डायबिटीज में इंसुलिन क्यों जरूरी होता है?

मार्च 12, 2018

अनियमित जीवनशैली ने हमें बहुत से रोग उपहार में दिए हैं जिनमें से एक रोग है डायबिटीज, जो अपने साथ बहुत-सी और बीमारियों को भी निमंत्रण देता है। हमारे शरीर में जब पैंक्रियाज में इन्सुलिन का पहुंचना कम हो जाता है तो खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ता जाता है। इसी स्थिति को डायबिटीज कहते हैं। इन्सुलिन की कमी होने पर डायबिटीज के मरीज को बाहर से इन्सुलिन लेना पड़ता है। ऐसे में ये जानना जरुरी है कि इन्सुलिन क्या होता है और डायबिटीज में इंसुलिन लेना क्यों जरुरी हो जाता है। तो चलिए, आज आपको बताते हैं डायबिटीज और इन्सुलिन के इस करीबी सम्बन्ध के बारे में–

इन्सुलिन क्या है – इन्सुलिन, पाचक ग्रंथि द्वारा बनाया गया एक हार्मोन होता है जो शरीर के अंदर भोजन को एनर्जी में बदलने का काम करता है। हमारे शरीर में शुगर की मात्रा को कण्ट्रोल करने का ज़रूरी कार्य भी इन्सुलिन हार्मोन ही करता है।

इन्सुलिन क्यों लेना पड़ता है – डायबिटीज हो जाने की स्थिति में हमारे शरीर में कुछ बदलाव होते हैं, जैसे शरीर के लिए भोजन से एनर्जी बनाने का काम कठिन हो जाता है और ऐसे में ग्लूकोस का बढ़ा हुआ स्तर शरीर के अलग-अलग अंगों को नुकसान पहुँचाना शुरू कर देता है। शरीर के अंगों को इस नुकसान से बचाने के लिए ही डायबिटीज में इन्सुलिन लेना ज़रूरी होता है। इसे गोली के रूप में नहीं लिया जा सकता क्योंकि हमारे पेट में मौजूद केमिकल्स इसे निष्क्रिय कर देते हैं।

इन्सुलिन किन्हें दिया जाता है – टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों को जीवनभर इन्सुलिन लेना जरुरी होता है और अगर टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के लिए गोली का प्रभाव कम हो जाता है तो उन्हें भी इन्सुलिन लेना पड़ता है। इसके अलावा किसी तरह की इमरजेंसी जैसे कोई बड़ा ऑपरेशन, इन्फेक्शन, पीलिया, हार्ट अटैक या क्रिटिकल केयर में भर्ती व्यक्ति को और प्रेगनेंसी की स्थिति में डायबिटीज होने पर इन्सुलिन दिया जाता है।

इन्सुलिन से जुड़ी भ्रांतियां – कभी-कभी किसी कारण अगर शरीर में शुगर की मात्रा अचानक बढ़ जाती है तो कुछ समय के लिए इन्सुलिन दिया जाता है और इसके बाद इन्सुलिन बंद करके गोलियां दी जाती हैं। ऐसा माना जाता है कि एक बार इन्सुलिन लेने के बाद इसे जीवन भर लेना पड़ता है, लेकिन ये सिर्फ एक भ्रान्ति है क्योंकि अगर आपके शरीर की बीटा सेल्स सही तरीके से अपना काम कर रही हैं तो इमरजेंसी में इन्सुलिन लेने के बाद वापिस गोलियां शुरू की जा सकती हैं।

इन्सुलिन के बारे में बहुत से भ्रम मौजूद हैं जबकि इन्सुलिन को जीवनदायिनी दवा के रूप में अपनाया जाना चाहिए जो बहुत से डायबिटिक पेशेंट्स को लम्बे समय तक बेहतर जीवन जीने में मदद करती है और डॉक्टर्स के अनुसार इसे दवा की बजाए “रिप्लेसमेंट थेरेपी” कहा जाना चाहिए क्योंकि जब हमारे शरीर में पर्याप्त इन्सुलिन नहीं बन पाता तो हमें बाहर से इन्सुलिन लेने की जरुरत पड़ती है इसलिए ये दवा से ज़्यादा हमारी जरुरत होती है।

दोस्तों, अब आप इन्सुलिन के बारे में भी जान चुके हैं और डायबिटीज के साथ इसके सम्बन्ध से भी परिचित हो गए हैं। उम्मीद है कि अब इन्सुलिन से जुड़े भ्रम भी दूर हो गए होंगे और आपको ये जानकारी भी पसंद आयी होगी।

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