और शरीर में होने वाले बदलाव जिसके कारण युवा गुस्सा और आक्रामकता दिखाने लगते हैं और उम्मीद की रोशनी फैलाने वाली ये पीढ़ी सबसे ज़्यादा सुसाइड करती है।

वहीँ बुजुर्गों में भी डिप्रेशन कुछ कम नहीं होता है। अकेलापन, दूसरों पर निर्भरता, आर्थिक असुरक्षा और शरीर से जुड़ी परेशानियों के चलते बुजुर्गों में अवसाद घर करने लगता है। अगर बुजुर्ग हर दिन तबीयत ख़राब होने की बात कहें तो समझ लीजिये कि वो अवसाद के शिकार हो सकते हैं और उन्हें आप के थोड़े समय की जरुरत है जिसमें आप से बातें करके वो अच्छा महसूस कर सकेंगे।
इनके अलावा डिप्रेशन के कुछ शारीरिक और मनोवैज्ञानिक लक्षण भी पहचाने जा सकते हैं-

शारीरिक लक्षण –
सिरदर्द, शरीर का कांपना, पसीना आना, मांसपेशियों में दर्द रहना, दिल का तेज़ धड़कना, बार-बार बाथरूम जाना, शरीर का पीला पड़ना, उल्टी का मन होना और ब्लड प्रेशर का कम-ज़्यादा होते रहना। अगर ऐसे शारीरिक संकेत आप खुद में या अपने किसी साथी में देखें तो तुरंत समझ जाइये कि ये डिप्रेशन है।

मनोवैज्ञानिक कारण –
अगर आप महसूस करने लगे कि आपको निराशा से भरे विचार ही आने लगे हैं, बुरे सपने आते हैं, सेहत को लेकर चिंता रहती है, अकेले रहना और कम बोलना पसंद आने लगा है, स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया है, हर बात पर गुस्सा आने लगा है, खुश रहना अच्छा नहीं लगता, बेवजह डर लगता है, काम में मन नहीं लगता है और हर समय चिंता और तनाव ही महसूस करने लगे हैं तो संभल जाइये क्योंकि ये डिप्रेशन है।

किसी भी शारीरिक और मानसिक बीमारी के कारण और लक्षण पता चल जाएँ तो समझिये कि आधी जंग तो जीती जा चुकी है और बाकी की आधी जंग जीतना भी अब आसान हो जाएगा जब आपको इस डिप्रेशन को दूर करने के तरीके पता चल जाएंगे –

माहौल को बदल दीजिये –
डिप्रेशन की शुरुआत किसी भी कारण से हो सकती है लेकिन डिप्रेशन का बढ़ते चले जाने का कारण होता है उसी निराशा भरी हार को याद करते रहना और अपने दिमाग में केवल नकारात्मकता को भरते चले जाना। ये जानने के बाद आप समझ ही गए होंगे कि इस अवसाद को दूर करने के लिए सबसे पहले उस माहौल को बदलना होगा जो आपको उन्हीं हताशा भरे पलों की याद दिलाता है जब आप हारे थे, विफल हुए थे और दुखी थे।

आखिर इस डिप्रेशन का कारण क्या है –
डिप्रेशन की स्थिति को पहचान लेने के बाद ये जानना भी तो ज़रूरी है कि आखिर ऐसा क्या हुआ था जिसके कारण आप डिप्रेस होते चले गए और ये तो आप जानते ही हैं कि मुश्किल कितनी भी बड़ी क्यों न हो, उसका हल आपके अपने पास होता है, तो फिर इस डिप्रेशन को आप खुद पर हावी कैसे होने दे सकते हैं। इसके कारण को ढूंढिए, लिखिए और बाहर निकलने का रास्ता खोजिये, बहुत जल्द आपको वो रास्ता भी मिल जाएगा।

चीखना हो सकता है बेहतर –
सामान्य स्थिति में चीखना अच्छी आदत नहीं मानी जाती है लेकिन डिप्रेशन की स्थिति में चीखना आपको राहत दिला सकता है। मनोवैज्ञानिकों की माने, तो चीखने से आप हल्का महसूस करने लगते हैं क्योंकि डिप्रेशन में तनाव, कुंठा और हीन भावना जैसे निगेटिव विचारों के चलते आप घुटन महसूस करते है जिसे बाहर निकालने का बेहतरीन तरीका है चीखना।

अकेले मत रहिये –
अगर आप वाकई डिप्रेशन को दूर करना चाहते है तो डिप्रेशन के कारण आप जिन आदतों के आदी हो गए हैं, आपको उन आदतों से भी दूरी बनानी होगी, जैसे कि अकेले रहने की आदत। अकेले रहना यानी अवसाद में घिरते चले जाना। इसकी बजाये आप अपने साथियों, परिवारजनों के साथ बैठिये, बातें कीजिये और अपने मन की बात शेयर कीजिये। ऐसा करके अवसाद को आप बहुत तेज़ी के साथ खुद से दूर करना शुरू कर देंगे।

म्यूजिक और मुस्कुराहट का साथ लीजिये –
गाने दिल का हर मर्ज़ ठीक करने की ताकत रखते हैं, इसलिए जोशीले, खुशनुमा गाने सुनिए और गुमसुम बने रहने की बजाये खुल कर हंसना शुरू कर दीजिये। शुरू में आपको थोड़ी दिक्कत ज़रूर होगी लेकिन जैसे-जैसे आपकी हंसी बढ़ती जायेगी, डिप्रेशन की उम्र घटती जायेगी।

प्राणायाम दिलाएगा निजात –
सुनने पर शायद आपको यकीन न हो लेकिन जब आप खुद प्राणायाम करना शुरू कर देंगे तो जान जाएंगे कि प्राणायाम करने से आपके मन के सारे निराशा से भरे विचार दूर होने लग जाते हैं, आपकी लम्बी और गहरी साँसे आपके अंदर सकारात्मक ऊर्जा भर देती है और कुंठा, निराशा, तनाव और हीन भावना जैसे अवसाद के साथी, प्राणायाम करने से हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं। इसके साथ ताज़ी हवा में सुबह की सैर भी आपको बहुत अच्छा और आशावादी महसूस करवाने के लिए पर्याप्त है।

नशीले पदार्थों का सेवन करने की सोचिये भी मत –
अक्सर निराशा और अवसाद की स्थिति में नशा करने का विकल्प दिखाई देने लगता है क्योंकि ये माना जाता है कि नशा करने से सारे गम भुलाये जा सकते हैं। लेकिन आप गम भूलना चाहते हैं या अपने आप को डिप्रेशन से आज़ाद कर लेना चाहते हैं। अगर सच में आप अवसाद से मुक्ति चाहते है तो नशीले पदार्थों के बारे में सोचिये भी मत क्योंकि ये आपको अवसाद से उबारने की बजाये उसमें और डुबोते चले जाएंगे।

अब आपने डिप्रेशन के कारण और लक्षण पहचान लिए है, साथ ही इस डिप्रेशन से निकलने के उपाय भी आप जान चुके है। ये जान लेने के बाद, अगर आपको लगता है कि आपको भी डिप्रेशन है तो ज़रा भी परेशान मत होइए। इन आसान से उपायों को अपनाकर आप सच में इस अनचाही उलझन से आज़ादी पा सकते हैं और अगर आपको लगता है कि आपका कोई करीबी, पूरी तरह डिप्रेशन में डूब चुका है तो डरिये मत और बिना देर किये किसी मनोवैज्ञानिक से सलाह लेने में झिझकिये मत। यकीन मानिये, डिप्रेशन से निकलना बेहद आसान है, बस इसके लिए आपको खुद के मन का ख्याल रखना होगा।

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