बच्चों के लिए कंप्यूटर गेम्स और गैजेट्स पर गेम्स कितने हानिकारक होते हैं?

अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाओं से भला कौन वंचित है? पूरी दुनिया इसी के पीछे भाग रही है। लेकिन… इसी भाग-दौड़ में हम अपने बच्चों को विरासत में क्या दे रहें हैं इसकी चिंता हमें समय रहते करनी है। जिस तेज़ी से कंप्यूटर का इस्तेमाल बड़े कर रहे हैं बच्चें भी कुछ कम पीछे नही हैं। आजकल के छोटे से छोटे बच्चे बड़ी आसानी से कंप्यूटर, टेबलेट, मोबाइल आदि गैजेट का इस्तेमाल कर लेते हैं। मानो जैसे कि पैदा होने से पहले ही सब कुछ सिख के आये हैं। आज हम आपको बताते हैं बच्चों के लिए कंप्यूटर गेम्स और गैजेट्स पर गेम्स कितने हानिकारक होते हैं।

हाल ही में किये गये एक अध्ययन के अनुसार स्मार्टफोन और कंप्यूटर बच्चों के जीवन की एक अहम जरूरत बन चुका है। बल्कि यह कहना ग़लत नही होगा की इन सुविधाओं के बिना बच्चे अपनी लाइफस्टाइल की कल्पना भी नही कर सकते। इस अध्ययन में 300 पेरेंट्स को शामिल किया गया और निष्कर्ष यह निकला की आजकल के बच्चों का रुझान टीवी की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन 80% से अधिक बच्चे टेबलेट, स्मार्टफोन और कंप्यूटर का उपयोग ज़्यादा करते हैं जो कि स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है। बच्चे जैसे-जैसे बड़े होने लगते हैं तो कंप्यूटर गेम्स, वीडियो गेम्स, लैपटॉप और इंटरनेट का इस्तेमाल भी ज़्यादा करने लग जाते हैं। हैल्थ एक्सपर्ट का कहना है बच्चों में इस तरह की आदत उनके मानसिक और शारीरिक दोनों को प्रभावित करती हैं।

हम आपको कुछ प्रश्न पूछते हैं अगर सभी का जवाब हाँ में हो तो आप अपने बच्चों के प्रति सतर्क हो जायें। क्या आपके बच्चे अकेले रहना पसंद करते हैं? क्या वे दिनों-दिन असामाजिक होते जा रहे हैं? क्या आपके बच्चों के व्यवहार में अचानक से कोई बदलाव आया है? क्या वे ज़रा-ज़रा सी बात पे हिंसक और अधीर हो जाते हैं? क्या आपके बच्चे आपसे ज़्यादा अपने कंप्यूटर को समय देना पसंद करते हैं?………अगर इन सभी प्रश्नों का उत्तर हाँ में है तो यह आपके लिए चिंता की बात है। वर्तमान समय में बच्चों के व्यवहार का सबसे बड़ा कारण उनका इंटरनेट पर अधिक समय बिताना है।

हम यह नही कहते कि आधुनिकता बुरी बात है लेकिन उसकी लत ज़रूर बुरी है। हमेशा गैजेट कि लत में रहने से बच्चे जीवन में आने वाली वास्तविक चुनौतियों का सामना करने में भी असमर्थ हो जाते हैं। इसके लिए सबसे अच्छा उपाय यह है कि कुछ उपायों से आप अपने बच्चों को नुकसान से बचाएँ। अगर आप जागरूक पर हमारा यह लेख पढ़ रहे हैं तो आपको यह जल्द समझ आ जायेगा कि कंप्यूटर गेम्स और गैजेट्स किस तरह आपके बच्चों का जीवन तहस-नहस करते हैं। इसलिए, बच्चे जो कंप्यूटर इस्‍तेमाल करते हैं उसमे कंप्यूटर गेम्स न रखें या फिर कम से कम और अच्‍छे गेम्स रखें। बच्चे के द्वारा इंटरनेट का इस्तेमाल करते वक्त उसकी गतिविधि पर ध्‍यान दें, ताकि वह साइबर क्राइम का शिकार न हो जायें।

आइये जानते हैं कम्‍प्‍यूटर, फोन या टेबलेट का अधिक इस्‍तेमाल बच्चों के लिए किस तरह हानिकारक है.

1. आँखों पर दुष्प्रभाव – कम्‍प्‍यूटर के अधिक इस्‍तेमाल से आंखों पर इतना बुरा प्रभाव पड़ता है कि नज़र कम हो जाती है और आँखों में जलन व दर्द की समस्‍या बचपन से ही शुरू हो जाती है।

2. शारीरिक विकास में कमी – लगातार अधिक देर तक कम्‍प्‍यूटर के सामने बैठे रहने से बच्चे की श्रम दक्षता के विकास पर असर पड़ता है। अगर बच्चे की उंगलियों और हाथों में लगातार जलन, दर्द या ऐंठन रहती है और कमर दर्द भी सताता है, तो वह इस समस्‍या से ग्रसित हो चुका है। उसे तय किये हुए समय तक ही कम्‍प्‍यूटर पर बैठने दें।

3. मोटापे से ग्रसित – कम्‍प्‍यूटर के सामने लगातार बैठे रहने कि आदत से बच्चे मोटापे के शिकार होने लग जाते हैं। जो कि एक प्रकार की बिमारी है, क्‍योंकि शरीर में लम्‍बे समय तक गतिविधि ना होने के कारण रक्त का संचार सुचारू रूप से नही होता और बचपन में ही कई प्रकार की गंभीर बिमारियों की आशंका बढ़ जाती है।

4. बदलता व्‍यवहार – लगातार कंप्यूटर और गैजेट्स के साथ वक्‍त बिताने के कारण बच्चे, दूसरों के सम्‍पर्क में नहीं आते। जिससे उनके व्‍यवहार में धीरे-धीरे परिवर्तन आ जाता है और वे चिड़चिड़े से हो जाते हैं।

5. अनिंद्रा की समस्या – वर्तमान में यह समस्‍या सबसे ज्‍यादा देखने को मिलती है बच्चों में, जो बच्चे कंप्यूटर के सामने ज्‍यादा समय बिताना पसंद करते हैं उनकी नींद में कमी आना स्वभाविक है फिर वे बड़ी मुश्किल से सो पाते हैं। ऐसी समस्या में बच्चे को सोने से पूर्व गेम्स कतई ना खेलने दें।

6. पढ़ाई से ध्यान हटना – जो बच्चे अपना अधिकतम समय कंप्यूटर या गैजेट्स के सामने बिताते हैं उनकी पढ़ने की क्षमता और याददाश्त पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिससे होनहार बच्चे भी धीरे-धीरे कक्षा में बुद्धु बच्‍चों की श्रेणी में शामिल हो जाते हैं।

7. असामाजिक होना – वर्चुअल दुनिया का साथ मिलने पर बच्चे अक्‍सर असामाजिक होने लग जाते हैं क्‍योंकि वे उस दुनिया में अपना मनचाहा करते हैं जहाँ उन्हें कोई रोकने वाला ही नहीं होता है। लेकिन, आप वास्‍तविक जीवन की राय देते रहते हैं, डांटते भी हैं, जो बच्चों को बिल्कुल पसंद नहीं आता है। ऐसे में बच्चे कब असामाजिक हो जाते हैं, पेरेंट्स को पता भी नही चल पाता है।

अगर बचपन में ही बच्चों के अंदर ऐसे दुष्परिणामों के बीज को हम बोने देंगे तो अब आप ही सोचिए, बच्चों का भावी भविष्य कैसा होगा? कोई भी आदत बच्चों में जन्म से नही होती। हम अपनी सुविधाओं के चलते बच्चों को ऐसी आदत का शिकार स्वयं ही बना देते हैं। जैसे की टीवी दिखाते-दिखाते खाना खिलाना, सार्वजनिक जगहों पर बच्चों को चुप कराने के लिए, बच्चे काम के दौरान बाधा ना बनें उसके लिए बच्चों के हाथ में गैजेट्स थमा देना जिससे उन्हें बच्चों को गोद में ना लेना पड़े।

चिंता की बात तो यह है कि पेरेंट्स के द्वारा गैजेट्स का इस्तेमाल बच्चों के मन को बहलाने के लिए किया जाता है। जबकि बच्चों के विकास और ग्रोथ के लिए उनका अपने माता-पिता से बातचीत करना आवश्यक है। आने वाले समय में डिजिटल साक्षरता की संभावना को जहां बल मिल रहा है वहीं दूसरी ओर हैल्थ एक्स्पर्ट्स इस ट्रेंड को लेकर चिंतित हैं कि इससे बच्चे पेरेंट्स के साथ ज्यादा समय नहीं बिता पायेंगे। हैल्थ एक्स्पर्ट्स की पेरेंट्स को यह सलाह है कि अपने बच्चों के साथ समय बिताये जिससे वे अकेलेपन के शिकार ना हो, नही तो टाइम पास के लिए कंप्यूटर गेम्स या गैजेट्स का सहारा लेंगे।

बच्चों को विश्वास दिलायें कि आपके पास उनके लिए हमेशा वक्त है। यही विश्वास बच्चों को मजबूती देगा और कंप्यूटर गेम्स / गैजेट्स की ओर रुझान में कमी लाएगा। हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको कैसी लगी? उम्मीद करते हैं यह लेख आपकी बहुत मदद करेगा।

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