मधुमेह के कारण और बचाव के उपाय

जुलाई 28, 2017

आज का समय तकनीक का युग है जिसमें सब कुछ तेज़ी से, तुरंत हासिल हो जाता है। किसी को भी शारीरिक श्रम करने की ज़्यादा जरुरत नहीं पड़ती साथ ही आज के इस दौड़ते भागते समय में खानपान और रहन सहन का स्तर भी तेज़ी से बदला है। इस बदली हुयी जीवनशैली ने सुविधाओं का अम्बार लगाने के साथ साथ अनेक बीमारियों को भी हमारे जीवन में प्रवेश दिलाया है। ऐसी ही एक बीमारी का नाम है डायबिटीज यानि मधुमेह का रोग जो पहले अधिक उम्र के लोगों को ही हुआ करता था लेकिन आज बच्चे भी तेज़ी से इसका शिकार बनते जा रहे है। ऐसे में ये जानना जरुरी हो जाता है कि आखिर किन कारणों से मधुमेह रोग होता है, तो आइये आज आपको बताते है मधुमेह से जुडी ख़ास बातें–

हमारे शरीर में अग्नाशय ग्रंथि पायी जाती है जो इन्सुलिन हॉर्मोन का स्राव करती है लेकिन जब अनियमित जीवनशैली के चलते अग्नाशय से इन्सुलिन का स्राव कम हो जाता है तो रक्त में ग्लूकोस का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। इसी स्थिति को मधुमेह रोग कहा जाता है। इन्सुलिन ऐसा हॉर्मोन है जिसकी कमी से हमारा शरीर शर्करा की मात्रा को नियंत्रित नहीं कर पाता और जब रक्त में ग्लूकोस का स्तर लगातार बढ़ा रहता है तो ये आँखों, हृदय, किडनी और मस्तिष्क को भी नुकसान पहुंचाता है साथ ही भोजन से मिलने वाली ऊर्जा भी शरीर को पूर्ण रूप में नहीं मिल पाती है।

मधुमेह के प्रकार – मधुमेह रोग के 6 प्रकार होते है लेकिन ज़्यादातर लोगों में पाया जाने वाला मधुमेह 2 प्रकार का होता है।

टाइप 1 डायबिटीज – डायबिटीज का ये प्रकार ज्यादातर छोटे बच्चों और 20 साल से कम उम्र के लोगों में पाया जाता है। हमारे शरीर में अग्नाशय द्वारा इन्सुलिन नहीं बनाये जाने की स्थिति में टाइप 1 डायबिटीज की शुरुआत होती है और इस स्थिति में रोगी को अपने रक्त में ग्लूकोस का स्तर सामान्य बनाये रखने के लिए इन्सुलिन के इंजेक्शन लगवाने पड़ते है।

टाइप 2 डायबिटीज – मधुमेह के इस प्रकार में शरीर में इन्सुलिन का निर्माण तो होता है लेकिन वह शरीर की जरुरत के अनुसार नहीं होता। विश्व में अधिकाँश लोग मधुमेह के इसी प्रकार से ग्रसित है।

मधुमेह रोग होने के कारण-

आनुवंशिक – मधुमेह एक आनुवंशिक रोग है यानि पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाला रोग। माता-पिता को ये रोग होने की स्थिति में ये संभावना बढ़ जाती है कि उनकी संतानो को भी इस रोग का सामना करना पड़े।

अनियमित जीवन शैली – वर्तमान के रहन सहन और खान पान के तरीकों ने इस बीमारी को बढ़ाने में खासी मदद की है। फास्ट फूड के चलन ने मधुमेह रोगियों की संख्या को तेज़ी से बढ़ाया है। जंक फूड में वसा ज़्यादा पायी जाती है जिससे शरीर में कैलोरीज की मात्रा जरुरत से ज्यादा बढ़ जाती है और मोटापा बढ़ता है । मोटापा बढ़ने से इन्सुलिन का निर्माण आवश्यकता से कम होने लगता है और रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ जाने से मधुमेह रोग हो जाता है।

शारीरिक श्रम में कमी, मानसिक तनाव, दवाइयों का ज़्यादा सेवन और धूम्रपान और तम्बाकू का सेवन भी मधुमेह रोग के लिए उत्तरदायी कारक होते है।

मधुमेह रोग के लक्षण–

हर एक रोग अपने कुछ संकेत बताता है जिन्हें अगर ध्यान से देखा जाए तो उस रोग की पहचान समय पर की जा सकती है। मधुमेह रोग होने की स्थिति में शरीर में हुए बदलाव से ये लक्षण दिखाई देते है –

मधुमेह से बचाव और इसे दूर करने के उपाय–

तनाव से दूरी – अगर आप मधुमेह रोग से दूरी बनाये रखना चाहते है तो सबसे पहले तनाव को अपने जीवन से निकाल दीजिये क्यूँकि मधुमेह होने का एक बड़ा कारण तनाव लेना है। इसके लिए आप शारीरिक श्रम को बढ़ावा दीजिये और व्यायाम को अपनी दिनचर्या का आवश्यक अंग बनाइये।

संतुलित आहार – हरी सब्ज़ियाँ, अनाज और दालों जैसे पौष्टिक तत्वों को अपनी भोजन थाली का हिस्सा बनाइये और फास्ट फूड, ज़्यादा तेल-घी में बने खाने और ज़्यादा मीठी चीज़ों के सेवन को नियंत्रित कीजिये। साथ ही आपको मीठे फलों जैसे आम, लीची, केला, अंगूर, चीकू और शरीफा से भी दूरी बनानी होगी।

मेथी का सेवन – अगर आप अपनी डायबिटीज को नियंत्रित रखना चाहते है तो रोज खाने में 5-30 ग्राम मेथी कर सेवन करें और इस बात का विशेष ध्‍यान रखे कि इसकी मात्रा 90 ग्राम से ज्‍यादा ना हो। इसके सेवन के तुंरत बाद किसी भी प्रकार की दवा न ले और इसके सेवन के कुछ समय पहले और बाद तक कोई भी दवा ना ले।

अंगूर का रस – आप अंगूर के रस का सेवन कर सकते है या इसके लिए 50-100 मिलीग्राम के कैप्सूल भी आते हैं। यह आपके पाचन कोशिकाओं को सही रखता है और आपको स्‍वस्‍थ बनाता हैं। अगर आप कैप्सूल का सेवन कर रहे है तो ध्‍यान रखे कि इसकी मात्रा 300 ग्राम से ज्‍यादा ना हो।

जैतून का तेल – रोज रात को सोने से पहले एक चौथाई कप जैतून का तेल का सेवन जरूर करें । इससे आपके श‍रीर में कैलोरी की मात्रा सही रहेगी।

विटामिन सी – 100-600 ग्राम विटामिन-सी एक महीने के अन्‍दर आपके रक्त में शर्करा के स्तर को सामान्‍य करेगा।

अंजीर के पत्‍ते – अंजीर की पत्तियों के इस्‍तेमाल से शरीर में इन्‍सुलिन की मात्रा कम होती है। इनका सेवन रोज सुबह खाली पेट करने से फायदा मिलता है इसके अलावा पत्तियों को सुबह उबाल कर चाय की तरह भी पी सकते है।

दालचीनी का सेवन – रोज आधा चम्‍मच दालचीनी का सेवन करने से शर्करा कोलेस्‍ट्राल की मात्रा में कमी आती है।

मधुमेह रोग की स्थिति में किसी भी तरह की दवा या उपचार करने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह जरूर लें।

अब आप जान चुके है कि मधुमेह रोग किन कारणों से होता है और उसके उपाय क्या हो सकते है। लेकिन यदि आप मधुमेह रोग से दूरी बनाये हुए है तो आज ही से अपनी अस्त व्यस्त जीवनशैली को सुधार लीजिये और नियमित व्यायाम, शारीरिक श्रम और पौष्टिक आहार आपको मधुमेह से दूर रखने और स्वस्थ बनाये रखने में कारगर सिद्ध होंगें।

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