जानिये क्या होते हैं डिप्रेशन के लक्षण, कारण और निवारण

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जिंदगी में तनाव होना एक आम समस्या है लेकिन कुछ लोगों की जिंदगी में तनाव बहुत ज्यादा हो जाता है और वो इस तनाव को सहन नहीं कर पाते और डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं और कुछ लोग डिप्रेशन की उस स्टेज में पहुँच जाते हैं की अपनी जीवन लीला समाप्त करने का निर्णय ले लेते हैं। आज की दौड़ भाग की जिंदगी और नौकरी की बढ़ती टेंशन के चलते डिप्रेशन एक आम समस्या बन चुकी है जो जिसके असर काफी खतरनाक साबित होते हैं। डिप्रेशन के शिकार लोगों को अपना जीवन बेहद नीरस लगने लगता है और वो हमेशा अकेलापन महसूस करते हैं। ऐसी स्थिति में लोग काफी नकारात्मक हो जाते हैं और समाज और अपने दोस्तों तक से दूरी बना लेते हैं। अगर आपको भी ऐसा महसूस होता है तो हो सकता है आप डिप्रेशन के शिकार हों। आइये आपको बताते हैं डिप्रेशन के लक्षण, कारण और इससे निजात पाने के उपायों के बारे में।

डिप्रेशन के लक्षण

  • अगर आपको हमेशा ऐसा लगता है की आपका जीवन बेकार है और अक्सर आपको अपना जीवन समाप्त करने का विचार आता है तो
  • आप डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं जिसका जल्द इलाज करना बेहद आवश्यक है।
  • अगर आप पहले से और जरुरत से ज्यादा शराब या कोई और नशा करने लगे हैं तो ये डिप्रेशन के लक्षण हो सकते हैं।
  • अगर आप छोटी छोटी बातों पर बहुत ज्यादा आक्रामक और उत्तेजित हो जाते हैं और आप पहले से ज्यादा गुस्सा करने लगे हैं तो ये भी डिप्रेशन के लक्षण हो सकते हैं।
  • अगर आपको भूख लगना बेहद कम हो गया है या बहुत ज्यादा खाने के आदि हो गए हैं तो ये भी डिप्रेशन के लक्षण होते हैं।
  • अगर आप हमेशा नकारात्मक विचारों से ही घिरे रहते हैं और अगर आप हर घटना से नुकसान के बारे में सोचकर दुखी ही रहते हैं तो आप डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं।
  • अगर आप अपने आप को हमेशा निराशाजनक और असहाय महसूस करते हैं तो ये डिप्रेशन के ही लक्षण होते हैं।
  • अगर आप जो काम पहले बड़ी आसानी से कर लेते थे लेकिन अब किसी भी काम में ध्यान नहीं लगा पा रहे या ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे तो डिप्रेशन के लक्षण हो सकते हैं।
  • अगर आपको रात रात भर नींद नहीं आती या आप बहुत ज्यादा नींद लेने लगे हैं तो ये स्थिति डिप्रेशन के लक्षण को भी बताती है।
  • अगर आप अपने जीवन में अकेलापन महसूस करने लगे हैं और अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से संपर्क में नहीं रहते तो ये स्थिति आपके डिप्रेशन को बताती है।
  • कोई काम करते हुए दिमाग कहीं दूसरी तरफ भटकना या याददाश्त कमजोर हो जाना भी डिप्रेशन के लक्षण होते हैं।

डिप्रेशन के कारण

  • डिप्रेशन होने के कारण आपकी लाइफस्टाइल, दोस्तों और घरवालों या रिश्तेदारों से सम्बन्ध हो सकते हैं और ऐसे में बढ़ता तनाव डिप्रेशन का रूप ले लेता है। आइये आपको बताते हैं डिप्रेशन होने के क्या क्या कारण हो सकते हैं।
  • जीवन में अकेलापन और नीरसपन डिप्रेशन को न्योता देते हैं।
  • दोस्त, परिवार या सामाजिक सपोर्ट की कमी भी डिप्रेशन का कारण हो सकती हैं।
  • फाइनेंशियल समस्याएँ और अपने लक्ष्य को ना पाने की हताशा भी डिप्रेशन का कारण हो सकते हैं।
  • जिंदगी में हुए तनावपूर्ण अनुभव जो हमारी जिंदगी और हमारे दिल को बहुत गहरा सदमा पहुंचाते हैं उनके कारण भी हम डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं।
  • वैवाहिक या दुसरे रिश्तों में अक्सर होने वाली नोकझोक और तनाव जीवन में निराशा भर देते हैं जो डिप्रेशन का कारण बनते हैं।
  • बचपन में किसी चीज़ का अभाव या परिवार से प्रेम का अभाव या कुछ ऐसी घटनाएं जिन्होंने हमारा बचपन ख़राब कर दिया हो उनके कारण भी व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है।
  • जरुरत से ज्यादा शराब या दूसरी नशीली दवाओं और ड्रग्स का सेवन भी डिप्रेशन को न्योता देते हैं।
  • बेरोजगारी या लम्बे समय तक कमाई का कोई साधन ना मिलना भी डिप्रेशन के कारण बनते हैं।
  • जॉब में जरुरत से ज्यादा काम का बोझ भी डिप्रेशन का मुख्य कारण होता है।

डिप्रेशन के निवारण

  • अपने रिश्तों में मधुरता लाएं और उन्हें सुधारने की कोशिश करें।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें।
  • पौष्टिक तत्वों से भरपूर आहार लें।
  • नकारात्मक सोच से दूर रहें और हर चीज़ को हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण से ही देखें।
  • अगर आप अपने तनाव से छुटकारा पाने में मुश्किल महसूस कर रहे हैं तो बेहतर होगा की आप स्ट्रेस मैनेजमेंट से सम्बंधित कोई शार्ट-टर्म कोर्स कर लें।
  • अपने बढ़ते डिप्रेशन के इलाज के लिए मनोचिकित्सक से सलाह लें।
  • असफलता हर सफलता की पीछे वाली सीढ़ी है बिना असफलता के सफलता का स्वाद बेकार होता है इसी मानसिकता से असफलता से निराश और हताश हुए बिना हमेशा प्रयास करते रहें असफलता एक दिन जरूर सफलता में बदलेगी।
  • जब भी कभी आपको डिप्रेशन के चलते अपना जीवन समाप्त करने जैसे विचार आएं तो खुद को शांत करने के लिए मैडिटेशन करें और ऐसे विचारों को अपने दिमाग में ना आने दें क्योंकि जीवन समाप्त करना किस समस्या का समाधान नहीं है।

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